रामसर साइट बनेगा सिंगरहना ताल, 22.54 करोड़ से ईको-टूरिज्म का हब बनेगा सोहगीबरवा
महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोहगीबरवा वन्यजीव अभ्यारण्य को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र

महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोहगीबरवा वन्यजीव अभ्यारण्य को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन ने मास्टर प्लान तैयार किया है। जिले में ईको-टूरिज्म के विकास व वैश्विक पहचान दिलाने के लिए डीएम गौरव सिंह सोगरवाल ने शासन के पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग को कुल 22.54 करोड़ रुपये की दो परियोजनाओं का प्रस्ताव भेजा है। इसके तहत जहां चौक रेंज के सिंगरहना ताल को रामसर साइट का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया तेज हो गई है, वहीं दर्जिनिया ताल और गंडक रिवर व्यू प्वाइंट को अत्याधुनिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
सिंगरहना ताल की प्राकृतिक सुंदरता
अभ्यारण्य के उत्तरी व दक्षिणी चौक रेंज में स्थित सिंगरहना ताल अपनी प्राकृतिक सुंदरता व जैव विविधता के लिए मशहूर है। डीएफओ निरंजन सुर्वे ने सिंगरहना आर्द्रभूमि को अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट घोषित कराने के लिए आरआईएस, मैप, ब्रीफ डॉक्यूमेंट व हेल्थ कार्ड सहित सभी आवश्यक अभिलेख उत्तर प्रदेश राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण को भेज दिए हैं। वर्ष 2022 से यहां शुरू हुई जंगल सफारी को और विस्तार देते हुए 6.10 करोड़ रुपये की लागत से नेचर ट्रेल, कैनोपी वॉक, बर्ड वॉच टावर, प्रवेश द्वार व टॉयलेट ब्लॉक का निर्माण प्रस्तावित किया गया है।
दर्जिनिया ताल व गंडक तट का विकास
दर्जिनिया ताल व गंडक तट पर खर्च होंगे 16.44 करोड़
निचलौल तहसील के झुलनीपुर क्षेत्र में स्थित दर्जिनिया ताल के मगरमच्छ प्रजनन केंद्र, टेल फॉल, झुलनीपुर बैराज व गंडक नदी तट को मिलाकर भव्य गंडक रिवर व्यू प्वाइंट बनाने की तैयारी है। सीएंडडीएस द्वारा तैयार 16.44 करोड़ रुपये के एस्टीमेट को डीएम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना में शामिल करने के लिए शासन को भेजा है। इस परियोजना के तहत पर्यटकों के लिए आकर्षक कैफेटेरिया, टनल, वॉच टावर, सेल्फी प्वाइंट, सोलर स्ट्रीट लाइट, इंटरलॉकिंग, बर्ड वॉचिंग पाथवे व हॉर्टिकल्चर वर्क कराए जाएंगे।
बाघों और डॉल्फिन का रोमांच
वीटीआर व चितवन कॉरिडोर से सोहगीबरवा में बढ़ेगा बाघों और डॉल्फिन का रोमांच
सोहगीबरवा वन्यजीव अभ्यारण्य बिहार के वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व व नेपाल के प्रसिद्ध चितवन नेशनल पार्क के प्राकृतिक कॉरिडोर में स्थित है। इस कॉरिडोर से होकर वीटीआर के बाघ अक्सर सोहगीबरवा क्षेत्र में आते-जाते रहते हैं। वर्तमान समय में भी सेंक्चुरी क्षेत्र में चार बाघों की सक्रिय आवाजाही और मूवमेंट दर्ज की जा रही है। इसके साथ ही, गंडक नदी के स्वच्छ प्रवाह में अटखेलियां करती दुर्लभ डॉल्फिन भी पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण हैं। प्रशासन का मानना है कि ईको-टूरिज्म के इस मेगा प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार व स्वरोजगार के नए द्वार खुलेंगे। गाइड, होम-स्टे, स्थानीय परिवहन, हस्तशिल्प और खान-पान के व्यवसाय से जुड़कर ग्रामीण युवाओं की आमदनी बढ़ेगी, जिससे भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र का समग्र आर्थिक ढांचा मजबूत होगा। जनपद वाइल्डलाइफ व ईको-टूरिज्म मैप पर मजबूती से स्थापित होगा।
डीएम की कार्ययोजना
डीएम गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि सोहगीबरवा वन्यजीव अभ्यारण्य में ईको-टूरिज्म के विकास के लिए इंटीग्रेटेड कार्ययोजना तैयार की गई है। सिंगरहना ताल को रामसर साइट में शामिल कराने व दर्जिनिया ताल व गंडक व्यू प्वाइंट को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 22.54 करोड़ रुपये के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। वित्तीय स्वीकृति मिलते ही धरातल पर काम शुरू कराया जाएगा।


