साढ़ू से त्रस्त युवक दो बच्चों संग 120 फीट ऊंचे टावर पर चढ़ा, ढाई घंटे चला ड्रामा
मल्लावां (हरदोई) में एक युवक बबलू, अपनी पत्नी के परिवार और पुलिस से परेशान होकर 120 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गया। उसने टावर से पर्चे फेंककर रुपये मांगने और मारपीट के मामले में फंसाने का आरोप लगाया। पुलिस व जिम्मेदार अधिकारियों के आश्वासन पर ढाई घंटे बाद वह बच्चों के साथ नीचे उतरा।

मल्लावां (हरदोई), संवाददाता। साली-साढ़ू और पुलिस से परेशान होकर एक युवक अपने दो मासूम बच्चों के साथ 120 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गया। उसने टावर के ऊपर से पर्चे फेंककर पुलिस पर रुपये मांगने और मारपीट के मामले में उसे फंसाने के आरोप लगाए। सूचना पर मौके पर पहुंचे सीओ के समझाने और कार्रवाई के आश्वासन पर ढाई घंटे बाद वह बच्चों के साथ नीचे उतरा।मल्लावां कस्बे के मोहल्ला भगवंतनगर स्थित ससुराल में बबलू अपनी पत्नी छाया के साथ पिछले तीन सालों से रहता है। छाया ने बताया कि दो दिन पहले उसकी बहन रामा और उसके पति अंकित निवासी पिंडारी सांडी पांच-छह लोगों के साथ आए और पति बबलू के साथ मारपीट कर चले गए।
पति ने पुलिस को तहरीर दी तो दरोगा राधेश्याम सिंह और सिपाही हरेंद्र गिरी ने दोनों पक्षों कोतवाली बुलाकर सुलह का दबाव बनाया। सुलह करने से मना करने पर पति से रुपये की मांग की गई। रुपये नहीं देने पर मारपीट की एकतरफा कार्रवाई कर दी गई। इसी से परेशान होकर शनिवार दोपहर करीब 12 बजे बबलू अपने नौ साल के बेटे वैभव और पांच साल की बेटी गौरी को लेकर कस्बे में लगे मोबाइल टावर पर करीब 120 फीट ऊपर चढ़ गया। ऊपर से उसने दो पर्चे फेंके। इसमें दरोगा पर रुपये मांगने और साली-साढ़ू द्वारा परेशान करने की बात लिखी थी। कुछ ही देर में आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना पर सीओ बिलग्राम मौके पर पहुंचे। उन्होंने बबलू को समझाया और सभी के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस पर करीब ढाई घंटे बाद बबलू बच्चों के साथ नीचे उतरा। इस संबंध में दरोगा राधेश्याम सिंह ने बताया कि बबलू के सभी आरोप निराधार हैं। कोई रुपये नहीं मांगे गए और न ही सुलह का दबाव बनाया गया। आपसी लड़ाई-झगड़े का मामला था। शांतिभंग में दोनों का चालान किया गया है। इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिंह ने बताया कि बबलू और दोनों बच्चों को अस्पताल भेजा गया है। रुपये मांगने का आरोप झूठा है। मारपीट करने वालों की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


