अपशिष्ट जल प्रबंधन वाला यूपी का तीसरा शहर बना वाराणसी
जल संरक्षण के क्षेत्र में वाराणसी ने बड़ी पहल की है। अपशिष्ट जल प्रबंधन की कार्ययोजना से यह तीसरा शहर बन जाएगा। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने कार्ययोजना का अनावरण किया, जिसका उद्देश्य शोधित जल के सुरक्षित पुनर्प्रयोग को बढ़ावा देना है। कार्ययोजना में जल का उपयोग ताप विद्युत, रेलवे, उद्यानों और सिंचाई के लिए किया जाएगा।

नई दिल्ली, एजेंसी। जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के वाराणसी ने बड़ी पहल की है। अपशिष्ट जल प्रबंधन और शोधित जल के सुरक्षित पुनर्प्रयोग (रीसाइकिलिंग) की कार्ययोजना की शुरुआत के साथ वाराणसी यूपी का ऐसा तीसरा शहर बन जाएगा। इससे पहले आगरा और प्रयागराज में अपशिष्ट जल प्रबंधन और शोधन की अपनी कार्ययोजनाएं संचालित हो रही हैं। सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित जल संसाधन सचिवों के सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने वाराणसी की शोधित अपशिष्ट जल पुनर्प्रयोग कार्ययोजना (एसआरटीडब्ल्यू) का अनावरण किया। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने एक बयान में जानकारी दी कि यह कार्ययोजना शोधित जल को बेकार मानने के बजाय उसके सुरक्षित पुनर्प्रयोग की दिशा में राष्ट्रीय प्रयास है। इसे ताजे पानी की जगह सुरक्षित रूप से दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाले संसाधन के तौर पर देखा जाए। कार्ययोजना यह भी स्पष्ट करती है कि देश में शोधित अपशिष्ट जल के सुरक्षित प्रयोग पर राष्ट्रीय मसौदा वास्तविक धरातल पर आकार ले रहा है। इस मौके पर जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी और जल संसाधन सचिव वी.एल. कांता राव भी मौजूद रहे。
कहां इस्तेमाल होगा शोधित जल
मिशन के अनुसार, कार्ययोजना में अपशिष्ट जल को शोधित कर पुनर्प्रयोग के लायक बनाया जाएगा। शोधित जल को ताप विद्युत संयंत्रों, रेलवे, शहरी उद्यानों और सिंचाई के इस्तेमाल के लिए भेजा जा सकता है।


