अंदर के पेज के लिए:::: स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026: इलेक्ट्रिक वाहनों, कचरा प्रबंधन और बढ़ी हरियाली से सिरमौर बना लखनऊ
लखनऊ को स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया है। विभिन्न प्रयासों जैसे कचरा प्रबंधन, हरियाली बढ़ाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के कारण लखनऊ ने पहला स्थान हासिल किया है। वार्ड संख्या 70 को भी सर्वश्रेष्ठ वार्ड का सम्मान मिला। यह सफलता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नगर निगम की टीम के प्रयासों का परिणाम है।

- स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देश में नंबर एक बना लखनऊ, 15वें से पहले स्थान पर पहुंचा - लखनऊ का वार्ड संख्या 70 पेपर मिल कॉलोनी भी देश का सर्वश्रेष्ठ वार्ड घोषित
- राजधानी लखनऊ को मिले दो बड़े राष्ट्रीय सम्मान
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लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। कचरा प्रबंधन, हरियाली बढ़ाने, सड़कों के डामरीकरण और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने के क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व कार्यों की बदौलत लखनऊ की हवा देश में सबसे साफ दर्ज की गई है। इन्हीं ठोस प्रयासों के आधार पर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में लखनऊ ने देश भर में पहला स्थान हासिल किया। प्रथम स्थान पाकर नगर निगम ने लखनऊ का राष्ट्रीय स्तर पर मान बढ़ाया है।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में सोमवार को आयोजित स्वच्छ वायु दिवस कार्यक्रम में महापौर सुषमा खर्कवाल व नगर आयुक्त गौरव कुमार ने यह राष्ट्रीय पुरस्कार ग्रहण किया। साथ ही नगर निगम के जोन-4 स्थित वार्ड संख्या-70 (पेपर मिल) को 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में देश का सर्वश्रेष्ठ वार्ड चुना गया। शहर के प्रथम स्थान पर आने के लिए 1.50 करोड़ रुपये और वार्ड के प्रथम स्थान आने पर 50 लाख रुपये का पुरस्कार भी मिला।
इन पांच कारणों ने दिलाई सफलता
1100 से अधिक इलेक्ट्रिक गाड़ियों ने निभाई बड़ी भूमिका
नगर निगम ने पिछले वर्षों में वायु प्रदूषण कम करने के लिए कई स्तरों पर काम किया। डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण के लिए करीब 1100 इलेक्ट्रिक वाहनों को सड़क पर उतारा गया। इनके संचालन की निगरानी जीपीएस आधारित कंट्रोल कमांड सेंटर से की जा रही है। शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग ढांचे का भी विस्तार किया गया। करीब 150 इलेक्ट्रिक रोड स्वीपिंग मशीनों से सड़कों की सफाई हो रही है। जिससे धूल उठना बंद हुई।
559 किलोमीटर बनाई सड़कें-फुटपाथ, धूल हुई कम
नगर निगम ने साफ हवा के लिए सड़कों के सुधार की दिशा में बेहतरीन काम किया। निगम के मुख्य अभियन्ता महेश वर्मा ने बताया, 559.85 किलोमीटर सड़कों को पूरी तरह पक्का कर धूल प्रदूषण को कम किया गया। फुटपाथ जहां कच्चे थे, वहां इंटरलाकिंग टाइल्स लगाई गई। इससे शहर के तमाम इलाकों में हवा में उड़ने वाले धूल के कण कम हुए। मशीनों से लगातार पानी का छिड़काव किया गया।
आधुनिक कचरा प्रबंधन बना सफलता की बड़ी वजह
शहर में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे के शत-प्रतिशत वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था ने लखनऊ को नंबर एक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। निगम के अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविन्द राव कहते हैं, राजधानी में लगभग 1800 टन कचरे का रोजाना वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण हो रहा है। ताजा कचरे की डंपिंग बंद कर दी गई है। निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के निस्तारण के लिए अलग व्यवस्था और 300 टीपीडी क्षमता का संयंत्र भी लगाया गया। इससे प्रदूषण नियंत्रण में उल्लेखनीय मदद मिली।
