रेवाड़ी में स्ट्रीटलाइट खरीद में लाखों का घोटाला,सरपंच और ठेकेदारों पर मामला दर्ज
गुरुग्राम,गौरव चौधरी। हरियाणा के रेवाड़ी ज़िले में स्ट्रीटलाइटों की खरीद में हुए लाखों रुपये के घोटाले के मामले में राज्य विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यू

गुरुग्राम,गौरव चौधरी। हरियाणा के रेवाड़ी जिले में स्ट्रीट लाइटों की खरीद में हुए लाखों रुपये की हेराफेरी हुई। राज्य विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की जांच में फर्जी कोटेशन और फर्जी फर्मों के ज़रिए सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का खुलासा हुआ। इस मामले में कई गांवों के तत्कालीन सरपंच, ग्राम सचिवों और निजी सप्लायरों समेत आठ लोगों के खिलाफ गुरुग्राम में आपराधिक मामला दर्ज किया है। एसीबी की दस साल तक चली जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है। जांच के अनुसार गड़बडी का पूरा मामला साल 2010 से 2015 के बीच पंचायतों द्वारा की गई लाइटों की खरीद से जुड़ा है। आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों ने आपस में मिलीभगत करके बाज़ार भाव को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया और 560 से ज़्यादा स्ट्रीटलाइट तथा 12 हाई-मास्ट लाइटों को तय दर से काफी ज़्यादा कीमत पर खरीदा,जिससे सरकारी फंड का दुरुपयोग हुआ। मामले की परतें 2016 में शुरू हुई स्टेट विजिलेंस ब्यूरो की जांच के दौरान खुलनी शुरू हुईं। विजिलेंस के इंजीनियरों द्वारा किए गए तकनीकी ऑडिट से पता चला कि इस खरीद में 11.66 लाख रुपये से भी ज़्यादा का अतिरिक्त भुगतान किया गया था। सप्लायरों को फायदा पहुंचाने के लिए रिकॉर्ड में नामी कंपनियों के फर्जी कोटेशन लगाए गए थे। जब जांच अधिकारियों ने संबंधित दुकानदारों से पूछताछ की तो उन्होंने किसी भी तरह की बोली या कोटेशन जारी करने से साफ़ इनकार कर दिया। वहीं, सेल्स टैक्स विभाग की जांच में भी कई सप्लायर फर्में पूरी तरह से फर्जी पाई गईं, जिनका धरातल पर कोई वजूद ही नहीं था。
तीन ग्राम पंचायतों में ही 4.42 लाख की हुई गड़बड़ी
जांच रिपोर्ट के मुताबिक अकेले रेवाड़ी की तीन ग्राम पंचायतों (घाटल महानियावास, मालपुरा और सुनारिया-असदपुर) ने मिलकर लगभग 10.60 लाख रुपये की लागत से 254 स्ट्रीटलाइटें खरीदी थीं। तकनीकी मूल्यांकन में सामने आया कि इस खरीद में सरकार को सीधे तौर पर 4.42 लाख रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
गड़बड़ी के प्रमुख मामले
घाटल महानियावास की पंचायत ने 26 स्ट्रीटलाइटें चार हजार 800 रुपये प्रति लाइट के हिसाब से 1.25 लाख रुपये में खरीदी गईं, जिसमें 81 हजार 212 रुपये ज़्यादा चुकाए गए। 30 अन्य लाइटों की खरीद में 93 हजार 660 रुपये तथा दो अन्य बिलों में क्रमशः 56 हजार 520 रुपये और 47 हजार 100 रुपये की धांधली पाई गई।
मालपुरा गांव यहां तीन बिलों के ज़रिए 1.80 लाख रुपये में 36 स्ट्रीटलाइटें खरीदी गईं। जांच में बिलों और वास्तविक कीमत के बीच 1.15 लाख रुपये का बड़ा अंतर मिला। सुनारिया-असदपुर गांव में लगभग 2.26 लाख रुपये में 52 लाइटें खरीदी गईं, जिनमें केवल 40 लाइटों वाले एक बिल में ही 47 हजार 780 रुपये का अधिक भुगतान दिखाया गया था।
पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई
विजिलेंस ब्यूरो ने रेवाड़ी के कई अन्य गांवों में हुई खरीदारी का भी रिकॉर्ड खंगाला। हालांकि, कुछ गांवों की जांच में तकनीकी अधिकारियों ने पाया कि भुगतान तय दरों के मुताबिक ही हुआ था और वहां कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ।
फिलहाल, एंटी-करप्शन ब्यूरो ने नामज़द आठ आरोपियों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाज़ी, जाली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल, आपराधिक साज़िश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।


