कैमूर में जुलाई में औसत से 166.54 मिमी. कम हुई बारिश
जून माह में धान की रोपनी के लिए 127.20 एमएम की जगह मात्र 42.9 एमएम हुई बारिश जरूरत से कम बारिश होने के कारण कैमूर जिले के असिंचित क्षेत्रों में पिछड़ रही धान की रोपनी

जून माह में धान की रोपनी के लिए 127.20 एमएम की जगह मात्र 42.9 एमएम हुई बारिश जरूरत से कम बारिश होने के कारण कैमूर जिले के असिंचित क्षेत्रों में पिछड़ रही धान की रोपनी ग्राफिक्स 296.30 की जगह 129.76 एमएम जुलाई में हुई वर्षा 1.41 लाख की जगह 95127 हेक्टेयर में हुई है रोपनी भभुआ, हिन्दुस्तान संवाददाता।
धान की रोपनी के लिए जून एवं जुलाई का महीना
वर्ष 2026 कैमूर जिले के किसानों के खरीफ फसल की खेती के लिए अनुकूल नहीं माना जा रहा है। धान की रोपनी के लिए जून एवं जुलाई का महीना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इन दो महीने में अगर मौसम अनुकूल रहता और बारिश अच्छी होती तो किसान धान की रोपनी समय से कर लेते। इस बार वर्ष कैमूर जिले में जून व जुलाई माह में औसत से काफी कम बारिश हुई है, जो किसानों के खरीफ फसल की खेती के लिए अनुकूल नहीं माना जा रहा है।
वर्षा की कमी
जिला सांख्यिकी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पूरे जून माह में 127.20 मिलीमीटर बारिश की जरूरत थी। लेकिन, कैमूर जिले में मात्र 42.9 मिलीमीटर बारिश हुई।। इस आंकडे़ पर गौर करें तो जून माह में कैमूर जिले में 85.11 मिलीमीटर कम वर्षापात हुई है। इसी प्रकार जुलाई माह में 296.30 मिलीमीटर की जगह 129.76 मिलीमीटर ही बारिश हुई है। सांख्यिकी विभाग के रिपोर्ट बताती है कि जुलाई माह में भी कैमूर जिले में 166.54 मिलीमीटर कम बारिश हुई है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, 1.41 लाख हेक्टेयर में धान की रोपनी कराने का लक्ष्य निर्धारित है। अभी तक 95127 हेक्टेयर यानी 67.46 प्रतिशत रोपनी हो सकी है। नहरी क्षेत्र के किसान तो डीजल पंप, मोटर व समरसेबल चलाकर धान की रोपनी कर रहे हैं, लेकिन असिंचित क्षेत्र के किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
किसानों की चिंता
किसानों का कहना है कि अगर एक पखवारे तक बारिश नहीं हुई तो धान की रोपाई का कार्य पिछड़ जाएगा और उपज भी मार खा जाएगी। नावागांव के किसान धीरेन्द्र चौबे व सेमरा के नीरज मिश्रा ने बताया कि कैमूर जिले के किसान खेती पर निर्भर है। अगर फसल मार खा गई तो साल भर का बजट बिगड़ जाएगा। शुक्रवार को कहीं-कहीं बारिश हुई सावन माह में दो दिन खत्म हो गए। शुक्रवार को कहीं भभुआ के मोहनियां-भभुआ पथ में अच्छी बारिश हुई, जबकि भगवानपुर में रिमझिम हुई। अधौरा में बारिश नहीं हुई, पर सुदूर गांवों पिपरा, बड़ाप, बाहादाग, बानोदाग, श्रवणदाग, डुमरावां में वर्षा अच्छी हुई। रामपुर प्रखंड में सामान्य बारिश हुई है। इस माह बरसात की जगह कभी बादल तो कभी धूप दिख रही है। इससे किसानों के माथा पर चिंता की लकीरें दिख रही है।
पौधों का विकास प्रभावित
धूप के कारण नहीं हो रहा पौधों का विकास भभुआ। आसमान में निकल रही तीखी धूप के कारण खेतों में रोपे गए धान के पौधों का विकास नहीं हो रहा है। सपनौतिया गांव के किसान तेज बहादुर दुबे व शिवपुर गांव के किसान लालबाबू चौरसिया ने कहा कि धान का विकास हर दिन थोड़ी-बहुत बारिश होने पर होता है। इन किसानों ने बताया कि हमलोग 15 दिन पहले धान की रोपनी किए है, लेकिन आसमान में निकल रहे तिखी धूप के कारण पौधों का विकास धीमी गति से हो रहा है। अगर मौसम अनुकूल रहता और हर दिन कमोबेश बारिश होती तो धान के पौधों का विकास तेजी से होता।
इन्द्र देव की पूजा
बारिश के लिए इन्द्र देव को मना रहे लोग भभुआ। बारिश के लिए कैमूर जिले के किसान सावन में इन्द्र देव को प्रसन्न करने के लिए जिले के किसान शिवलिंग पर जलाभिषेक व मंदिरों में भजन-कीर्तन कर रहे हैं। किसान संतोष सिंह, राधेश्याम सिंह व अशोक तिवारी ने कहा कि इन्द्र देव मेहरबान हो जाते और जिले में एक बार तेज बारिश हो जाती तो हम किसान धान की रोपाई आसानी से कर लेते। किसानों ने बताया कि इस बार खरीफ फसल की खेती के शुरुआती दौर से ही मौसम अनुकूल नहीं है। कोट कैमूर में बारिश कम हुई है। जिले में 1.41 लाख हेक्टेयर में धान की रोपनी कराने का लक्ष्य कृषि विभाग ने निर्धारित किया है। अभी तक 95127 हेक्टेयर यानी 67.46 प्रतिशत रोपनी हो सकी है। विकास कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी


