सेंट्रल कमेटी मेंबर आकाश ने अपनी नक्सल की बंग टुकड़ी को भंग किया
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेता 64 वर्षीय आकाश ने पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी की सैन्य इकाई 'बंग ब्रिगेड' को भंग कर दिया है। नक्सली आंदोलन के इतिहास में किसी सीसीएम स्तर के नेता द्वारा यह पहला मामला है। आकाश, जो कि सक्रिय मुख्यमंत्री सदस्य है, ने अपनी खराब स्वास्थ्य स्थिति और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के कारण यह फैसला लिया।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के शीर्ष नेताओं में शामिल 64 वर्षीय आकाश उर्फ असीम मंडल ने संगठन को बड़ा झटका दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उसने पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी की सैन्य इकाई ‘बंग ब्रिगेड’ को भंग कर दिया है। जंगल छोड़ने से पहले आकाश ने भूमिगत कैडरों को इस फैसले की जानकारी दी। नक्सली आंदोलन के इतिहास में पहली बार किसी केंद्रीय कमेटी सदस्य (सीसीएम) स्तर के नेता द्वारा किसी महत्वपूर्ण सैन्य इकाई को भंग किए जाने की बात सामने आई है। सीपीआई (माओवादी) संगठन में बंग कमेटी पश्चिम बंगाल स्टेट कमेटी या रीजनल कमेटी का हिस्सा है। यह पश्चिम बंगाल और उससे लगे सीमावर्ती जंगली इलाकों, जैसे जंगलमहल, झाड़ग्राम और पुरुलिया में पार्टी की गतिविधियों, कैडरों और अभियानों का संचालन करती थी.
आकाश की स्थिति
आकाश को माओवादी संगठन का फिलहाल एकमात्र सक्रिय जीवित केंद्रीय कमेटी सदस्य और पश्चिम बंगाल का राज्य सचिव बताया जा रहा है। चार दशक से नक्सली संगठन में सक्रिय आकाश पर एक करोड़ का इनाम है। बंगाल और झारखंड पुलिस के खुफिया तंत्र को उसके जंगल छोड़ने की जानकारी मिली है।
मुठभेड़, गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण से कमजोर हुआ दस्ता
जंगलमहल में माओवादी सशस्त्र आंदोलन के करीब ढाई दशक बाद संगठन की पकड़ कमजोर हुई है। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में बंग ब्रिगेड के सदस्यों की मौत, गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण के बीच आकाश ने बंग ब्रिगेड को भंग करने का फैसला लिया। असीम कुछ समय तक ‘मनोज’ नाम से भी संगठन में सक्रिय रहा। 1980 के दशक में कॉलेज जीवन के दौरान वह अतिवामपंथी आंदोलन से जुड़ा था.
एके-47 जंगल में छोड़ी, सामान्य कपड़ों में निकला
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा बलों का दबाव बढ़ने के बीच आकाश ने जंगल में अपनी एके-47 छिपा दी और सामान्य कपड़ों में बाहर निकल गया। बताया जा रहा है कि 13-14 अगस्त को पुरुलिया से सटे दलमा रेंज के जंगल से बाहर निकलने का फैसला किया.
चार सहयोगियों की गिरफ्तारी के बाद बदला ठिकाना
चार अगस्त को दलमा पहाड़ के आसपास झारखंड पुलिस ने आकाश के चार सहयोगियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय आकाश समेत करीब छह लोग वहां से लगभग एक घंटे की दूरी पर दूसरे ठिकाने में मौजूद थे। सहयोगियों की गिरफ्तारी की सूचना मिलने के बाद आकाश अपने दस्ते के साथ वहां से निकल गया। दूसरे स्थान पर पहुंचने के बाद करीब एक सप्ताह तक सुरक्षा स्थिति और संगठन की गतिविधियों की समीक्षा की गई। इसके बाद दस्ते को भंग करने का फैसला लिया गया.
64 साल की उम्र और खराब स्वास्थ्य भी चुनौती
आकाश की उम्र 64 वर्ष है और उसकी सेहत भी पहले जैसी नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, वह उच्च रक्तचाप से परेशान हैं। लगातार जंगल में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने और पुलिस के बढ़ते दबाव के कारण इस उम्र में उसके लिए भूमिगत जीवन मुश्किल होता जा रहा था। जंगल में लंबे समय तक रहने और ठिकाने बदलने की वजह से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी बढ़ी हैं। माना जा रहा है कि संगठनात्मक कमजोरी और व्यक्तिगत स्वास्थ्य, दोनों ने उन्हें बंग ब्रिगेड को भंग करने और जंगल छोड़ने के फैसले की ओर धकेला।


