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हिंदी न्यूज़ देशमहाराष्ट्र संकट पर उमा भारती का तंज, कहा- हनुमान चालीसा पाठ ने लगाई 'लंका' में आग

महाराष्ट्र संकट पर उमा भारती का तंज, कहा- हनुमान चालीसा पाठ ने लगाई 'लंका' में आग

उमा भारती ने ट्वीट किया कि महाराष्ट्र की अघाड़ी की सरकार चल नहीं सकती थी। इसका कोई वैचारिक आधार नहीं था। उन्होंने निर्दलीय सांसद नवनीत राणा की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे मजबूत महिला हैं।

महाराष्ट्र संकट पर उमा भारती का तंज, कहा- हनुमान चालीसा पाठ ने लगाई 'लंका' में आग
Nisarg Dixitएजेंसी,भोपालThu, 23 Jun 2022 03:05 PM

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भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने महाराष्ट्र में निर्दलीय सांसद नवनीत राणा की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि श्री हनुमान महिलाओं के सम्मान के रक्षक हैं और राणा के हनुमान चालीसा पाठ ने अंत में लंका में आग लगा ही दी। खास बात है कि अप्रैल में राणा दंपति मुख्यमंत्री आवास के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने की योजना बनाई थी।

भारती ने ट्वीट किया कि महाराष्ट्र की अघाड़ी की सरकार चल नहीं सकती थी। इसका कोई वैचारिक आधार नहीं था। उन्होंने राणा की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे मजबूत महिला हैं। उन्होंने हनुमान चालीसा के कारण हुई गिरफ्तारी के बाद बहुत सारी यातनाएं झेली हैं।

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भारती ने बिना किसी का नाम लेते हुए कहा, 'देवियों से कभी युद्ध नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें पराजय ही मिलती है। दैवीय शक्ति के सामने कोई नहीं टिक सकता। हनुमान जी विश्व की सभी महिलाओं के बड़े भाई हैं वह महिलाओं के सम्मान के रक्षक हैं और हनुमान चालीसा के पाठ ने अंत में लंका में आग लगा ही दी।' उन्होंने दिवंगत बाल ठाकरे का स्मरण करते हुए कहा कि उनकी पार्टी का ऐसा पतन दुखदायी है।

शिवसेना की बैठक में 13 विधायक शामिल हुए
मुंबई में सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपने घर मातोश्री में विधायकों की बैठक बुलाई, जिसमें आदत्यि ठाकरे समेत 13 विधायक शामिल हुए। इस बीच, बागी विधायक एकनाथ शिंदे के साथ गुवाहाटी में उपस्थित विधायक संजय शिरसाट ने ठाकरे को पत्र लिख कर बहुत सारी शिकायतें की हैं। उन्होंने पत्र में लिखा है कि मुख्यमंत्री का सरकारी आवास 'वर्षा' का दरवाजा शिवसेना विधायकों के लिए हमेशा बंद रहा जबकि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायकों के लिए कोई मनाही नहीं थी।

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उन्होंने लिखा कि मंत्रालय में भी ठाकरे से मुलाकात नहीं हो पाती थी क्योंकि वह मंत्रालय आते ही नहीं थे। कांग्रेस और राकांपा के विधायकों का काम हो जाता था जबकि शिवसेना विधायकों का काम नहीं होता था जिससे हमें अपने चुनाव क्षेत्र में काम करने में मुश्किल हो रही थी। शिंदे का दरवाजा हमेशा शिवसैनिकों के लिए खुला रहता था और हम अपनी सारी समस्याएं उन्हें ही बताते थे।

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