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Exit Poll: उत्तर की राजनीति से ही दक्षिण की निकाल ली काट, साउथ में बीजेपी के उभार के क्या मायने

एग्जिट पोल में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान है। दक्षिण भारत में भी NDA को फायदा होता दिख रहा है। एग्जिट पोल की मानें तो राजग इन राज्यों में 51-54 सीटें जीत सकता है।

Exit Poll: उत्तर की राजनीति से ही दक्षिण की निकाल ली काट, साउथ में बीजेपी के उभार के क्या मायने
Niteesh Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSun, 02 Jun 2024 10:30 PM
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लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी के लिए अच्छे संकेत मिले हैं। जिस बीजेपी को कभी उत्तर भारत तक सीमित बताया जाता था अब वो दक्षिण में भी बड़ी सेंधमारी करती नजर आ रही है। ज्यादातर एग्जिट पोल बताते हैं कि साउथ इंडिया में इस बार भाजपा की सीटें बढ़ सकती हैं। यहां के कई लोकसभा क्षेत्रों में अगर बीजेपी को जीत हासिल न हो तब भी उसके वोट परसेंटेज बढ़ते मालूम होते हैं। भगवा दल के लिए यह वाकई बड़ी खुशखबरी है और यह उसके एकछत्र राज का संकेत भी है।

दरअसल, भाजपा पर हिंदुत्व की राजनीति करने का आरोप लगता रहा है। लंबे समय तक यह कहा जाता रहा कि बीजेपी हिंदुत्व की राजनीति के चलते उत्तर भारत में तो जीत जाती है मगर इससे दक्षिण में उसकी दाल नहीं गलने वाली है। हालांकि, इस बार बीजेपी ने उत्तर से ही दक्षिण की काट निकाल ली है। इससे पहले भाजपा खुद को देश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में काफी हद तक स्थापित कर चुकी है। मौजूदा लोकसभा चुनाव में भी एनडीए गठबंधन यहां मजबूत नजर आ रहा है। भाजपा समर्थक इससे काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस समेत दूसरे राजनीतिक दल एग्जिट पोल के नतीजों को खारिज कर रहे हैं और उनका दावा है कि बीजेपी इस बार कमजोर होगी।  

एग्जिट पोल से क्या मिल रहे संकेत
ज्यादातर एग्जिट पोल में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान है। दक्षिण भारत में भी एनडीए को फायदा होता दिख रहा है। एग्जिट पोल की मानें तो राजग इन राज्यों में 51-54 सीटें जीत सकता है। अकेले बीजेपी की बात करें तो उसके खाते में 34-36 सीटें जाती दिख रही हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में दक्षिण भारत के 5 राज्यों (केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक) में भाजपा को 29 सीटें मिली थीं। खास बात यह है कि केरल में इस बार एनडीए का खाता खुलता दिख रहा है। यहां बीजेपी को 1-3 सीटें मिल सकती हैं। तमिलनाडु और पुडुचेरी की 40 लोकसभा सीटों में से एनडीए को 1-3 सीटें मिलने के आसार हैं। 2019 में बीजेपी ने तमिलनाडु में 5 सीटों पर चुनाव लड़ा मगर एक भी सीट नहीं जीत सकी।

कर्नाटक की बात करें तो यहां भाजपा को बड़ा फायदा होता दिख रहा है। ज्यादातर एग्जिट पोल के मुताबिक, राज्य की 28 लोकसभा सीटों में से एनडीए 23-26 सीटें जीत सकती है। अकेले BJP के खाते में 21-24 सीटें जाती दिख रही हैं। 2019 में भाजपा ने 28 में से 25 सीटें जीती थीं। एग्जिट पोल बताते हैं कि NDA को आंध्र प्रदेश में 19-22 सीटें मिल सकती हैं। अकेले बीजेपी यहां पर 4-6 सीटें जीतती नजर आ रही है। पिछली बार तो बीजेपी यहां एक भी सीट नहीं जीत सकी। अब तेलंगाना पर आते हैं। एग्जिट पोल के मुताबिक, बीजेपी इस दक्षिणी राज्य में 7-10 सीटें जीत सकती है। 2019 के लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो BJP ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा, उसे 4 सीटों पर जीत मिली।

साउथ में बीजेपी के उभार के क्या मायने
अगर दक्षिण भारत में भाजपा मजबूत होती है तो कई क्षत्रपों के लिए यह बड़ा खतरा हो सकता है। खास तौर से द्रविड़ पार्टियों के लिए मुश्किले बढ़ती नजर आ रही हैं। डीएमके और एआईएडीएमके को 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए खुद को मजबूत करना होगा। तमिलनाडु में अन्नामलाई के नेतृत्व में बीजेपी का उभार होता दिख रहा है। इससे दक्षिण में अन्नामलाई भाजपा के बड़े चेहरे के तौर पर सामने आ कती हैं। इंडिया गठबंधन के नेता लगातार यह आरोप लगाते रहे कि केंद्र सरकार से उन्हें आर्थिक सहयोग बहुत कम मिलता है। अगर भगवा दल मजबूत होता है तो उनके इस दावे की हवा निकल जाएगी। आंध्र प्रदेश में भी बीजेपी YSRCP को बड़ा झटका देती दिख रही है। मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी को अपनी लोकप्रियता बरकरार रखने के लिए फिर से काम करना होगा। साथ ही राज्य का विशेष श्रेणी का दर्जा देने से इनकार करना भी कोई बड़ा मुद्दा नहीं होगा।