जलालगढ़ में पशुओं में लंपी रोग का बढ़ता प्रकोप, पशुपालकों की बढ़ी चिंता
जलालगढ़, एक संवाददाता। जलालगढ़ प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में पशुओं के बीच लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) के फैलने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है।

जलालगढ़, एक संवाददाता। जलालगढ़ प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में पशुओं के बीच लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) के फैलने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। रोग के प्रति पर्याप्त जानकारी नहीं होने के कारण कई पशुपालक इसे सामान्य चेचक समझकर समय पर इलाज नहीं करवा रहे हैं, जिससे पशुओं की स्थिति गंभीर हो रही है और कुछ मामलों में उनकी मौत भी हो रही है। विशेष रूप से नवजात बछड़ों और कमजोर पशुओं पर इस बीमारी का अधिक प्रभाव देखा जा रहा है। पशुपालन विभाग के अनुसार लंपी एक संक्रामक वायरल रोग है, जो संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने तथा मक्खी, मच्छर एवं अन्य कीटों के माध्यम से तेजी से फैलता है। इस बीमारी के कारण पशुओं के शरीर पर गांठें उभर आती हैं, तेज बुखार होता है, भूख कम लगती है और दूध उत्पादन में भी कमी आ जाती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर पशु गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। जलालगढ़ के पशु चिकित्सक डॉ. आदित्य कुमार ने बताया कि प्रखंड के लगभग सभी पंचायतों में इस बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि जिन पशुओं में लंपी रोग के लक्षण दिखाई दें, उनका तत्काल उपचार कराएं और पशु चिकित्सकों से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि बीमारी से प्रभावित पशुओं को अन्य पशुओं से अलग रखें तथा उन्हें साफ-सुथरे और सुरक्षित स्थान पर रखें ताकि संक्रमण का प्रसार रोका जा सके.
उचित देखभाल और उपचार की जररूत:
इस बीमारी की रोकथाम के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय है। पशुपालकों को समय रहते अपने पशुओं का टीकाकरण कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि रोग के लक्षण दिखाई देने पर घबराने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि उचित देखभाल और उपचार से पशुओं को बचाया जा सकता है। इधर, बायफ केंद्र के अधिकारी कौशल कुमार भी गांव-गांव जाकर पशुपालकों को जागरूक कर रहे हैं। वे पशुपालकों को लंपी रोग के लक्षण, बचाव के उपाय और टीकाकरण के महत्व की जानकारी दे रहे हैं। साथ ही पशुपालकों को पशु चिकित्सा केंद्र पहुंचकर विशेषज्ञों से सलाह लेने और समय पर इलाज कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे किसी भी पशु में बुखार, शरीर पर गांठें, आंखों से पानी निकलना या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें। विभाग का कहना है कि सामूहिक जागरूकता, समय पर टीकाकरण और उचित देखभाल से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है.


