विज्ञान और गणित में दक्ष बनेंगे बच्चें, शिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण
डुमरांव के डायट सभागार में प्रखंड स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का चार दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न हुआ। प्रशिक्षण में शिक्षकों को बच्चों की शैक्षणिक क्षमता के अनुरूप शिक्षण तकनीक और गतिविधियों का व्यवहारिक ज्ञान दिया गया। समूह बनाकर बच्चों की क्षमता के अनुपात में गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर दिया गया।

युवा के लिए ------- चर्चा डायट सभागार में प्रखंड स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण का समापन गणित विषयों से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियों का अभ्यास कराया गया फोटो संख्या- 01, कैप्सन- शनिवार को डुमरांव के डायट सभागार में प्रशिक्षण शिविर के दौरान उपस्थित शिक्षक। डुमरांव, संवाद सूत्र।
प्रशिक्षण का शुभारंभ
प्रखंड स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का चार दिवसीय गैर-आवासीय प्रशिक्षण शनिवार को स्थानीय डायट सभागार में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बच्चों की वर्तमान शैक्षणिक क्षमता के अनुरूप शिक्षण कराने की तकनीक और गतिविधियों का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संभाग प्रभारी सुरेंद्र कुमार, जिला स्तरीय प्रशिक्षक संदीप कुमार आर्य, दुर्गमांगे, अश्विनी कुमार, रागिनी तिवारी, कंचन सिंह सहित अन्य प्रशिक्षकों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। प्रशिक्षण के दौरान टीचिंग एट द राइट लेवल की अवधारणा और विद्यालयों में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि बच्चों को केवल उनकी कक्षा के आधार पर पढ़ाने के बजाय उनके वास्तविक सीखने के स्तर की पहचान करना जरूरी है। इसके बाद समान स्तर वाले बच्चों के छोटे-छोटे समूह बनाकर उनकी क्षमता के अनुरूप गतिविधि आधारित शिक्षण कराया जाना चाहिए। इससे बच्चों को अपनी गति से सीखने और बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर मिलता है।
गतिविधियों पर जोर
इस दौरान भाषा और गणित विषयों से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियों का अभ्यास कराया गया। भाषा के क्षेत्र में ध्वनि व अक्षर पहचान, शब्द निर्माण, शब्द भंडार, माइंड मैपिंग और स्वतंत्र लेखन पर जोर दिया गया। बच्चों की प्रगति का लगातार आकलन करने पर जोर गणित में गिनती, जोड़-घटाव, गुणा-भाग, संख्या ज्ञान सहित गतिविधि आधारित गणितीय समझ विकसित करने की तकनीकों से प्रशिक्षुओं को अवगत कराया गया।कक्षा में बच्चों की प्रगति का लगातार आकलन और अवलोकन करने पर भी विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षकों ने कहा कि जिन बच्चों को अतिरिक्त सहयोग की जरूरत है, उन्हें व्यक्तिगत सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही समूह गतिविधियों में प्रत्येक बच्चे की भागीदारी सुनिश्चित करने और बच्चों को एक-दूसरे से सीखने के अवसर देने की जरूरत बताई गई। प्रशिक्षक दुर्गमांगे ने बताया कि चार दिवसीय प्रशिक्षण में बक्सर जिले के प्रत्येक प्रखंड से चार-चार मास्टर ट्रेनर्स को बेहतर शिक्षण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। अब ये मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने प्रखंडों में शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के साथ उन्हें अकादमिक सहयोग भी प्रदान करेंगे। (डुमरांव से अमरनाथ केशरी)


