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बाबा सिद्दीकी ने थामा एनसीपी का दामन, कांग्रेस छोड़ पकड़ा अजीत पवार का हाथ; भाजपा को कैसे फायदा?

महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और बॉलीवुड सर्किल में मशहूर बाबा सिद्दीकी ने कांग्रेस छोड़ने के बाद शनिवार को अजीत पवार की एनसीपी ज्वॉइन कर ली। 8 फरवरी को बाबा सिद्दीकी ने कांग्रेस से संबंध खत्म कर लिए थे।

बाबा सिद्दीकी ने थामा एनसीपी का दामन, कांग्रेस छोड़ पकड़ा अजीत पवार का हाथ; भाजपा को कैसे फायदा?
Deepakलाइव हिन्दुस्तान,मुंबईSat, 10 Feb 2024 10:04 PM
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महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और बॉलीवुड सर्किल में मशहूर बाबा सिद्दीकी ने कांग्रेस छोड़ने के बाद शनिवार को अजीत पवार की एनसीपी ज्वॉइन कर ली। इससे पहले आठ फरवरी को बाबा सिद्दीकी ने कांग्रेस से अपने 48 साल पुराने संबंध खत्म कर लिए थे। यह कोई छुपी हुई बात नहीं थी कि बाबा सिद्दीकी एनसीपी के अजीत पवार गुट से जुड़ने वाले हैं। लेकिन शनिवार को आधिकारिक ज्वॉइनिंग से पहले इस बारे में कोई ऐलान नहीं किया गया था। बाबा सिद्दीकी का अजीत पवार से जुड़ने का आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को फायदा मिलेगा। बता दें कि चुनाव आयोग ने अजीत पवार गुट को असली एनसीपी माना है। अजीत पवार ने पिछले साल शरद पवार की एनसीपी को छोड़कर शिंदे गुट की शिवसेना और भाजपा गठबंधन की सरकार में शामिल हो गए थे।

सोशल मीडिया पर लिखी यह बात
एनसीपी ज्वॉइन करने को लेकर बाबा सिद्दीकी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा कि मैंने कांग्रेस पार्टी को एक युवा किशोर के रूप में ज्वॉइन किया था। यह 48 साल की शानदार यात्रा रही। आज मैंने तत्काल प्रभाव से कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आगे लिखा कि बहुत कुछ है कि जो मैं कहना चाहता हूं, लेकिन बहुत सी बातें अनकही ही सही रहती हैं। इस यात्रा के दौरान जो लोग भी साथी रहे, उन सभी को शुक्रिया। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले बाबा सिद्दीकी का पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए दोहरा झटका है। कुछ दिनों पहले ही पूर्व मंत्री मिलिंद देवड़ा ने भी कांग्रेस छोड़ दी थी। देवड़ा ने उद्धव सेना और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे पर बात बिगड़ने के बाद शिंदे गुट को ज्वॉइन कर लिया था। 

रह चुके हैं पूर्व मंत्री
बाबा सिद्दीकी 1999, 2004 और 2009 में लगातार तीन बार विधायक रहे और उन्होंने खाद्य और नागरिक आपूर्ति, श्रम और एफडीए राज्य मंत्री (2004-08) के रूप में भी कार्य किया था। इससे पहले लगातार दो कार्यकालों (1992-1997) के लिए नगरपालिका पार्षद के रूप में भी कार्य किया था। उन्होंने मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस समिति और महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष और वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में भी काम किया है।

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