DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

Lok sabha results 2019: बीजेपी की जिन विधानसभा चुनावों में हुई हार जानें वहां लोकसभा चुनावों का सियासी हाल

lok sabha election result 2019

2019 के लोकसभा चुनावों के सियासी दंगल का आज निर्णायक दिन है। भारतीय जनता पार्टी की कोशिश जहां शानदार प्रदर्शन के साथ दोबारा सत्ता पाने की होगी, वहीं कांग्रेस या फिर विपक्षी पार्टियां 2014 में मिली हार को भुनाने की कोशिश में लगी होगी। 2014 के बाद 2019 का लोकसभा चुनाव न सिर्फ बीजेपी के लिए अहम है, बल्कि चुनौती भी है। 2014 के बाद हुए कई विधानसभा चुनावों में बीजेपी को कई राज्यों में हार का सामना करना पड़ा। ऐसे कई राज्य थे, जहां बीजेपी की सरकार थी, मगर 2019 आते-आते इन राज्यों से बीजेपी के हाथ से सत्ता निकल गई। यही वजह है कि बीजेपी की अधिक कोशिश उन राज्यों में बेहतर प्रदर्शन करने की होगी, जहां कांग्रेस पार्टी ने उन्हें हराया है। बीजेपी इस लोकसभा चुनाव से जहां विधानसभा चुनावों में मिली हार का बदला लेने की कोशिश में होगी। वहीं कांग्रेस यह उम्मीद कर रही होगी कि विधानसभा चुनाव में मिली जीत का सिलसिला लोकसभा चुनाव में भी जारी रखा जाए। मगर दोनों ही पार्टियों के लिए यह किसी चुनौती से कम नहीं है। 2014 में राजनीतिक हालात कुछ और थे और उसके बाद सियासी समीकरण भी बदलते चले गए। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव 2019 में इन राज्यों के नतीजों पर सबसे ज्यादा नजरें होंगी, जहां बीजेपी को विधानसभा चुनावों में हार मिली थी। तो चलिए जानते हैं उन राज्यों, वहां के सियासी समीकरणों को...

मध्य प्रदेश लोकसभा चुनाव: आज आएंगे नतीजे, देख पाएंगे मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों का सियासी हाल


1. बिहार: बिहार की 40 लोकसभा सीटों पर बीजेपी और जदयू इस बार मिलकर चुनाव लड़ रही है। बिहार में एक ओर एनडीए थी और दूसरी ओर महागठबंधन। बिहार के नतीजों पर सबकी नजर इसलिए भी है क्योंकि 2014 में बीजेपी और जदयू अलग-अलग चुनाव लड़ी थी। मगर इस बार जदयू और बीजेपी साथ मिलकर चुनाव लड़े। बिहार में भले ही अभी जदयू के साथ मिलकर बीजेपी सरकार में हो, मगर 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। बिहार की 40 लोकसभा सीटों पर बीजेपी और जदयू ने 17-17 उम्मीदवार उतारे, वहीं इनकी सयहोगी लोजपा ने 6 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। इस बार बिहार में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, रविशंकर प्रसाद, अश्विनी कुमार चौबे, शत्रुघ्न सिन्हा, मीसा भारती, कन्हैया कुमार समेत कई दिग्गज नेता चुनावी मैदान में हैं, जिनके भाग्य का आज फैसला होना है। बिहार में चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक शुरुआती रुझान में 14 सीटों पर बीजेपी, जनता दल 15 सीटों पर और आरजेडी 1 सीट पर आगे चल रही  है।

2019 Lok sabha Election Results: नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी समेत 8 हजार उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला आज

बिहार विधानसभा चुनाव 2015 के नतीजे: 2014 में भले ही बीजेपी को बिहार में अप्रत्याशित सीटें मिली है और देश में सरकार बनी, मगर बीजेपी को सबसे पहला झटका बिहार के विधानसभा चुनाव में ही लगा था। 2015 के विधानसभा चुनाव में बिहार में राजद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। बिहार विधानसभा चुनाव में राजद ने 101 सीटों पर चुनाव लड़कर 80 सीटें अपने नाम की थी। वहीं जेडीयू को 71 सीटें मिलीं थीं। तब भाजपा को 53 और लोजपा एवं रालोसपा को क्रमश: दो-दो सीटें मिलीं थीं। बता दें कि उस चुनाव में जेडीयू, राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद) तथा कांग्रेस का महागठबंधन था और इस महागठबंधन ने बीजेपी को बिहार में सबसे बड़ा और पहला झटका दिया था।

