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अधीर का इस्तीफा, नरम पड़े दीदी के तेवर? वायनाड में प्रियंका गांधी के लिए प्रचार कर सकती हैं ममता

वर्ष 2019 में सक्रिय राजनीति में आने के बाद से प्रियंका गांधी वाड्रा के कभी अमेठी, तो कभी रायबरेली और यहां तक की वाराणसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने को लेकर समय-समय पर अटकलें लगाई जाती रहीं हैं।

अधीर का इस्तीफा, नरम पड़े दीदी के तेवर? वायनाड में प्रियंका गांधी के लिए प्रचार कर सकती हैं ममता
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,कोलकाताFri, 21 Jun 2024 09:30 PM
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के लिए प्रचार कर सकती हैं। प्रियंका गांधी अपने भाई राहुल गांधी की सीट वायनाड से चुनावी राजनीति में एंट्री करने जा रही हैं। हालांकि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पुराने गिले-शिकवे भुलाकर ममता बनर्जी खुद प्रियंका गांधी के लिए चुनाव प्रचार में उतर सकती हैं। दरअसल लोकसभा चुनाव 2024 से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस पार्टी के बीच खूब जुबानी जंग हुई थी। INDIA गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद पश्चिम बंगाल ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने से साफ इनकार कर दिया था। 

एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि टीएमसी सुप्रीमो बनर्जी प्रियंका गांधी के लिए प्रचार करने की इच्छुक हैं। इसके अलावा, उन्होंने पिछले दिसंबर में इंडिया गठबंधन की बैठक के दौरान यह भी सुझाव दिया था कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को वाराणसी से पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहिए।

वर्ष 2019 में सक्रिय राजनीति में आने के बाद से प्रियंका गांधी वाड्रा के कभी अमेठी, तो कभी रायबरेली और यहां तक की वाराणसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने को लेकर समय-समय पर अटकलें लगाई जाती रहीं, लेकिन कांग्रेस के उन्हें वायनाड सीट से उपचुनाव में मैदान में उतारने की घोषणा के बाद अब इनपर विराम लग गया है। कांग्रेस ने सोमवार को फैसला किया कि राहुल गांधी रायबरेली के सांसद बने रहेंगे और वायनाड सीट से इस्तीफा देंगे। केरल की वायनाड सीट से राहुल गांधी ने लगातार दो बार जीत दर्ज की। राहुल ने 2019 में वायनाड से पहली बार आसानी से जीत हासिल की थी, जब उन्हें परिवार के गढ़ अमेठी में हार का सामना करना पड़ा था। हाल में संपन्न लोकसभा चुनाव में, राहुल ने फिर से वायनाड से चुनाव लड़ा, लेकिन अमेठी छोड़कर रायबरेली चले गए।

ममता बनर्जी और कांग्रेस के बीच फिर से पनपी दोस्ती के पीछे एक कारण यह भी है कि बंगाल की मुख्यमंत्री के सबसे कड़े आलोचकों में से एक अधीर रंजन चौधरी लगातार पांच जीत के बाद इस चुनाव में बहरामपुर लोकसभा सीट से हार गए हैं। गुरुवार को उन्होंने बंगाल कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया, लेकिन इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि इस्तीफा स्वीकार किया गया है या नहीं।

ममता बनर्जी और गांधी परिवार के बीच घनिष्ठ संबंध रहे हैं, हालांकि अधीर रंजन चौधरी की मुख्यमंत्री पर तीखी और अक्सर व्यक्तिगत टिप्पणियां तृणमूल और कांग्रेस के बीच टकराव का कारण रही हैं। यही नहीं, टीएमसी ने आरोप लगाया था लोकसभा चुनाव में अकेले जाने पीछे का कारण खुद अधीर रंजन चौधरी थे। सूत्रों ने कहा कि "अधीर मुद्दा" अब सुलझ गया है।

सोमवार से शुरू हो रहे संसद सत्र में विपक्ष 2014 के बाद से सबसे मजबूत स्थिति में होगा। सूत्रों ने कहा कि बंगाल की मुख्यमंत्री ने इंडिया गठबंधन के सदस्यों के बीच बेहतर समन्वय की भी मांग की है। विपक्षी गठबंधन ने मिलकर 232 लोकसभा सीटें जीती हैं। इसके संकेत पहले ही मिल चुके हैं, क्योंकि तृणमूल, कांग्रेस और डीएमके तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन का विरोध कर रहे हैं।