डार्कनेट और टेलीग्राम से चलने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश, NEET व LLB छात्रों समेत 9 गिरफ्तार
लखनऊ पुलिस ने डार्कनेट-टेलीग्राम से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ कर NEET/LLB छात्रों समेत 9 जालसाजों को गिरफ्तार किया।
लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मड़ियांव पुलिस और डीसीपी उत्तरी की क्राइम ब्रांच ने डार्कनेट और टेलीग्राम के जरिए संचालित होने वाले एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस नेटवर्क के लखनऊ सरगना मोहम्मद शाहरुख समेत नौ जालसाजों को गिरफ्तार किया है। मूल रूप से फर्नीचर कारीगर का काम करने वाला शाहरुख पिछले कई सालों से जानकीपुरम सेक्टर-6 में रहकर यह नेटवर्क चला रहा था। वह टेलीग्राम और डार्कनेट ऐप के गोपनीय फीचर्स का इस्तेमाल करके चीन, कंबोडिया और दुबई में बैठे मुख्य साइबर अपराधियों के सीधे संपर्क में था। इस गिरोह का मुख्य काम देश भर में होने वाली ऑनलाइन ठगी की रकम को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाने के लिए फर्जी या किराए के बैंक खाते (म्यूल अकाउंट्स) मुहैया कराना था। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि शाहरुख के दो साथियों, अब्दुल और आजम ने उसे इन विदेशी आकाओं से जोड़ा था और फिलहाल पुलिस इन दोनों फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है。
गिरोह के काम करने का तरीका
इस पूरे डार्कनेट नेटवर्क को जमीनी स्तर पर चलाने के लिए शाहरुख ने NEET की तैयारी कर रहे छात्रों, विधि (LLB) के छात्रों, जोमैटो व ब्लिंकिट के डिलीवरी बॉयज और कुछ पेंटर्स को महज 3 से 5 फीसदी कमीशन का लालच देकर अपने साथ मिलाया था। ये छात्र और डिलीवरी बॉयज आगे चलकर गरीब मजदूरों, रिक्शा चालकों और ठेले-खोमचे वालों को रुपयों का लालच देते थे और उनके जरूरी दस्तावेज जुटाकर बैंक खाते खुलवाते थे। जब देश भर से साइबर ठगी का शिकार हुए लोगों की रकम इन खातों में ट्रांसफर होती थी, तो शाहरुख उसे अब्दुल और आजम की मदद से क्रिप्टोकरेंसी में बदल देता था और फिर उसे डार्कनेट व टेलीग्राम के जरिए चीन व दुबई में बैठे आकाओं को ट्रांसफर कर दिया जाता था। इस पूरी कवायद के बदले शाहरुख को कुल ठगी की रकम का 25 से 30 फीसदी मोटा कमीशन मिलता था।
पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का विवरण
गिरोह का यह सनसनीखेज खुलासा डीजीपी द्वारा चलाए जा रहे 'ऑपरेशन वज्र' के दौरान हुआ, जब पुलिस नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) और ज्वाइंट मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (JMIS) की मदद से संदिग्ध म्यूल खातों का सत्यापन कर रही थी। जांच के दौरान जैसे ही इस गिरोह का इनपुट मिला, क्राइम और साइबर टीमों ने जाल बिछाकर पहले शाहरुख को केशवनगर मोड़ से दबोचा और फिर उसकी निशानदेही पर अन्य आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों में जानकीपुरम का महफूज खान (जोमैटो डिलीवरी बॉय), कल्याणपुर का सय्यद अब्दुल्ला (LLB छात्र), मड़ियांव का मो. बसर (ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय), बाराबंकी का मो. रुबान (पेंटर) और बहराइच व शाहजहांपुर के रहने वाले छात्र शाबिर (NEET अभ्यर्थी), सिकंदर, फरहान व तुफैल शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से विभिन्न बैंकों के 50 एटीएम व क्रेडिट कार्ड, 3 चेकबुक, 2 पासबुक, एक टैबलेट, एक आईपैड, एक कार और 53,100 रुपये नकद बरामद किए हैं।
पुलिस की सलाह
पुलिस उपायुक्त ने अपील की है कि लोग चंद रुपयों के लालच या किसी के बहकावे में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक या ओटीपी किसी अनजान व्यक्ति को न सौंपें। साथ ही, अपरिचित लोगों के कहने पर क्रिप्टोकरेंसी या किसी भी संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से बचने की सलाह दी गई है। पुलिस ने सचेत किया है कि यदि कोई व्यक्ति जाने-अनजाने में भी किसी साइबर ठगी का शिकार होता है, तो वह बिना समय गंवाए तत्काल 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करे या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराए।