2014 के नतीजे: बिहार में लोकसभा चुनाव 2014 में एनडीए से जदयू ने नाता तोड़ लिया था और सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 23 सीटें हासिल हुई थी। वहीं राजद को महज 4 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था। नीतीश कुमार की पार्टी जदयू जो एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ी थी, वह 2 सीटें ही हासिल कर पाई थी। इस चुनाव में कांग्रेस दो सीट जीत पाई थी और लोजपा 6 सीट। इस बार भी बीजेपी को ज्यादा सीटों की उम्मीद होगी। 

2.कर्नाटक: कर्नाटक में लोकसभा की 28 सीटें हैं और इस राज्य के नतीजे पर बीजेपी का ध्यान सबसे ज्यादा इसलिए होगा क्योंकि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हार मिली थी और राज्य की सत्ता से हाथ धोना पड़ा था। कर्नाटक में पिछली बार भाजपा का प्रदर्शन बेहतर था। यही वजह है कि भाजपा इस बार भी यहां ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतकर विधानसभा चुनाव में मिली हार का बदला लेने की सोच रही होगी। कर्नाटक की 28 सीटों पर बीजेपी ने अपने उम्मीदवार उतारे थे। कांग्रेस ने जहां 20 सीटों पर चुनाव लड़ा वहीं, जेडीएस ने 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। कर्नाटक में जेडीएस प्रमुख एचडी देवगौड़ा ने अपने पोते प्रज्जवल रेवन्ना ने भी चुनाव लड़ा। 
कर्नाटक में चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक शुरुआती रुझान में 23 सीटों पर बीजेपी, और कांग्रेस 3 सीट पर आगे चल रही है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 के नतीजे: कर्नाटक चुनाव के नतीजों में त्रिशंकु विधानसभा ने पेंच फंसा दिया था। मगर अंत में जाकर बीजेपी को यह राज्य गंवानी पड़ी थी। कांग्रेस ने ऐसा चुनावी दांव चला कि येदियुरप्पा को कुर्सी से हटना पड़ा और वहां कांग्रेस-जेडीएस की सरकार बन गई। भाजपा 104 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी लेकिन वह बहुमत के आंकड़े से 8 सीट पीछे रह गई। कांग्रेस को 78 सीटों पर जीत मिली, वहीं जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) 37 सीटें जीतने में सफल रही। वहीं जेडीएस की सहयोगी पार्टी बीएसपी को एक सीट मिली है। भाजपा जैसे ही बहुमत के आकड़े से दूर हुई, कांग्रेस ने 78 सीटों के बावजूद फुर्ती दिखाते हुए 37 सीटों वाले जेडीएस को समर्थन देने का दांव चल दिया। इसके बाद जेडीएस ने भी समर्थन और एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने की पेशकश मंजूर कर ली। इस तरह से वहां भी अमित शाह की रणनीति फेल हो गई।

कर्नाटक में 2014 के नतीजे: कर्नाटक में 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 28 में से 17 सीटों पर जीत का परचम लहराया था। कांग्रेस के खाते में 9 सीटें गई थीं। वहीं जेडीएस ने 2 सीटों पर जीत हासिल की थी। आम आदमी पार्टी ने भी सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे, मगर एक भी सफलता हाथ नहीं लगी थी। यही हालत बसपा की भी थी। बता दें कि पिछले आम चुनाव में जेडीएस और कांग्रेस ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। 

