जंक्शन से तीन तस्करों के चंगुल से छुड़ाए आठ बच्चे
बाल तस्करी -बोचहां, गरहा और साहेबगंज के रहने वाले हैं गिरफ्तार तस्कर -बेंगलुरु मजदूरी कराने

मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। रेल सुरक्षा बल व बचपन बचाओ आंदोलन की संयुक्त कार्रवाई में सोमवार को मुजफ्फरपुर जंक्शन पर बाल तस्करी का बड़ा मामला पकड़ा गया है। आरपीएफ की टीम ने तीन तस्करों को गिरफ्तार कर उनके साथ बेंगलुरु ले जाए जा रहे आठ बच्चों को मुक्त कराया। सुबह करीब 7 बजे आरपीएफ निरीक्षक प्रभारी मनीष कुमार के नेतृत्व में आरपीएफ की टीम मुजफ्फरपुर जंक्शन पर गश्त कर रही थी। इसी दौरान प्लेटफॉर्म संख्या-3 पर खड़ी गाड़ी 15228 मुजफ्फरपुर–यशवंतपुर एक्सप्रेस के जनरल कोच में 8 डरे-सहमे बच्चे दिखाई दिए।
बच्चों की जानकारी
आरपीएफ उपनिरीक्षक अशोक कुमार व रंजीत कुमार की टीम ने जब बच्चों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन्हें मजदूरी कराने के लिए बेंगलुरु ले जाया जा रहा है। बच्चों के साथ मौजूद साहेबगंज के मो. इमरान आलम, अहियापुर के गहरा के राज कुमार सहनी और बोचहां के संतोष कुमार को भी हिरासत में लिया गया।
लालच का खुलासा
आरपीएफ की पूछताछ में तीनों आरोपियों ने बताया कि वे बच्चों को बेंगलुरु के आसपास बंगारपेट, सोनदाद और कटपाड़ी में काम कराने ले जा रहे थे। प्रत्येक बच्चे को 10 से 12 हजार रुपये महीने का लालच दिया गया था। रेस्क्यू किए गए बच्चों की उम्र 14 से 17 साल के बीच है। ये सभी मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर, गरहा और बोचहां थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं।
कानूनी कार्रवाई
आरपीएफ ने प्रारंभिक पूछताछ, तलाशी और जब्ती के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जीआरपी को सौंप दिया। सभी आठ बच्चों को भी आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए जीआरपी मुजफ्फरपुर के हवाले कर दिया गया। जीआरपी ने बच्चों को चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी को सुपुर्द कर दिया है। वहीं, तीनों तस्करों के खिलाफ मानव तस्करी की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। आरपीएफ इंस्पेक्टर मनीष कुमार ने बताया कि ऑपरेशन ‘आहट’ के तहत रेलवे स्टेशनों पर लगातार निगरानी बढ़ाई गई है, ताकि बच्चों की तस्करी पर रोक लगाई जा सके। आठ बच्चे रेस्क्यू किये गये हैं।


