खैर के गिल्टे किस जंगल से काटे, पेड़ों के ‘ठूंठ’ खोलेंगे राज
हल्द्वानी में तराई पूर्वी वन प्रभाग की टीम ने शनिवार को बहेड़ी स्थित गोदाम से भारी मात्रा में खैर की लकड़ी बरामद की है। वन विभाग अब इस मामले की गहन जांच कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेड़ किस वन प्रभाग के जंगलों से काटे गए थे। विभाग चोरी के सटीक स्थान का पता लगाने का प्रयास कर रहा है।
हल्द्वानी। तराई पूर्वी वन प्रभाग की टीम की ओर से शनिवार को बहेड़ी स्थित एक गोदाम से भारी मात्रा में खैर की लकड़ी बरामद की गई। अब सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इन पेड़ों को किस वन प्रभाग के जंगलों से काटा गया। वन विभाग मामले की गहन जांच में जुट गया है। जानकारों के अनुसार, खैर का एक पेड़ तैयार होने में करीब 50 साल का समय लगता है। एक अनुमान के मुताबिक, बहेड़ी से बरामद 380 से अधिक गिल्टे लगभग 35 से ज्यादा वयस्क पेड़ों के हैं। यह तराई के पर्यावरण के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। बहेड़ी में पकड़ी गई खेप को एक ट्रक और तीन पिकअप वाहनों में भरकर गौला रेंज परिसर लाया गया है, जहां लकड़ी को सुरक्षित रखवाकर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी गई है。
कटे पेड़ों से लकड़ी का मिलान शुरू
तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ ने आसपास के सभी संबंधित वन क्षेत्रों के अधिकारियों को बरामद खैर की विस्तृत डिटेल भेज दी है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न रेंज में हाल ही में काटे गए खैर के पेड़ों के ठूंठ से इस बरामद लकड़ी का सटीक मिलान करना है, ताकि चोरी के सटीक स्थान का पता चल सके।
गाजियाबाद-नोएडा की फैक्ट्रियों में सप्लाई
तराई में सक्रिय खैर तस्कर बेखौफ हैं और पूर्व में कई बार वन कर्मियों के साथ उनकी मुठभेड़ भी हो चुकी है। तस्करों का गिरोह रात के अंधेरे में जंगलों से खैर काटकर बाइकों के जरिये उन्हें एक जगह पर इकट्ठा करते हैं। जब पर्याप्त मात्रा में लकड़ी जमा हो जाती है, तो बड़े ट्रक के जरिए गाजियाबाद और नोएडा की पान मसाला व दवा फैक्ट्रियों में सप्लाई कर दिया जाता है। विभाग इस पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने की तैयारी में है।
बरामद की गई खैर की लकड़ी का तराई पूर्वी वन प्रभाग की विभिन्न रेंजों में खैर के पेड़ों के ठूठों से मिलान किया जाएगा। आसपास के सभी डीएफओ को पत्र लिखकर उनके क्षेत्रों में कटे खैर के पेड़ों से भी मिलान करवाया जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि खैर किस जंगल से काटी गई है और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।
डीएफओ का बयान
हिमांशु बागरी, डीएफओ, तराई पूर्वी वन प्रभा


