निवेश के नाम पर पांच हजार करोड़ की ठगी का आरोप
गाजियाबाद में ई-स्टोर इंडिया, एक्सिस ई-कारपोरेशन और वैदिक आयुरक्योर कंपनी के खिलाफ पांच हजार करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने कंपनी के प्रमुखों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। निवेशकों को पहले नियमित भुगतान करके फंसाया गया, लेकिन बाद में भुगतान रोक दिया गया।

गाजियाबाद, योगेन्द्र सागर। ई-स्टोर इंडिया, एक्सिस ई-कारपोरेशन और वैदिक आयुरक्योर कंपनी के नाम पर निवेश कराने के बहाने हजारों लोगों से करीब पांच हजार करोड़ रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश पर कविनगर पुलिस ने कंपनी के चेयरमैन, निदेशकों और अन्य पदाधिकारियों समेत दस लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और विश्वासघात समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। सिविल कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता महेश कुमार वर्मा ने अदालत में दिए प्रार्थना-पत्र में बताया कि कई वर्ष पहले कंपनी के प्रतिनिधि उनके चैंबर पहुंचे और निवेश योजना की जानकारी दी। उन्हें नौ हजार रुपये की एक आईडी पर हर महीने 1100 रुपये का निश्चित लाभ तथा कंपनी के ग्रोसरी स्टोर से खरीदारी पर 33 प्रतिशत तक की छूट का दावा किया गया। शुरुआत में कंपनी ने नियमित भुगतान कर निवेशकों का भरोसा जीत लिया। इसके बाद गाजियाबाद के मोहननगर, नेहरू नगर, राजनगर समेत कई स्थानों पर सेमिनार और प्रचार कार्यक्रम आयोजित कर बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा गया। प्रतिनिधि दावा करते रहे कि ऑनलाइन आईडी खरीदने पर हर माह तय रकम खाते में आती रहेगी। नियमित भुगतान से प्रभावित होकर हजारों लोगों ने अपनी बचत और उधार लेकर भी कंपनी में निवेश कर दिया。
करोड़ों की रकम फंसी
शिकायतकर्ता ने प्रार्थना-पत्र में दावा किया है कि उन्होंने खुद साढ़े छह लाख रुपये निवेश किए। इसके अलावा गाजियाबाद, मेरठ, मोदीनगर, पिलखुवा और अन्य शहरों के अनेक लोगों ने लाखों रुपये लगाए। किसी ने दो लाख, किसी ने पांच लाख, किसी ने 25 लाख, तो कई लोगों ने 30 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक का निवेश किया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी टीम और अन्य नेटवर्क के माध्यम से ही करोड़ों रुपये कंपनी तक पहुंचे। प्रदेश और देशभर के हजारों निवेशकों को जोड़कर आरोपियों ने करीब पांच हजार करोड़ रुपये का निवेश जुटा लिया।
ग्रोसरी स्टोर खोलकर जीता विश्वास
अधिवक्ता महेश कुमार वर्मा का आरोप है कि कंपनी ने भरोसा जीतने के लिए कई जगह ग्रोसरी स्टोर खोले, जहां घरेलू सामान पर 33 प्रतिशत तक की छूट दी जाती थी। स्टोर खोलने के नाम पर लोगों से 25 लाख, 30 लाख और 50 लाख रुपये तक के एग्रीमेंट भी कराए गए। उनका कहना है कि यह पूरी व्यवस्था अधिक से अधिक निवेश जुटाने की सुनियोजित साजिश थी। कुछ समय बाद कंपनी ने निवेशकों को मासिक भुगतान बंद कर दिया और वेबसाइट और मोबाइल ऐप भी बंद कर दिए। कार्यालयों पर ताले लग गए तथा जिम्मेदार लोग फरार हो गए। आरोप है कि कंपनी का मुख्य संचालक दुबई चला गया और वहीं से सोशल मीडिया और व्हॉट्सऐप वीडियो के जरिए रकम लौटाने का आश्वासन देता रहा, लेकिन किसी निवेशक को पैसा नहीं मिला। वर्मा का कहना है कि उन्होंने कविनगर थाने और पुलिस आयुक्त से कई बार शिकायत की, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं होने पर अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
इन लोगों को मुकदमे में आरोपी बनाया
मुकदमे में नोएडा के सेक्टर-13, सी-04 निवासी डॉ. फैजान खान, डीडी फ्लैट मयूर विहार फेज-दो निवासी उरोज अली खान, डीडी पार्क नई दिल्ली निवासी शमशाद अहमद, मेरठ के गांव कैली निवासी मुकेश कुमार त्यागी, रमेश पार्क एक्सटेंशन पार्ट-दो लक्ष्मी नगर नई दिल्ली निवासी मोहम्मद जफर और जफर के अलावा नजमा खान, सलाउद्दीन, हर्ष राजन तिवारी और पंकज सोनी को नामजद किया गया है। एसीपी कविनगर सिद्धार्थ गौतम का कहना है कि अदालत को आदेश पर 30 जुलाई को दस लोगों के खिलाफ कविनगर थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। विवेचना में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।