हरियाली और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा
शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने, मियावाकी व वर्टिकल गार्डन विकसित कर भी नगर निगम ने वायु गुणवत्ता प्रतियोगिता में नंबर बढ़ाया। नगर निगम ने शहर में सात नए मियावाकी वन का विकास कराया। इसमें तीन लाख पौधे लगवाए। जगह जगह वर्टिकल गार्डेन का विकास कराया। सड़कों के किनारे हरियाली बढ़ाई। नदी के किनारों पर भी बड़े पैमाने पर पौधरोपण हुआ। इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बढ़ाने और यातायात सुधार के लिए भी व्यापक काम किया गया। वर्तमान में शहर में 140 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं। साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक पर कार्रवाई, नालों की सफाई और नदियों में कचरा जाने से रोकने जैसे कदम भी उठाए गए।
कूड़े के लिए बनाए गए ट्रांसफर स्टेशनों ने भी निभाई भूमिका
निगम ने खुले में पड़ने वाले कचरे के लिए 52 काम्पैक्टर स्टेशन बनवाए। इससे कचरे को प्रोसेसिंग प्लान में ले जाने वाली गाड़ियों की संख्या में कमी आयी। इसकी वजह से कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों की दैनिक संख्या 240 से कम होकर 150 हो गयी। इससे वाहनों की आवाजाही कम हुई। ईधन की खपत और वाहन प्रदूषण कम हुआ। इससे भी वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिली।
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अगस्त में हुआ आख़िरी भौतिक सर्वे
केंद्र की टीम ने नगर निगम के आंकड़ो की पड़ताल की। तीन महीने से प्रतियोगिता चल रही थी। केंद्र की टीम ने फाइनल राउंड में 19 से 21 अगस्त 2026 के बीच लखनऊ शहर में हुए इससे जुड़े कामों का सर्वे किया। जबकि वार्ड के लिए 28 अगस्त को पेपर मिल कॉलोनी वार्ड का सर्वे किया। एक एक चीजें जाकर देखी।
मॉडल वार्ड की सूची में शामिल पेपर मिल कॉलोनी वार्ड को मिला देश में पहला स्थान
राजधानी का पेपर मिल कॉलोनी वार्ड देश में पहले स्थान पर रहा। यहां की वायु गुणवत्ता देश में सबसे स्वच्छ मिली। वार्ड को नगर निगम ने करीब दो वर्ष पहले मॉडल वार्ड में शामिल किया था। इसके लिए वार्ड में भी कूड़ा प्रबंधन, सड़कों के डामरीकरण तथा हरियाली बढ़ाने पर काम हुआ। केंद्र सरकार ने पहली बार वार्ड स्तर की प्रतियोगिता शुरू की। इसमें पहली बार में ही लखनऊ ने बाजी मार ली है। पेपर मिल कॉलोनी वार्ड को 200 में से 200 नंबर मिले हैं।
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पूरे शहर के लिए गर्व की बात
राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान मिलना पूरे शहर के लिए गर्व की बात है। इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व, नगर विकास मंत्री के मार्गदर्शन, नगर निगम की टीम की मेहनत और शहरवासियों के सहयोग को जाता है। कर्मचारियों अधिकारियों की मेहनत भी इसमें शामिल रही है।
- सुषमा खर्कवाल, महापौर, लखनऊ
संयुक्त प्रयास से मिली कामयाबी
बहुत खुशी का मौका है। शहर की वायु गुणवत्ता सुधार के लिए काफी काम किया गया। जिसका नतीजा सामने आया है। सभी के सहयोग व संयुक्त प्रयास व मेहनत से लखनऊ को कामयाबी दिलाई। इसके लिए सभी को बधाई। आगे और अच्छा काम किया जाएगा।
- गौरव कुमार, नगर आयुक्त, लखनऊ
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लखनऊ में वायु गुणवत्ता(एक्यूआई) की स्थिति पिछले पांच वर्षों की, अधिकतम व औसत
वर्ष एक्यूआई अधिकतम एक्यूआई औसत
2021 नवम्बर 392 154
2022 नवम्बर 380 140
2023 नवम्बर 320 से 350 130
2024 नवम्बर दिसम्बर 340 से 365 124
2025 में दिवाली पर 425 147
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एक्यूआई कितने अंक पर कितना अच्छा व खराब
0 से 50 एक्यूआई बहुत अच्छा
51 से 100 एक्यूआई संतोषजनक
101 से 200 तक मध्यम
201 से 300 तक खराब
301 से 400 बहुत खराब
401 से ऊपर गंभीर


