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राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर मनीष तिवारी ने सरकार को घेरा, पाकिस्तान और चीन को लेकर नीति पर उठाए सवाल

विशेष संवाददाता,नई दिल्लीAshutosh Ray
Fri, 03 Dec 2021 12:39 AM
राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर मनीष तिवारी ने सरकार को घेरा, पाकिस्तान और चीन को लेकर नीति पर उठाए सवाल

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पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने एक बार फिर दोहराया है कि मुंबई हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया और मजबूत होनी चाहिए थी। पर साथ ही उन्होंने मोदी सरकार की पाकिस्तान नीति पर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक से भी पाक के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि ऐसे ऑपरेशन से फायदा होता तो उरी के बाद पुलवामा नहीं होता। इसके साथ उन्होंने चीन के साथ तनाव पर सरकार को घेरा।

मनीष तिवारी ने अपनी किताब '10 फ्लैश पॉइंट्स: 20 ईयर्स' के लॉन्चिंग के मौके पर कहा कि वह यह नहीं कह रहे कि तत्कालीन सरकार ने जो कार्रवाई की थी, वह सही थी या गलत थी। वह मानते हैं कि उस वक्त भारत की प्रतिक्रिया और तेज और मजबूत होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि कई लोग मानते हैं कि मुंबई हमले के बाद भारत ने जो प्रतिक्रिया की, वह सही थी। लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि हम अलग-अलग विचार रख सकते हैं।

सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए तिवारी ने कहा कि यह पहले भी होते रहे हैं, पर उन्हें सार्वजनिक तौर पर स्वीकार नहीं किया जाता था। मोदी सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक को सार्वजनिक किया। पर साथ ही उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इससे पाकिस्तान के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। चीन के साथ रिश्तों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार सच्चाई नहीं बता रही है। संसद के अंदर भी कई बार इस विषय को उठाने की कोशिश की गई, पर सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कोई जवाब नहीं देती। 

उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि चीन कई देशों के साथ अपने सीमा विवाद सुलझा रहा है, पर भारत के साथ उसका रुख अलग और आक्रामक है।मनीष ने अपनी किताब में जनरल वीके सिंह की आयु को लेकर हुए विवाद पर भी राय रखी है। उनका कहना है कि तत्कालीन यूपीए सरकार को जनरल वीके सिंह की आयु को मान लेना चाहिए था और पहले से तय वक्त पर उन्हें रिटायरमेंट देकर इसको सम्मानजनक तरीके से हल किया जा सकता था। 

पर उस वक्त सरकार के अंदर इस मुद्दे पर राय कुछ और थी। मनीष तिवारी की किताब का विमोचन करते हुए पूर्व रक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने 26/11 के बाद यूपीए सरकार की प्रतिक्रिया पर उनकी राय पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि वह कई मुद्दों पर मनीष की राय से सहमत नहीं है, पर यह किताब राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर हमारे सामने मौजूद चुनौती के बारे आगाह करती है।

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