अब प्रसूता की मौत पर 24 घंटे में होगा आडिट
प्रदेश में मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए 24 घंटे में प्रसूता की मृत्यु का ऑडिट किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने यह निर्देश दिए। नए स्वायत्त मेडिकल कॉलेज और जिला महिला अस्पतालों के डॉक्टरों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। गेट्स फाउंडेशन के आंकड़ों के अनुसार, मातृ मृत्यु दर में 25 फीसदी की कमी आई है।

प्रदेश में किसी भी प्रसूता की मृत्यु होने पर 24 घंटे के भीतर ऑडिट किया जाएगा। कारण जानने के बाद संबंधित जनपद में सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत ये निर्देश दिए। उन्होंने 28 नवनिर्मित स्वायत्त चिकित्सा कॉलेजों व सभी जिला महिला अस्पतालों के डॉक्टरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने को भी कहा। एसीएस बुधवार को रीजनल रिसोर्स ट्रेनिंग सेंटर (आरआरटीसी) कार्यक्रम के 10 साल पूरे होने पर केजीएमयू के कलाम सेंटर में आयोजित समीक्षा कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आरआरटीसी के तहत अब तक प्रदेश के 1791 चिकित्सकों की ट्रेनिंग और कार्यस्थल पर मेंटरिंग की गई है। नतीजतन, बीते एक दशक में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में 25 फीसदी की कमी आई है। हालांकि, हमें इसे और कम करने के लिए निरंतर प्रयास करने होंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन जनपदों में बार-बार मृत्यु के मामले आ रहे हैं, उन पर विशेष फोकस किया जाए। पहले यह ऑडिट सप्ताह में एक बार किया जाता था।
नवजात के लिए सी-पैप मशीन वरदान
केजीएमयू की कुलपति डा. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि जन्म लेते ही जिन नवजातों को सांस लेने में परेशानी होती है, उनके लिए सी-पैप मशीन वरदान की तरह साबित हुई है। बाल रोग विशेषज्ञों को सीपैप के बारे में प्रशिक्षित कर ढेरों नवजातों की जान बचाई जा सकी है। कार्यशाला में डीजी परिवार कल्याण डॉ. शुभ्रा मिश्रा व डीजी प्रशिक्षण डॉ. रंजना खरे ने भी विचार रखे।
मातृ मृत्यु दर के आंकड़ों में हुआ सुधार
गेट्स फाउंडेशन के उपनिदेशक डा. देवेंद्र खंडैत ने पोस्टपार्टम हैमरेज के आंकड़ों में हुए सुधार पर चर्चा की। यूपीटीएसयू के सीनियर प्रोजेक्ट डायरेक्टर जान एंटनी ने बताया कि वर्ष 2016 में जब आरआरटीसी कार्यक्रम डिजाइन हुआ उस समय एमएमआर 197 प्रति एक लाख थी। आज 2026 में घटकर 154 रह गई है। नोडल अधिकारी डा. सीमा टंडन ने बताया कि इस ट्रेनिंग के दौरान डमी द्वारा इस तरह का अभ्यास कराया जाता है कि इमरजेंसी में किसी केस के आने के बाद किस तत्परता के साथ क्या-क्या कदम उठाने पड़ते हैं। केजीएमयू की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डा. अंजू अग्रवाल ने बताया कि अब तक प्रदेश के 20 मेडिकल कालेजों के डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।


