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लोकसभा चुनाव: कांग्रेस को अपनी परंपरागत सीटों पर जीत की ज्यादा उम्मीद

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लोकसभा चुनाव के नतीजों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। एग्जिट पोल के रुझान से लगता है कि एनडीए बिहार में बेहतर प्रदर्शन करने जा रहा है। इन रुझानों ने महागठबंधन के घटक दलों में बेचैनी बढ़ा दी है। जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो पार्टी को समस्तीपुर सहित अन्य सीटों के साथ अपनी परंपरागत सीटों से उम्मीद अधिक है। किशनगंज और कटिहार इनमें प्रमुख हैं। मोदी लहर भी इन किलों को ढाह नहीं पाई थी। तीसरी सीट सासाराम है। हालांकि 2009 और 2014 के नतीजों से आकलन करें तो यहां पेच फंसा हुआ दिखता है। औरंगाबाद भी कांग्रेस की सीट रही है, लेकिन इस बार वह पार्टी के खाते में नहीं है। 

यूं तो हर चुनाव में हर सीट पर समीकरण बनते-बिगड़ते और बदलते हैं। राज्य में नए परिसीमन के आधार पर पहली बार 2009 में लोस चुनाव हुआ। किशनगंज सीट पर कांग्रेस के मोहम्मद असरारुल हक जीते थे। तब 52.83 % मतदान हुआ था, जबकि 2014 में वोट % बढ़कर 64.52 % हो गया। यह उछाल भी नतीजों पर कोई असर नहीं डाल पाया था। अलबत्ता कांग्रेस को 2009 में मिले 38 % मतों का आंकड़ा 2014 में बढ़कर 53 % को पार कर गया था। यदि इसे विधानसभा स्तर पर देखें तो बहादुरगंज, ठाकुरगंज, किशनगंज, कोचाधामन और अमौर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस तो वायसी में जदयू प्रत्याशी आगे रहे थे। जबकि 2014 में सभी विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस भारी पड़ी थी।

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2019 के चुनाव में यहां 66.34 % मतदान हुआ है, जो पिछले चुनाव से करीब दो प्रतिशत अधिक है। हालांकि इस बार हालात थोड़े अलग हैं। अब ओवैसी भी फैक्टर हैं। मुख्य मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी मो. जावेद और जदयू के मोहम्मद अशरफ के बीच है। कटिहार सीट 2009 में भाजपा ने कांग्रेस से छीन ली थी। भाजपा के निखिल कुमार चौधरी ने कांग्रेस प्रत्याशी तारिक अनवर को हराया था। तब 56.97 % वोटिंग हुई थी और भाजपा प्रत्याशी को करीब 37 प्रतिशत और कांग्रेस को करीब 35 प्रतिशत मत मिले थे। 

घटती गई कांग्रेस की सीट संख्या
वर्ष 2009 में कांग्रेस 37 सीटों पर लड़ी थी। जबकि 2014 में राजद से गठबंधन के चलते 12 रह गई थी। इस बार महागठबंधन का हिस्सा बनी कांग्रेस को नौ ही सीटें मिली हैं।

इस बार वोट प्रतिशत में मामूली इजाफा
तब मोदी लहर थी और वोट प्रतिशत बढ़कर 67.60 % हो गया था। उस चुनाव में कटिहार विधानसभा में तो भाजपा ने बढ़त बनाए रखी थी, लेकिन बाकी पांच क्षेत्रों में एनसीपी भारी पड़ी थी। इस बार (2019) वोट % में मामूली सा इजाफा हुआ है। मुकाबला कांग्रेस के तारिक अनवर और जदयू के दुलालचंद गोस्वामी के बीच है।
 

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तारिक ने निखिल चौधरी को हराया
यहां उल्लेखनीय है कि तब जदयू-भाजपा साथ थे और कांग्रेस और राजद अलग थे। विधानसभा के हिसाब से देखें तो कटिहार, मनिहारी और बरारी में भाजपा तो कदवा, बलरामपुर और प्राणपुर क्षेत्र में कांग्रेस आगे रही थी। वर्ष 2014 में तारिक एनसीपी से लड़े और उन्होंने भाजपा के निखिल कुमार चौधरी को हराया। वर्ष 2009 में कांग्रेस 37 सीटों पर लड़ी थी। जबकि 2014 में राजद से गठबंधन के चलते 12 रह गई थी। इस बार महागठबंधन का हिस्सा बनी कांग्रेस को नौ ही सीटें मिली हैं।

वोट प्रतिशत बढ़ने के बाद हार गई थी कांग्रेस
सासाराम सीट पर 2009 में करीब 42 %मतदान हुआ था। करीब 32 % वोट लेकर कांग्रेस की मीरा कुमार ने भाजपा को शिकस्त दी थी। तब भाजपा को 24.92 %, राजद ने करीब 18 और बसपा को 16 %से अधिक वोट मिले थे। विधानसभा सीटों के हिसाब से देखें तो मोहनिया, भभुआ, चैनपुर, चेनारी और सासाराम में कांग्रेस तो करगहर में भाजपा आगे रही थी। वहीं 2014 में वोट प्रतिशत बढ़कर 54.39 % हो गया था। वोट प्रतिशत बढ़ने, राजद के साथ होने और भाजपा व जदयू के अलग होने के बाद भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। 
 

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  • Web Title:Lok Sabha elections: Congress expects more to win in their traditional seats