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Lok Sabha Elections Result: जानें क्या है पहली बार चुनावी मैदान में उतरे उम्मीदवारों का हाल? 

सबसे बड़े सियासी दंगल का आज निर्णायक दिन है और आज शाम तक फैसला हो जाएगा कि महीनों से चले आ रहे इस चुनावी रण में कौन कितना वोटरों को लुभाने में कामयाब हो पाया है। लोकसभा चुनाव 2019 के वोटों की गिनती हो रही है और ईवीएम में उन उम्मीदवारों का भी भाग्य कैद है, जो इस चुनाव में पहली बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इस चुनाव में कई ऐसे महत्वपूर्ण चेहरों के नसीब का फैसला होने वाला है जो बीते कुछ समय में मीडिया की सुर्खियों में रहे हैं। आपको बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव इस बार सात चरणों में संपन्न हुए हैं। 542 सीटों पर हुई वोटों की गिनती आज जारी है। लोकसभा चुनाव 2019 में भारतीय जनता पार्टी 435 सीटों पर लड़ी है और जबकि बाकी सीटों पर उसके सहयोगी पार्टियां चुनावी मैदान में हैं। वहीं, इस बार कांग्रेस कुल 420 सीटों पर चुनाव लड़ा है। कांग्रेस की यह संख्या पिछले चुनाव से कम है। बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए में इस बार 21 पार्टियां शामिल हैं। वहीं कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए में इस बार 25 पार्टियां शामिल हैं। तो चलिए नजर डालते हैं सबसे बड़े सियासी दंगल में पहली बार किस्मत आजमाने वाले इन नेताओं के रुझानों पर...

कन्हैया कुमार: जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार तब सुर्खियों में आए थे जब उन पर विश्वविद्यालय मंज कथित देशद्रोही के नारे लगाने का आरोप लगा था। वह एक बार फिर से सुर्खियों में है और इस बार वजह है कि वह सीपीआई की टिकट पर बिहार की बेगूसराय सीट से उम्मीदवार हैं। कन्हैया कुमार पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। कन्हैया कुमार की उम्मीदवारी इसलिए भी चर्चा का विषय बनी है, क्योंकि इनके सामने बीजेपी के फायरब्रांड नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह चुनावी मैदान में हैं। कन्हैया कुमार की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह बीते कुछ सालों में बीजेपी सरकार के खिलाफ सबसे मुखर आवाज बनकर उभरे। कन्हैया कुमार मूलरूप से बेगूसराय से ही आते हैं। बेगूसराय को लेफ्ट का गढ़ कहा जाता है। 2019 लोकसभा चुनाव में कन्हैया कुमार का मुकाबला बीजेपी के गिरिराज सिंह और राजद के तनवीर हसन से है। इस सीट पर पिछली बार बीजेपी के भोला सिंह ने तनवीर हसन को हराकर जीत हासिल की थी। बता दें कि कन्हैया कुमार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पीएडी कर चुके हैं और अभी वे जेएनयू देशद्रोह मामल में आरोपी हैं। 

संबित पात्रा: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सबसे मुख्य प्रवक्ताओं में शुमार संबित पात्रा पहली बार लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। भाजपा ने उन्हें ओडिशा की पुरी सीट से उम्मीदवार बनाया। संबित पात्रा पेशे से तो डॉक्टर हैं, लेकिन उनकी पहचान एक कुशल वक्ता के रूप में बन चुकी हैं। टीवी चैनलों पर होने वाले प्रमुख बहसों में अक्सर उन्हें देखा जाता है। ओडिशा मे जन्में संबित पात्रा के लिए पुरी की सीट पर चुनौती आसान नहीं है क्योंकि उनका मुकाबला बीजू जनता दल के प्रत्याशी और तीन बार से सांसद पिनाकी मिश्रा से है। संबित पात्रा चुनाव प्रचार में अलग-अलग कारणों से खासे चर्चा में रहे थे। अब देखना होगा कि इस सीट पर कौन बाजी मारता है। ओडिशा की पुरी लोकसभा सीट पर 2014 में हुए चुनाव में बीजेडी के पिनाकी मिश्रा ने जीत हासिल की थी। उन्हें 5,23,161 वोट मिले थे और 2,59,800 वोट पाकर दूसरे पायदान पर कांग्रेस के सुचरिता मोहंती रहे थे।

तेजस्वी सूर्या: 28 साल के तेजस्वी सूर्या उस वक्त चर्चा में आए थे, जब भारतीय जनता पार्टी ने साउथ बेंगलुरू से उन्हें टिकट दिया। दक्षिण बेंगलुरू लोकसभा की प्रतिष्ठित सीट मानी जाती है, ऐसे में एक 28 साल के युवा पर भरोसा करके बीजेपी ने बड़ा दाव खेला। तेजस्वी सूर्या बीजेपी में सबसे कम उम्र में टिकट पाने वाले उम्मीदवार हैं। इस सीट पर कांग्रेस ने अपने दिग्गलज नेता बीके हरिप्रसाद को मैदान में उतारा है। कर्नाटक की बंगलौर दक्षिण लोकसभा सीट पर 2014 में हुए चुनाव में भाजपा के अनंत कुमार ने जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस के नंदन नीलेकणि को हराया था। दरअसल, तेजस्वी सूर्या मूलरूप से कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले के रहने वाले हैं और बासवांगुडी विधानसभा से विधायक एल ए रवि सुब्रमण्यन के भतीजे हैं। तेजस्वी सूर्या बीजेपी के साथ ही आरएसएस से भी जुड़े हुए हैं। तेजस्वी सूर्या पेशे से वकील हैं और उन्होंने बेंगलुरु के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज से पढ़ाई की है। वह कर्नाटक हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। इसके अलावा वह भाजपा युवा मोर्चा कर्नाटक के प्रदेश महासचिव हैं। इतना ही नहीं सूर्या नेशनल सोशल मीडिया कैंपेन टीम 2019 के सदस्य भी हैं।

