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लोकपाल के नवनियुक्त सदस्यों ने ली शपथ, CBI निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला समारोह में नहीं थे उपस्थित

 lokpal newly elected members take oath

Lokpal newly elected members take Oath: भ्रष्टाचार निरोधी संस्था लोकपाल के नवनियुक्त सभी आठ सदस्यों ने बुधवार को शपथ ली। अधिकारियों ने बताया कि लोकपाल अध्यक्ष न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष ने इन्हें शपथ दिलाई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को देश के पहले लोकपाल के तौर पर न्यायमूर्ति घोष को शपथ दिलाई थी।

विभिन्न उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों- न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले, न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार मोहंती, न्यायमूर्ति अभिलाषा कुमारी के अलावा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाठी ने लोकपाल में न्यायिक सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण किया।

सशस्त्र सीमा बल की पूर्व पहली महिला प्रमुख अर्चना रामसुंदरम, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन, पूर्व आईआरएस अधिकारी महेंद्र सिंह और गुजरात कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी इंद्रजीत प्रसाद गौतम ने लोकपाल के गैर न्यायिक सदस्य के रूप में शपथ ली। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस शपथग्रहण के साथ ही अब कहा जा सकता है कि लोकपाल ने अब काम करना शुरू कर दिया है।

भारत के पहले लोकपाल के तौर पर जस्टिस पिनाकी घोष ने ली शपथ

नियमों के अनुसार, लोकपाल समिति में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्यों का प्रावधान है। इनमें से चार न्यायिक सदस्य होने चाहिए। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह और छत्तीसगढ़ सरकार के वरिष्ठ मंत्री टीएस सिंह देव उपस्थित थे।

सीबीआई के निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला इस समारोह में उपस्थित नहीं थे। खुफिया ब्यूरो के प्रमुख राजीव जैन, केंद्रीय सतर्कता आयोग के आयुक्त के वी चौधरी, केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एल नरसिम्हा रेड्डी इस शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय चयन समिति ने लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियों की सिफारिश की थी। इसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नियुक्तियों को मंजूरी दी थी। न्यायमूर्ति घोष (66) मई 2017 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त हुए थे। जब लोकपाल अध्यक्ष के पद के लिए उनके नाम की घोषणा हुई तो वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य थे।

कुछ श्रेणियों के लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्ति संबंधी लोकपाल कानून 2013 में पारित हुआ था। नियमों के अनुसार, लोकपाल समिति में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्यों का प्रावधान है। इनमें से चार न्यायिक सदस्य होने चाहिए। लोकपाल के सदस्यों में 50 प्रतिशत अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक सदस्य और महिलाएं होनी चाहिए। 

 

देश के पहले लोकपाल नियुक्त: PM-Ex PM भी जांच के दायरे में आएंगे

लोकपाल को प्रधानमंत्री की जांच करने का भी अधिकार
लोकपाल को प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री की जांच करने का अधिकार होगा। इसके अलावा उसे सभी केंद्रीय मंत्रियों, दोनों सदनों के सदस्यों, ग्रुप ए बी सी और डी के अधिकारियों की भी जांच का अधिकार होगा। वहीं ऐसे ट्रस्ट, सोसायटियां और एनजीओ जो सरकार से आर्थिक मदद लेते हैं, उनके निदेशक और सचिव भी उसकी जांच के दायरे में आएंगे। न्यायपालिका और सेनाएं इसकी जांच के दायरे में नहीं होंगी। प्रधानमंत्री के खिलाफ वही मामले आ सकेंगे जो अंतरराष्ट्रीय, आंतरिक, बाहरी सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, अंतरिक्ष और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हुए नहीं होंगे। प्रधानमंत्री के खिलाफ जांच के लिए लोकपाल की पूर्ण बेंच अध्यक्ष की अगुवाई में बैठगी और दो तिहाई के बहुमत से फैसला करने पर ही प्रधानमंत्री के खिलाफ जांच होगी। यह कार्रवाई गोपनीय होगी और अगर शिकायत जांच लायक नहीं पाई जाएगी तो उसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

शिकायत कैसे होगी
- कोई भी व्यक्ति जनसेवकों के भ्रष्टाचार की बाबत लोकपाल से शिकायत कर सकेगा। शिकायत किस प्रकार से की जाएगी, यह लोकपाल तय करेगा और इसकी जानकारी दी जाएगी।
- भ्रष्टाचार के मामले में लोकपाल खुद भी संज्ञान लेने में सक्षम होगा।.

आरंभिक जांच के लिए तंत्र
- लोकपाल के पास शिकायतों की आरंभिक जांच के लिए एक तंत्र होगा। .
- लोकपाल के जांच अधिकारी संबंधित अधिकारी का पक्ष जान सकते हैं।.
- लेकिन जिस मामले में लगेगा कि तुरंत छापेमारी करनी है, या भ्रष्ट जनसेवक से संपत्ति या दस्तावेज जब्त करने हैं, उसमें सीधे कार्रवाई की जाएगी।

शिकायत सही पाई तो जांच होगी
- यदि शिकायत में दम हुआ तो उसे आगे जांच के लिए भेजा जाएगा। अन्यथा उसे निरस्त कर दिया जाएगा।
- जांच के लिए शिकायत या तो सीबीआई को सौंपी जाएगी या फिर सीवीसी को। ग्रुप सी और डी के मामले में शिकायतें सीवीसी देखेगा। बाकी मामले सीबीआई को जाएंगे।

सीबीआई की लोकपाल विंग
- सीबीआई में अलग से एक लोकपाल शाखा बनेगी जो लोकपाल द्वारा भेजे गए मामलों की जांच करेगी।.
- लोकपाल विंग की निगरानी लोकपाल करेगा। इससे जुड़े अधिकारियों के तबादले आदि भी लोकपाल की अनुमति के बगैर नहीं होंगे।
- लोकपाल विंग केस की प्रगति के बारे में लोकपाल को रिपोर्ट करेंगे।.\

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  • Web Title:Lokpal newly elected members take Oath Of Office CBI director Rishi Kumar Shukla was not present at the ceremony