उचित नहीं आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग : मायावती
- बसपा सुप्रीमो ने कांग्रेस को ठहराया आरक्षण विरोधी - आरक्षण के संवेदनशील मुद्दे

लखनऊ, विशेष संवाददाता
बसपा सुप्रीमो मायावती ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग का विरोध करते हुए कांग्रेस पर भी निशाना साधा है। बसपा आरक्षण के मुद्दे को विपक्षी दलों पर लगातार हमलावर है।
आरक्षण के खिलाफ मायावती की अपील
मायावती ने रविवार को अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि दिल्ली के जंतर मंतर पर संविधान में एससी-एसटी तथा ओबीसी समाज को दिये गये आरक्षण के विरुद्ध अभी हाल ही में जमा हुए कुछ लोगों ने आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू किए जाने की जो नई मांग उठाई वह उचित नहीं है। देशहित में भी नहीं है। आरक्षण के मामले में ऐसा कोई कार्य नहीं होना चाहिए, जिससे समतामूलक समाज, विकसित व सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक कार्यों को आघात पहुंचे।
कांग्रेस की आरक्षण विरोधी मानसिकता
मायावती ने कहा कि सभी सरकारें भी आरक्षण विरोधी तत्वों को शरण व संरक्षण न दें। यह व्यापक देश व जनहित में होगा। उनकी अपील है कि आरक्षण जैसे अहम व संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति न की जाए। मायावती ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जिस दिन पार्लियामेन्ट थाना के बाहर एक पीड़ित व्यक्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए घंटों धरने पर बैठे रहे, उसी दिन बगल में जंतर-मंतर पर दलित व शोषितों के जातीय आधार पर दिये जाने वाले आरक्षण को खत्म करवाने के लिए धरना-प्रदर्शन भी चल रहा था। पर वहां राहुल गांधी या उनका कोई भी कांग्रेसी साथी उन्हें प्रदर्शनाकारियों को समझाने नहीं गये। मायावती ने साफ किया कि राहुल गांधी के एक व्यक्ति के लिए धरने पर बैठने से बसपा का कोई ऐतराज नहीं है लेकिन आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग वालों का विरोध न करने से कांग्रेस की आरक्षण विरोधी मानसिकता भी साफ झलकती है।
भ्रष्टाचार के कारण योजनाओं का नुकसान
मायावती ने कहा कि जहां तक आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात है तो केन्द्र व राज्य सरकारें गरीबी उन्मूलन के अनेकों कार्यक्रमों पर हर वर्ष काफी सरकारी धन खर्च करती हैं। उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण योजनाओं का सही लाभ अगर देश के लोगों को नहीं मिलता है तो यह तो यह सरकारी व्यवस्था का सीधा-सीधा दोष है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई व्यवस्था भी देश में लागू है, जिसका भी सही लाभ अपरकास्ट समाज के गरीब परिवारों को नहीं मिल पा रहा है। वास्तव में यही वह भ्रष्ट व जातिवादी सरकारी व्यवस्था है, जिसने आरक्षण के संवैधानिक रचनात्मक प्रावधान को कभी सही से धरताल पर लागू ही नहीं होने दिया है।


