जिले में लंग्स कैंसर के 30 फीसदी मरीज
गाजियाबाद में धूम्रपान और वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों के कैंसर के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 5000 से अधिक कैंसर रोगी इलाज करा रहे हैं, जिनमें से 30 प्रतिशत फेफड़ों के कैंसर से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

धूम्रपान और प्रदूषण से बढ़ रहे फेफड़ा कैंसर रोगी •किसी भी तरह की खांसी को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी
गाजियाबाद, प्रदीप वर्मा। तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण, धूम्रपान और तंबाकू सेवन से जिले में फेफड़ों के कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिले में पांच हजार से ज्यादा कैंसर मरीज निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। इनमें से 30 प्रतिशत मरीज फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे हैं।
कोरोना के कारण की स्थिति
लोगों को फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए हर साल एक अगस्त को विश्व लंग कैंसर दिवस मनाया जाता है। गाजियाबाद जैसे औद्योगिक और घनी आबादी वाले शहर में वायु प्रदूषण लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. ज्ञानेंद्र मित्तल का कहना है कि धूल, धुआं और जहरीले कण लंबे समय तक फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके साथ ही बीड़ी, सिगरेट, हुक्का और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम कारक है। कई मामलों में धूम्रपान नहीं करने वाले लोग भी प्रदूषण और सेकेंड हैंड स्मोक के कारण इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
खांसी पर ध्यान दें
मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी सर्जन डॉ कुंदन का कहना है कि बढ़ता वायु प्रदूषण भी इस बीमारी में योगदान कर रहा है। यदि किसी मरीज को खांसी, सांस की कमी, खूनी स्पुटम, छाती में दर्द और वजन कम होना की समस्या हो रही है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से छाती की स्क्रीनिंग करानी चाहिए। कैंसर की पहचान होने पर सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और अब इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी जैसे उपचार से मरीज को ठीक किया जा सकता है।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं
नेहरूनगर स्थित यशोदा अस्पताल के ओंकालॉजिस्ट डा. ब्रहमजीत सिंह ने बताया कि लक्षणों के आधार पर छाती के एक्स-रे, सीटी स्कैन, बायोप्सी और स्पूटम साइटोलॉजी के माध्यम से कैंसर का पता लगाया जा सकता है और समय से इलाज लेकर मरीज को ठीक किया जा सकता है। इसमें जरूरी है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और धूम्रपान छोड़कर लंग कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।
बचाव
- तंबाकू का सेवन ना करें।
- प्रदूषण से बचाव को मास्क पहनें।
- नियमित व्यायाम करें।
- पौष्टिक आहार का सेवन करें।
- समय-समय पर फेफड़ों की जांच कराएं।
लक्षण
- लगातार खांसी
- खांसी में खून आना
- सांस की कमी
- सीने में दर्द
- आवाज में बदलाव या कर्कशता
- वजन में अनपेक्षित कमी


