झंडा-चादर लेकर शाह मंसूर की दरगाह के लिए रवाना हुआ अकीदतमंदों का जत्था
पिरान कलियर में 758वें सालाना उर्स के दौरान सैकड़ों अकीदतमंद झंडा और चादर लेकर हजरत शाह मंसूर की दरगाह के लिए पैदल रवाना हुए। यह उर्स रबीउल अव्वल की छह तारीख से शुरू होगा, जिसमें धार्मिक कार्यक्रम, दुआ, और लंगर का आयोजन होगा। स्थानीय लोगों में इस दरगाह प्रति गहरी आस्था है।

पिरान कलियर में चल रहे साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स के दौरान बुधवार को माह-ए-रबीउल अव्वल की पांच तारीख पर सैकड़ों अकीदतमंद झंडा और चादर लेकर हजरत शाह मंसूर रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह के लिए पैदल रवाना हुए। दरगाह साबिर पाक के मुख्य गेट से निकले जत्थे का नेतृत्व इस्तिकार अमन साबरी और मेहरबान साबरी ने किया। तीन दिवसीय सालाना उर्स रबीउल अव्वल की छह तारीख से शुरू होगा। जत्थे में शामिल अकीदतमंद पैदल शाह मंसूर की दरगाह पहुंचेंगे। वहां उर्स कमेटी की ओर से उनका स्वागत किया जाएगा। इसके बाद दरगाह पर झंडा चढ़ाया जाएगा और चादर व फूल पेश किए जाएंगे।
इस दौरान देश में अमन-चैन, खुशहाली, एकता और भाईचारे के लिए विशेष दुआ की जाएगी।हर वर्ष पिरान कलियर से अकीदतमंदों का पैदल जत्था शाह मंसूर की दरगाह पहुंचता है। उर्स के दौरान महफिल-ए-शमा, कुल शरीफ और बड़ी दुआ समेत विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अकीदतमंदों की ओर से दरगाह परिसर में लंगर भी कराया जाता है। घने जंगल के बीच स्थित शाह मंसूर की दरगाह के प्रति स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। मान्यता है कि यह दरगाह करीब एक हजार वर्ष से अधिक पुरानी है और हजरत शाह मंसूर ने इसी जंगल में तप किया था। इसी आस्था के चलते हर वर्ष उर्स के दौरान दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अकीदतमंद दरगाह पर पहुंचते हैं।


