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मणिपुर में मैतेई समुदाय से जुड़े जिस आदेश पर भड़की थी हिंसा, हाई कोर्ट ने एक साल बाद उसे हटाया; जानें क्यों

मणिपुर में हुई जातीय हिंसा के पीछे की बड़ी वजह हाई कोर्ट का एक आदेश था। जिसमें मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति में आरक्षण देने की वकालत की गई थी। अब अदालत ने उस आदेश को ही हटा दिया है।

मणिपुर में मैतेई समुदाय से जुड़े जिस आदेश पर भड़की थी हिंसा, हाई कोर्ट ने एक साल बाद उसे हटाया; जानें क्यों
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,इंफालThu, 22 Feb 2024 05:24 PM
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मणिपुर में एक साल पहले भड़की हिंसा की चिंगारी अभी भी पूरी तरह से शांत नहीं हुई है। हिंसा की घटनाओं के बाद पूर्वी राज्य में 200 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों विस्थापित हो चुके हैं। दरअसल, इस पूरे बवाल के पीछे मणिपुर उच्च न्यायालय का वो आदेश था, जिसे माननीय अदालत ने पिछले साल सुनाया था। आज हाई कोर्ट ने अपने उस आदेश के एक पैराग्राफ को ही हटा दिया है, जिस पर राज्यभर में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़की थी।

27 मार्च 2023 को मणिपुर हाई कोर्ट ने अपने फैसले में से एक पैराग्राफ हटा दिया है जिसमें राज्य सरकार को मैतेई समुदाय के लिए अनुसूचित जनजाति में आरक्षण देने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश के कारण मणिपुर में बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा हुई थी। आदिवासी कुकी समुदाय ने अदालत के निर्देश का विरोध किया था। इस आदेश के खिलाफ अदालत में पुनर्विचार याचिका डाली गई।

याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति गोलमेई गाइफुलशिलु की पीठ ने कहा कि यह फैसला "कानून की गलत धारणा" के तहत पारित किया गया था क्योंकि "याचिकाकर्ता तथ्य और कानून की अपनी गलत धारणा के कारण उक्त रिट याचिका की सुनवाई के समय अदालत की उचित सहायता करने में विफल रहे"। अदालत ने कहा कि यह आदेश महाराष्ट्र राज्य बनाम मिलिंद और अन्य में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत था, जिसमें शीर्ष अदालत ने कहा था कि अदालतें एसटी सूची में संशोधन, संशोधन या परिवर्तन नहीं कर सकती हैं।

हाई कोर्ट ने बुधवार को दिए अपने फैसले में निर्देश दिया, "तदनुसार, पैरा संख्या 17 (iii) में दिए गए निर्देश को हटाने की जरूरत है और उसे हटाने का आदेश दिया जाता है।"

उस पैरा में क्या आदेश था
फैसले में अब हटाए जा चुके पैरा में कहा गया था, "मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने के लिए राज्य लिखित आदेश प्राप्ति की तारीख से चार सप्ताह की अवधि के भीतर शीघ्रता से विचार करेगा।" 

पिछले साल अक्टूबर में, उच्च न्यायालय ने मणिपुर में आदिवासी संगठनों को 27 मार्च के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति दी थी। इसके बाद, ऑल मणिपुर ट्राइबल यूनियन द्वारा एक अपील दायर की गई। इस साल 20 जनवरी को, हाई कोर्ट ने अपने 27 मार्च के आदेश को संशोधित करने की मांग वाली एक समीक्षा याचिका स्वीकार की और केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर उनकी प्रतिक्रिया मांगी थी।

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