3.राजस्थान: राजस्थान विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रदर्शन पर सबकी निगाहें होंगी। इस राज्य में बीजेपी के लिए प्रदर्शन करना इसलिए भी ज्यादा जरूरी है, क्योंकि यह वह राज्य है जहां भाजपा ने 2014 के चुनाव में सभी सीटें जीती थी। 25 लोकसभा सीट वाले राज्य राजस्थान में अभी कांग्रेस की सरकार है और बीजेपी यहां 2014 का प्रदर्शन दोहरा कर विधानसभा चुनाव में मिली हार का हिसाब बराबर करना चाहेगी। आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में राजस्थान में राज्यवर्धन सिंह राठौड़, कृष्णा पूनिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह, पूर्व जयपुर राजघराने की सदस्य दीया कुमारी तथा केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह और पी पी चौधरी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी किस्मत को आजमाया है। राजस्थान में चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक शुरुआती रुझान में 24 सीटों पर बीजेपी आगे चल रही है।

राजस्थान विधानसभा 2018 के नतीजे: राजस्थान विधानसभा चुनाव में कर्जमाफी के मुद्दे पर कांग्रेस ने बीजेपी के वसुंधरा राजे सरकार को सत्ता से हटाया था। विधानसभा चुनाव में राजस्थान में कांग्रेस ने 99 सीटें जीती थीं। बीजेपी ने 73 सीट पर जीत हासिल करने में कामयाब रही थी। बसपा ने 6 और आरएलडी ने 1 सीटें जीती थीं। बसपा एवं सहयोगियों की मदद से कांग्रेस राज्य में सरकार बनाने में कामयाब रही थी। 

राजस्थान में 2014 के नतीजे: 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य की सभी 25 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। उस वक्त राज्य में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार थी। कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिल पाई थी। 

4. मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश में बीजेपी के बेहतर नतीजे न सिर्फ केंद्र के लिहाज से अच्छे होंगे, बल्कि राज्य की सत्ता हासिल करने का भी एक मौका होगा। मध्य प्रदेश की 29 सीटों पर लोकसभा चुनाव 2019 में मतदान हुए और सबकी नजरें इस बात पर है कि आज यहां से बीजेपी कितनी सीटें निकाल पाती है। बीजेपी ने 2014 में यहां शानदार प्रदर्शन किया था। मध्य प्रदेश के नतीजों पर इसलिए भी सबकी नजरें होंगी क्योंकि यहां भोपाल की सीट पर एक ओर जहां मालेगांव ब्लास्ट की मुख्य आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर हैं, तो उनके सामने कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह है। यहां इन दोनों में जबरदस्त टक्कर देखने को मिल सकती है। इसके अलावा मध्य प्रदेश में सीएम कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ का भी सियासी कररियर दांव पर लगा है। मध्य प्रदेश के सुबह 10 बजे तक के शुरुआती रुझान में बीजेपी आगे दिखाई दे रही है। कांग्रेस पिछड़ रही है।  मध्य प्रदेश में चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक शुरुआती रुझान में बीजेपी आगे दिखाई दे रही है। कांग्रेस पिछड़ रही है। शुरुआती रुझान में 28 सीटों पर बीजेपी और 1 सीट पर कांग्रेस आगे चल रही है।

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के नतीजे: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए अच्छा नहीं रहा। कांग्रेस ने इस चुनाव में अपना वनवास खत्म किया और 15 साल से सूबे की सत्ता पर काबिज शिवराज सरकार को सत्ता से हटाया।  इस चुनाव में बीजेपी 109 सीटें जीत पाई थी, वहीं कांग्रेस 114 सीट जीतने में कामयाब रही थी। बसपा को 2 और सपा को एक सीट हाथ लगी थी। बसपा और सपा के सहयोग से कांग्रस ने बहुमत का आंकड़ा पार किया और सरकार बनाने में सफल रही। 

मध्य प्रदेश में 2014 के नतीजे: 2014 के लोकसभा चुनाव में राज्य में दस साल तक बीजेपी की सरकार होने के बाद भी 2014 लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर था। मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से भारतीय जनता पार्टी ने 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस महज दो सीटें ही निकाल पाने में कामयाब हो पाई थी। मगर इस बार राज्य में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार है। यहां बीजेपी के सामने 27 सीटों को बचाने की सबसे बड़ी चुनौती होगी। 