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर: मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट से बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ा है। इस सीट पर कांग्रेस की ओर से कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह चुनावी मैदान में हैं। भिंड के लाहार कॉलेज से इतिहास में स्नातकोतर तक पढ़ाई करने वालीं प्रज्ञा को छात्र जीवन में एक मुखर वक्ता के तौर रही हैं। बहुत कम उम्र में ही वैराग्य और संन्यास का चोला पहन लेने वालीं साध्वी प्रज्ञा अपने तीखे तेवर और राष्ट्रवाद पर अपने भाषणों के कारण कई बार सुर्खियों में और विवादों के घेरे में रहीं। इस बार इनकी उम्मीदवारी से भोपाल हॉट सीट बन गई है। नाथूराम गोडसे को लेकर बयान की वजह से भी प्रज्ञा काफी विवादों में रहीं। भोपाल सीट पर 2014 में BJP के आलोक संजर ने जीत हासिल की थी।

अमित शाह: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा है। अमित शाह गांधीनगर सीट से इस बार मैदान में हैं, जहां से बीजेपी की ओर से पहले लालकृष्ण आडवाणी चुनाव लड़ा करते थे। इस बार बीजेपी ने आडवाणी को टिकट नहीं दिया है। पीएम मोदी के करीबी माने जाने वाले अमित शाह लगातार चार बार विधायक रह चुके हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव, महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों में जीता का श्रेय अमित शाह को ही जाता है। अमित शाह आरएसएस से जुड़े रहे हैं। कांग्रेस ने गुजरात की गांधीनगर लोकसभा सीट पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ अपने विधायक सीजे चावड़ा को उतारा है। 

गौतम गंभीर: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से की है। बीजेपी ने पूर्वी दिल्ली सीट से गौतम गंभीर को उतारा है, जहां से आम आदमी पार्टी ने आतिशी को टिकट दिया है। कांग्रेस ने इस सीट से अरविंदर सिंह लवली को उतारकर इस चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। बता दें कि कुछ समय पहले ही गौतम गंभीर ने बीजेपी का दामन थामा था। वह शुरू से ही बीजेपी समर्थक रहे हैं। आपको बता दें कि गौतम गंभीर विश्वकप 2011 में भारतीय टीम का हिस्सा रह चुके हैं। 

विजेंद्र सिंह: कांग्रेस ने दक्षिण दिल्ली से बॉक्सर विजेंदर सिंह को मैदान में उतारा है। विजेंदर सिंह का मुकाबला बीजेपी के रमेश बिधूड़ी और आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा से है। बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज बने विजेंदर पेशेवर बॉक्सिंग में भी एशिया पैसीफिक सुपर मिडिलवेट और ओरिएंटल मिडिलवेट खिताब अपने नाम कर चुके हैं। अब देखना होगा कि दक्षिण दिल्ली से इस त्रिकोणीय मुकाबले में किसे जीत हासिल होती है। बता दें कि इस सीट से भाजपा के रमेश विधूड़़ी मौजूदा सांसद हैं। 

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हंस राज हंस: दिल्ली की उत्तरी-पश्चिमी सीट से बीजेपी ने जाने-माने सूफी गायक हंसराज हंस मैदान में उतारा है। हंसराज हंस का मुकाबला आम आदमी पार्टी के गुग्गन सिंह और कांग्रेस के राजेश लिलोठिया से हो रहा है। वह बीजेपी की टिकट पर पहली बार चुनावी मैदान में हैं और इससे पहले हंस राज हंस ने 2009 में शिरोमणि अकाली दल से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की। फिर पांच साल बाद 2014 में हंसराज हंस ने अकाली दल छोड़ कर कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया। करीब दो साल कांग्रेस में रहने के बाद हंसराज हंस ने दिसंबर 2016 में बीजेपी ज्वाइन कर लिया।

सनी देओल: फिल्मों में अपने दमदार अभिनय का लोहा मनवा चुके सनी देओल अब राजनीति में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पंजाब की गुरदासपुर लोकसभा सीट से बीजेपी ने सनी देओल को उतारा है। सनी के खिलाफ कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सुनील जाखड़ चुनावी मैदान में हैं। इस सीट पर दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना बीजेपी की टिकट पर चार बार सांसद रह चुके। अप्रैल 2017 में कैंसर से उनका निधन हो गया था। विनोद खन्ना के निधन के बाद अक्टूबर 2017 में हुए उपचुनाव में जाखड़ 1192 लाख वोटों के अंतर से जीते थे।

उर्मिला मातोंडकर: फिल्म अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर फिल्मी पर्दे पर धमाल मचाने के बाद अब सियासी पिच पर अपनी किस्मत आजमा रही हैं। उर्मिला मातोंडकर नॉर्थ मुंबई की सीट से कांग्रेस की टिकट पर लोकसभा 2019 का चुनाव लड़ा है। इनके खिलाफ बीजेपी ने मुंबई उत्तर सीट से मौजूदा सांसद गोपाल शेट्टी को उतारा है। बता दें कि 2004 में एक्टर गोविंदा ने कांग्रेस के टिकट पर इस सीट पर अपना कब्जा जमाया था। अब देखना होगा कि कांग्रेस के लिए उत्तर मुंबई सीट पर उर्मिला मातोंडकर तुरुप का इक्का साबित हो पाती हैं या नहीं।

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