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ससुराल में रह रही शादीशुदा बहन पर नहीं लगा सकते घरेलू हिंसा का आरोप, बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला

ससुराल में रह रही शादीशुदा बहन के ऊपर इस आधार पर घरेलू हिंसा का आरोप नहीं लगाया जा सकता कि वह घर में अक्सर आती-जाती रहती थी। यह बात बॉम्बे हाई कोर्ट ने घरेलू हिंसा के मामले की सुनवाई के दौरान कही।

ससुराल में रह रही शादीशुदा बहन पर नहीं लगा सकते घरेलू हिंसा का आरोप, बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला
Deepakलाइव हिन्दुस्तान,मुंबईThu, 15 Feb 2024 05:56 PM
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ससुराल में रह रही शादीशुदा बहन के ऊपर इस आधार पर घरेलू हिंसा का आरोप नहीं लगाया जा सकता कि वह घर में अक्सर आती-जाती रहती थी। यह बात बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को घरेलू हिंसा के मामले की सुनवाई के दौरान कही। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपियों की लिस्ट से बहन का नाम भी हटा दिया। जस्टिस शर्मिला यू देशमुख ने अपने फैसले में कहाकि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि व्यक्ति की विवाहित बहन अक्सर उसके घर आती रहती हैं। उन्होंने कहाकि यह मुलाकातें स्थायी नहीं थीं।

बहन की याचिका
यह आदेश उस उस याचिका पर आया है जो व्यक्ति की बहन ने सेशन कोर्ट के फैसले के बाद दायर की थी। इस याचिका में बहन ने अपने भाई के खिलाफ चल रहे दहेज उत्पीड़न के मामले से अपना नाम बतौर आरोपी हटाने की गुहार लगाई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहाकि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप सर्वव्यापी और सामान्य थे। साथ ही, घरेलू हिंसा के किसी खास ऐक्शन को उसके हवाले से नहीं बताया गया था। इसलिए याचिकाकर्ता के खिलाफ घरेलू हिंसा का कोई मामला नहीं बनता है। अदालत ने कहाकि मेरी राय में, याचिकाकर्ता और पीड़ित महिला के बीच कोई घरेलू संबंध नहीं है।

क्या है मामला
साल 2022 में एक महिला ने दहेज उत्पीड़न का केस दाखिल किया। यह केस गिरगांव में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के सामने दाखिल किया गया, जिसमें उसने पति, पति की बहन और पति की मां के खिलाफ शिकायत की थी। महिला के मुताबिक इन लोगों ने उसके खिलाफ अत्याचार किया है और खुद को उनके चंगुल से बाहर निकालने की भी गुहार लगाई थी। बाद में जब बहन ने मामले में खुद को आरोपी बनाने पर आपत्ति जताई तो 18 अक्टूबर, 2022 से उसके खिलाफ सुनवाई बंद हो गई थी। कोर्ट ने यह माना था कि शिकायत से पहले ही बहन की शादी हो चुकी थी और वह अपने ससुराल में रहने लगी थी। इसके बाद उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला ने सेशंस कोर्ट में इस बात को लेकर शिकायत की, जिस पर कोर्ट ने 16 सितंबर 2023 को अपना फैसला वापस ले लिया। सेशंस कोर्ट ने कहाकि बहन पीड़िता के साथ रहती थी या नहीं, इसका फैसला सुनवाई के बाद होगा। 

दी गई यह दलील
इसके बाद बहन ने हाई कोर्ट का रुख करने का फैसला किया। जस्टिस देशमुख ने उसकी इस दलील को बरकरार रखा कि उसकी शादी जून 2021 में हुई थी। यह शिकायतकर्ता की शादी से कम से कम पांच महीने पहले की बात है और वह अपने ससुराल में अलग रहती थी। इसलिए उसे शिकायतकर्ता के साथ वाले घर में रहने वाला नहीं कहा जा सकता है और घरेलू हिंसा में आरोपी नहीं बनाया जा सकता। जस्टिस देशमुख ने शिकायतकर्ता की इस दलील को खारिज कर दिया कि उसकी भाभी हर दोपहर आती थी और रात आठ बजे तक रहती थी। न्यायमूर्ति देशमुख ने कहाकि याचिकाकर्ता का केवल उस घर में जाना, कोई ठोस वजह नहीं है।

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