साइबर ठगी की फर्जी कंपनी का भंडाफोड़
झांसी में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई। बिहार-राजस्थान के गिरोह के 8 ठग गिरफ्तार किए गए हैं, जिन्होंने फर्जी कंपनियां खोलकर लोगों को नौकरी का झांसा देकर बंधक बनाया। पुलिस ने 50 लोगों को मुक्त करवा लिया है और कई दस्तावेज और मोबाइल बरामद किए हैं।

झांसी। साइबर अपराध के विरुद्ध झांसी में बड़ी कार्रवाई हुई। लखनऊ-बनारस में भंडाफोड़ के बाद झांसी में फर्जी कंपनी खोलकर नौकरी का झांसा दे मोटी एंठने और लोगों को बंधक बनाने वाले बिहार-राजस्थान के गिरोह के 8 शातिर साइबर ठगों को पुलिस ने धर-दबोचा। इनके चंगुल से करीब 50 महिला-पुरुषों को मुक्त कराया गय है। इनके पास से बड़ी मात्रा में मोबाइल, फर्जी कंपनियों से जुडे़ दस्तावेज सहित अन्य जरूरी कागजात बरामद किए गए हैं। पूछताछ के बाद सभी को जेल भेज दिया गया है।
कैसे की पकड़
साइबर फ्रॉड से संबंधित विभिन्न पोर्टलों सहित अन्य माध्यमों से पुलिस को शिकायत मिली कि कि फर्जी कंपनियां खोलकर कुछ लोग सुनियोजित एवं संगठित तरीके से भोले-भालों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर मोबाइल फोन कॉल, अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से संपर्क कर उन्हें अपने जाल में फंसाकर बंधकर बना लेते हैं। उनकी स्वतंत्रता का हनन करते हैं। इस पर सहायक पुलिस अधीक्षक झांसी सिमरन सिंह, क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम असमा वकार के नेतृत्व में शनिवार को टीम ने थाना प्रेमनगर के बिजौली चौकी स्थिति एक एमएस मां लक्ष्मी एसोसिएट के कार्यालय राजगढ़ पर जांच की। साइबर थाना, बरुआसागर, बबीना पुलिस ने भी साक्ष्य एकत्र किए। जो जांच में फर्जी पाए गए। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
50 लोगों को बंधक से कराया मुक्त
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि पुलिस टीम द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान रामसिंह मीणा निवासी राजस्थान, लखन मेहता राजस्थान, बब्लू, आलोक कुमार, बिहार, प्रयागराज, मोहित, सुरेन्द्र, नितेश निवासी राजस्थान को पकड़ा है। इनके पास 08 मोबाइल, जामा तलाशी से कुल 8300 रुपए, 06 रजिस्टर, 05 कापी, 06 डायरी, 09 प्रमाण पत्र, एप्लीकेशन फार्म, 09 जिल्द, 01 कैशबुक, 03 इन्क्वाइरी बुक, 20 रुपए के 52 स्टाम्प पेपर व 01 बाइक बरामद, इसके अलावा अतिरिक्त फर्जी कम्पनी/चिटफण्ड कम्पनी से संबंधित 52 फर्जी स्टाम्प पेपर, भी बरामद किए हैं। इस गैंग द्वारा अवैध रूप से बंधक बनाकर रखे गए 50 पुरुष एवं महिलाओं को पुलिस टीम द्वारा सकुशल मुक्त कराया गया।
बंधक बनाकर ऐसे लेते थे काम
एसएसपी के अनुसार आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि वह सुनियोजित तरीके से लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर बुलाते थे। उन्हें धमकाकर बंधक बना लेते थे। इसके बाद व्यक्तियों से फोन कॉल कराकर उनके परिचितों एवं अन्य लोगों को नौकरी का लालच देकर बुलवाया जाता था। एंट्री फार्म के लिए ऐंठते थे रकम : आरोपितों ने बताया कि लोगों को नौकरी का लालच देकर उन्हें एंट्री फार्म के नाम पर 1,100 रुपए ऐंठते थे। नौकरी प्रारम्भ कराने के नाम पर 25,000 रुपए 30,000 रुपए तक वसूलते थे। इसके बाद नेटवर्किंग, मल्टी लेवल मार्केटिंग के नाम पर लोगों से धनराशि की ठगी कर अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया जाता था। यह लोग इस तरह से काफी समय से संगठित रूप से साइबर ठगी एवं अन्य आपराधिक गतिविधियां संचालित कर रहे थे।
वाराणसी-लखनऊ में भी कर चुके थे
पूछताछ में बताया कि उक्त गैंग पहले जनपद वाराणसी एवं लखनऊ में भी इसी प्रकार के फर्जी कार्यालय खोलकर लोगों को नौकरी का झांसा देकर अवैध साइबर क्राइम कर चुके थे। इसके बाद वहां की पुलिस सतर्क हुई। पुलिस द्वारा कार्रवाई करते हुए गैंग से जुड़े अन्य आरोपितों को पकड़कर करीब 02-03 महीने पहले जेल भेजा था। इसके बाद में इन लोगों ने अपना ठिकाना झांसी बनाया। बीते दो-तीन महीनों से किराए पर कार्यालय एवं प्रशिक्षण केन्द्र बनाकर फर्जी नौकरी देने के नाम पर लोगों से ठगी करते थे। उन्हें बंधकर बना लेते थे।


