छह दिन बाद खतरे के निशान से नीचे मंदाकिनी, हर जगह बर्बादी का दिखा मंजर
भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ गया है। इससे राहत मिली। छह दिन तक पानी में डूबे इलाकों में प्रशासन ने सफाई अभियान शुरू कर दिया है। भारी तबाही के बाद, दुकानें और घर बर्बाद हो गए हैं और कई लोगों की गृहस्थी प्रभावित हुई है।

चित्रकूट। भगवान राम की तपोभूमि धर्मनगरी चित्रकूट में छह दिन बाद पतित पावनी मंदाकिनी खतरे के निशान से नीचे उतरी। नदी का पानी एक दिन पहले गुरुवार को बारिश थमने के बाद धीरे-धीरे कम होने लगा था। देर रात करीब 11 बजे लाल निशान से नीचे पानी पहुंचने पर लोगों ने राहत भरी सांस ली। धर्मनगरी में यूपी से लेकर एमपी तक हर जगह गली और सड़कों पर मलबा नजर आ रहा है। मंदाकिनी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे जाने के बाद यूपी-एमपी प्रशासन ने अपने-अपने प्रभावित इलाकों में साफ-सफाई अभियान शुरू कर दिया है। मंदाकिनी की बाढ़ में छह दिन धर्मनगरी का निचला इलाका जलमग्न रहा।
रामघाट में करीब दो सौ दुकानें पूरी तरह डूबी रहीं। बीते 29 अगस्त को लाल निशान से करीब साढ़े आठ मीटर ऊपर पहुंची मंदाकिनी ने सर्वाधिक तबाही मचाई थी। शुक्रवार को मंदानिकी का पानी सीढ़ियों के नीचे पहुंच गया। इसके साथ ही रामघाट, निर्मोही अखाड़ा से लेकर निचले इलाके सीतापुर व तरौंहा की बस्तियों में हुई बर्बादी का नजारा दिख रहा है। रामघाट में दुकानों और मकानों में रखा सामान बाढ़ में बह गया है। सर्वाधिक पर्यटन विकास को क्षति पहुंची है। बिजली के खंभे-तार टूटकर बह गए है। लाइटिंग पूरी तरह बर्बाद हो गई है। कई मठ-मंदिरों के हिस्से जमींदोज हो गए है। मंदाकिनी किनारे बने होटलों के शटर से लेकर खिड़की-दरवाजे टूटकर मंदाकिनी की लहरों में समा गए है। घाट पर भारी-भरकम पीपल का पेड़ टूटकर गिर गया है। जलस्तर नीचे जाने के बाद नगर पालिका की टीमें साफ-सफाई में जुट गई है। जेसीबी से मलबा हटाकर बाहर किया जा रहा है। सड़कों व गलियों में लबालब भरे कीचड़ से लोगों का निकलना मुश्किल हो रहा है। वहीं दूसरी ओर निचले इलाकों में लोगों के जलमग्न मकानों में गृहस्थी बर्बाद हो गई है। कई दिन तक जलभराव होने से अनाज तक सड़ गया है।


