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महाराष्ट्र संकटः क्या कदम उठा सकते हैं राज्यपाल? जानकारों ने बताया क्या हैं शक्तियां

महाराष्ट्र में जारी सियासी उठापटक के बीच राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी अब तक शांत हैं। जानकारों के मुताबिक राज्यपाल ऐसे में मंत्रिपरिषद से सलाह कर सकते हैं। उनके पास फ्लोर टेस्ट करवाने का भी अधिकार है।

महाराष्ट्र संकटः क्या कदम उठा सकते हैं राज्यपाल? जानकारों ने बताया क्या हैं शक्तियां
Ankit Ojhaपीटीआई,मुंबईThu, 23 Jun 2022 06:27 PM

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महाराष्ट्र में जारी सियासी संकट के बीच राज्यपाल अब तक शांत हैं। इस स्थिति में राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह पर निर्णय ले सकते हैं कि उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे या नहीं। हालांकि अगर वह चाहें तो अपने विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए फ्लोर टेस्ट या फिर विधानसभा भंग करने का भी फैसला कर सकते हैं। ऐसा तभी होगा जब उन्हें लगेगा कि सरकार के पास बहुमत नहीं है।

शिवसेना के बागी विधायक एकनाथ शिंदे का दावा है कि उनके पास 46 विधायक हैं। उन्होंने विधानसभा के डिप्टी स्पीकर को शिवसेना के 35 विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र भी दिया है। वरिष्ठ वकील और संवैधानिक मामलों के जानकार राकेश द्विवेदी व वरिष्ठ वकील विकास सिंह का कहना है कि अगर राज्यपाल को शक होता है कि सरकार के पास बहुमत नहीं है तो वह अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है। राज्यपाल या तो विधानसभा भंग कर सकते हैं या फिर फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दे सकते हैं।

वहीं दूसरी सीनियर व कीलल अजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि फ्लोर टेस्ट ही मुख्य टेस्ट है जिससे सरकार के बहुमत का पता चल सकता है। महाराष्ट्र के संकट पर बात करते हुए विकास सिंह ने कहा कि इस स्थिति में अभी राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी मंत्रिपरिषद से सलाह कर सकते हैं। उन्होंने कहा, 'अभी यह पार्टी के अंदर का मामला है और राज्यपाल से इसका कोई लेना देना नहीं है।'

सिंह ने कहा, 'यह ऐसा मामला नहीं है कि ठाकरे के पास बहुमत नहीं है। यह मामला है कि नेतृत्व के पास अपनी ही पार्टी में चुनौतियां हैं। जब तक की सरकार के तीनों घटक दल महाविकास अघाड़ी का नया नेता नहीं चुन नहीं लेते, उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बने रहने का अधिकार है। आंतरिक कलह  सरकार के नेतृत्व में परिवर्तन नहीं करता है। राज्यपाल मंत्रि परिषद के नेताओं की सलाह से  बंधे रहेंगे।'

सिंह ने कहा, अगर 36 बागी विधायक राज्यपाल को पत्र लिखकर कहते हैं कि वे सरकार से समर्थन वापस लेना चाहते हैं तब राज्यपाल की भूमिका शुरू हो सकती है। द्विवेदी ने कहा, दो सरकार सदन में महुमत नहीं रखती है उसके प्रति जरूरी नहीं है कि राज्यपाल मंत्रि परिषद के सलाह पर ही चलें। उन्होंने कहा कि राज्यपाल अपनी  इच्छा से अधिकारों का प्रयोग भी कर सकते हैं। ऐसे में राज्यपाल मुख्यमंत्री से संपर्क करके पूछ सकते हैं कि उनके पास बहुमत है या नहीं। अगर राज्यपाल को शक होता है तो वह फ्लोर टेस्ट का भी आदेश दे सकते हैं। 

संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए सिन्हा ने कहा कि राज्यपाल के पास शक्ति है कि वह स्टेकहोल्डर्स को अपनी संख्या साबित करने को कह सकते हैं और फिर स्पीकर से फ्लोर टेस्ट कराने को भी कह सकते हैं। संविधान के आर्टिकल 174 (2) बी में राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का अधिकार दिया गया है। हालांकि राज्यपाल मुख्यमंत्री से बात करने के बाद अपने विवेक पर फैसला कर सकते हैं।
 
द्विवेदी ने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे मान लेते हैं कि उनके पास बहुमत नहीं है तो राज्यपाल या तो विधानसभा भंग कर सकते हैं या फिर विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस को सरकार बनाने का न्योता दे सकते हैं। अगर विपक्ष भी असमर्थ रहता है तो राज्यपाल के पास विधानसभा भंग करने का ही उपाय रह जाता है। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीट हैं। एमवीए सरकार के पास 169 विधायक हैं जिनमें से 56 शिवसेना के हैं। भाजपा के पास 106 विधायक हैं।
 

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