5. छत्तीसगढ़: लोकसभा चुनाव 2019 में छत्तीसगढ़ के परिणाम भी काफी मायने रखते हैं। भारतीय जनता पार्टी के लिए छत्तीसगढ़ में अपने प्रदर्शन को बरकरार रखने की चुनौती है। बीजेपी उम्मीद कर रही होगी कि सभी सीटों पर जीत हासिल कर और कांग्रेस का सुपड़ा साफ कर विधानसभा चुनाव में मिली हार का हिसाब बराबर करना चाहेगी। दरअसल, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस से बीजेपी को कड़ी टक्कर मिली है। राज्य में अब कांग्रेस की सरकार है, जिसका फायदा हो सकता है कि कांग्रेस को मिले। इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सियासी राह आसान नहीं दिख रही। बीजेपी ने इस बार 10 में से अपने 9 मौजूदा सांसदों के भी टिकट काट दिए और उनकी जगह नए उम्मीदवारों पर भरोसा जताया। एक तरफ जहां बीजेपी अपना प्रदर्शन बरकरार रखने की स्थिति में दिख रही है, वहीं छत्तीसगढ़ में मजबूत सरकार के दम पर कांग्रेस ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की उम्मीद में है।  छत्तीसगढ़ की सभी 11 सीटों के रुझान मिलने शुरू हो गए हैं। यहां अब तक बीजेपी को कड़ी टक्कर दे रही कांग्रेस पीछे हो गई है। छत्तीसगढ़ में चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक शुरुआती रुझान में 8 सीटों पर बीजेपी और 3 सीट पर कांग्रेस आगे चल रही है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 नतीजे: छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने बीजेपी को बड़ी हार दी थी। इस चुनाव में बीजेपी महज 15 सीटों पर सिमट गई थी। वहीं 68 सीटें जीतकर कांग्रेस ने सरकार बना ली। यहां बसपा को दो और अजित जोगी की पार्टी को 5 सीटें आई थीं। 

छत्तीसगढ़ में 2014 के नतीजे: 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां की कुल 11 में 10 सीटें जीतने में सफलता हासिल की थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सिर्फ दुर्ग लोकसभा सीट ही जीतने में सफल हुई थी। यह सीट कांग्रेस नेता ताम्रध्वज साहू ने जीती थी। बता दें कि छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में रमन सिंह सरकार को हार का मुंह देखना पड़ा था।


6. पंजाब: पंजाब की 13 सीटों में से ज्यादातर में कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला नजर आया। पंजाब में इस बार कांग्रेस के भीतर ही चंडीगढ़ सीट को लेकर गहमागहमी नजर आई। पंजाब में इस बार कई सियासी दिग्गजों का सियासी करियर दांव पर है। सनी देओल, पवन कुमार बंसल, किरण खेर आदि उम्मीदवारों की किस्मत का आज फैसला होना है। बता दें कि पंजाब में अभी कांग्रेस की सरकार है और बीजेपी इसमें बेहतर प्रदर्शन कर विधानसभा चुनाव में मिली हार का बदला लेना चाहेगी। पंजाब में चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक शुरुआती रुझान में 2 सीटों पर बीजेपी, और कांग्रेस 8 सीट पर आगे चल रही है।

पंजाब विधानसभा चुनाव 2017: पंजाब में कांग्रेस पार्टी ने अकाली दल-बीजेपी गठबंधन को हराकर सत्ता पर कब्जा किया था। 117 सीटों वाले राज्य में कांग्रेस को अकाली दल-भाजपा गठबंधन सिर्फ 17 सीटों पर ही जीत दर्ज पाया। कांग्रेस पार्टी ने 70 सीटें जीती थी। आम आदमी पार्टी को 23 सीटें हाथ लगी थी। 

पंजाब में 2014 के नतीजे: 2014 के लोकसभा चुनाव में भी पंजाब में अकाली 10 और भाजपा 3 सीटों पर चुनाव लड़ी थी राज्य में 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में शिअद ने 4, आम आदमी पार्टी ने 4, कांग्रेस ने 3 और भाजपा ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की थी। लेकिन बाद गुरुदासपुर लोकसभा सीट पर विनोद खन्ना के निधन के चलते हुए उपचुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी। इस तरह से मौजूदा समय में भाजपा के पास एक ही सांसद है।
 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:lok sabha results 2019: Know what will happen in Loksabha elections where BJP defeat in assembly elections