गमगीन माहौल में निकला जरी का जुलूस,अजादारों ने किया मातम
दूसरे मोहर्रम पर हजरत इमाम हुसैन की याद में जरी का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस इमाम हुसैन के कर्बला पहुंचने की याद दिलाता है। जुलूस में मजलिस और मातमी धुनों का आयोजन हुआ, जिसमें अंजुमनों ने नौहाख्वानी की और शांति का संदेश दिया। मौलाना ने लोगों से मेहनत से मदद करने का आग्रह किया।

नौहों की मातमी धुन के साथ दूसरे मोहर्रम में शहीदाने कर्बला हजरत इमाम हुसैन की याद में गुरुवार को जरी का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस मोहर्रम की दो तारीख को इमाम हुसैन के अपने 72 साथियों के साथ कर्बला पहुंचने की याद दिलाता है। जरी के जुलूस में मजलिसे गम है शाहे हुदा की, आज दूसरी है माहे अजा की, धुन बजी तो अजादारों की आंखों में आंसू आ गए। अपने रिवायती अंदाज में बड़ी शान-ओ-शौकत से शाही जरी का जुलूस निकला। आगे-आगे नकारों पर मातमी धुनें फिजा में गुनगुनाती रही थी तो पीछे अजादारों ने अमन शांति का संदेश देते हुए नौहाख्वानी अपनी कदीमी रास्तों से चलते रहे।
गुरुवार की सुबह से ही इमामबाड़ों में मजलिस का दौर चला। किला सब्जी मंडी स्थित इमामबाड़े से तमाम अंजुमनों की अगुवाई में अलम व जरी का जुलूस कोठी नवाब नब्बू से निकाला गया। जो इंग्लिशगंज, बाजार संदल खां, मलूकपुर, जखीरा और कंधी टोला होता हुआ देर रात नवाब नब्बू साहब की कोठी पर संपन्न हुआ। अंजुमनों ने नौहाख्वानी व सीनजनी करते हुए चले। इमामबाड़ों में मजलिस का दौर चला। मीडिया प्रभारी शानू काजमी ने बताया की 2 मुहर्रम को भी मजलिस का खिताब मौलाना हसनैन जोनपुर ने कहा कि मजलिसों में शामिल होने वाले लोग अपने दिलों को साफ रखें और जो सीख हासिल करें उसे अपनी जिंदगी में उतारें। उन्होंने जरूरतमंदों की मदद को भी इबादत बताते हुए कहा कि कर्बला के संदेश को समझकर उस पर अमल करना चाहिए। हजरत इमाम हुसैन की याद में भूखों को खाना खिलाने और प्यासों को पानी पिलाने का भी संदेश दिया। मौलाना ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने इंसानियत और इस्लाम की रक्षा के लिए अपने पूरे परिवार के साथ शहादत पेश की। उनके आदर्शों पर अमल करें। इस दौरान अंजुमन गुलदस्ता-ए-हैदरी बरेली और हुसैनी सेंथल ने नौहाख्वानी की, अजादारों ने मातम और जियारत कर दुआएं मांगीं।


