पूर्व विधायक धर्म सिंह छोकर की जमानत याचिका खारिज
माहिरा होम्स समूह हाउसिंग घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के पूर्व विधायक धर्म सिंह छोकर की जमानत याचिका खारिज कर दी। ईडी ने आरोप लगाया कि 1500 खरीदारों से करीब 616 करोड़ रुपये का दुरुपयोग किया गया। छोकर पिछले एक वर्ष से अधिक समय से जेल में हैं, जबकि परियोजनाओं का निर्माण रुका हुआ है।

माहिरा होम्स समूह हाउसिंग घोटाले का मामला खरीदारों के 616 करोड़ रुपये के दुरुपयोग का है आरोप
गुरुग्राम, कार्यालय संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को माहिरा होम्स समूह हाउसिंग घोटाले के मुख्य आरोपी कांग्रेस के पूर्व विधायक धर्म सिंह छोकर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश में दखल देने से इंकार कर दिया, जिसमें पूर्व विधायक को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के धन शोधन अधिनियम के तहत चल रहे मामले में नियमित जमानत देने से इंकार किया था।
धर्म सिंह छोकर की जमानत याचिका
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी.मोहना की बेंच ने सभी पक्षों को सुना। ईडी ने कहा कि पूर्व विधायक धर्म सिंह छोकर और अन्य आरोपियों ने मिलकर महिरा होम्स समूह के सेक्टर-68 की रिहायशी परियोजना में 1500 फ्लैट खरीदारों से वसूली गई करीब 616 करोड़ रुपये की राशि का दुरुपयोग किया है। इस परियोजना में राशि लगाने की बजाय उस राशि को दूसरी परियोजनाओं में भेजा गया। सुनवाई के दौरान पूर्व विधायक छोकर की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल पिछले एक वर्ष से अधिक समय से जेल में हैं। छोकर मुख्य एफआईआर में नामजद नहीं हैं। कुछ मामलों में उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है। मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है। उन्होंने अदालत को प्रस्ताव दिया कि आरबीआई पंजीकृत एनबीएफसी की मदद से रुकी हुई हाउसिंग परियोजनाओं को पूरा कराया जा सकता है। इससे खरीदारों को राहत मिल सकेगी। ईडी की तरफ से एएसजी अनिल कौशिक ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने कहा कि धर्म सिंह छोकर ने जांच के दौरान सहयोग नहीं किया है। उन्हें 96 बार समन भेजे गए थे। गैर-जमानती वारंट जारी हुए थे। इसके बाद उन्हें भगोड़ा घोषित किया गया था। उन्होंने बताया कि ईडी ने छोकर को दिल्ली के शांगरी-ला होटल से गिरफ्तार किया था। वे ईडी को देखकर भाग रहे थे, जिसमें वह गिर गए थे और उन्हें चोट लगी थी। ईडी ने यह भी कहा कि परियोजनाओं का निर्माण करना प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इसके लिए आरोपियों को अपनी वैध राशि का उपयोग करना होगा क्योंकि खरीदारों का पैसा कथित रूप से पहले ही दूसरी जगह खर्च किया जा चुका है। सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया।
माहिरा होम्स समूह की परियोजनाएँ
बता दें कि माहिरा होम्स समूह ने सेक्टर-63, 68, 95, 103 और 104 में किफायती आवास योजना के तहत लाइसेंस लेकर रिहायशी परियोजना को लांच किया था। करीब साढ़े चार हजार परिवार इन परियोजनाओं में फंसे हुए हैं। सभी परियोजनाओं पर निर्माण बंद है।


