देश में संविधान और कानून का पालन करना सबके लिए समान क्यों नहीं: मौलाना अरशद मदनी
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सहारनपुर के कलेक्ट्रेट स्थित मस्जिद के ध्वस्त होने पर गहरा अफसोस जताते हुए सवाल उठाया कि संविधान और कानून का पालन सभी के लिए समान क्यों नहीं है। उन्होंने इसे नागरिक समानता और कानून के शासन का संवेदनशील मामला बताया, जिसमें पूजा स्थल अधिनियम का उल्लंघन भी शामिल है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सहारनपुर के कलेक्ट्रेट स्थित मस्जिद को ध्वस्त किए जाने पर कहा कि देश के सामने एक बार फिर सवाल खड़ा हो गया है कि संविधान, कानून का पालन करना प्रत्येक नागरिक और धर्म के लिए समान है। उन्होंने प्रशासन द्वारा मस्जिद गिराए जाने पर गहरा अफसोस जताया। मीडिया में जारी बयान में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि अगर संविधान सभी को बराबरी का अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और कानून का समान संरक्षण देता है तो उसे वास्तव में लागू करने में यह दोहरा मापदंड क्यों दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि सहारनपुर में मस्जिद पर बुलडोजर चलाए जाने की घटना सिर्फ एक मस्जिद का मामला नहीं है बल्कि यह संविधान की सर्वोच्चता, कानून का शासन, नागरिक समानता और राज्य की निष्पक्ष भूमिका से जुड़ा हुआ अत्यंत संवेदनशील मामला है।
मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि 1991 में जो पूजा स्थल अधिनियम लाया गया था वह अभी मौजूद है। प्रशासन की यह कार्रवाई न केवल उस अधिनियम का उल्लंघन है बल्कि जो नया वक्फ कानून लाया गया है उसकी भी स्पष्ट अवहेलना है। उन्होंने सवाल किया कि अगर अवैध कब्जा और अतिक्रमण ही कार्रवाई का एकमात्र मापदंड है तो फिर यही मापदंड हर वर्ग के लिए समान क्यों नहीं है।


