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Hindi News देशबंगाल में बाहरियों ने किया खेला, शत्रुघ्न सिन्हा से यूसुफ पठान तक TMC के ये चेहरे बने हीरो; दिग्गजों को दी पटखनी

बंगाल में बाहरियों ने किया खेला, शत्रुघ्न सिन्हा से यूसुफ पठान तक TMC के ये चेहरे बने हीरो; दिग्गजों को दी पटखनी

बहरामपुर में अधीर चौधरी, यूसुफ पठान से हार गए। बर्दवान-दुर्गापुर में दिलीप घोष की हार कीर्ति आजाद के हाथों हुई। वहीं शत्रुघ्न सिन्हा को आसनसोल की जनता ने सिरमौर बनाया है।

बंगाल में बाहरियों ने किया खेला, शत्रुघ्न सिन्हा से यूसुफ पठान तक TMC के ये चेहरे बने हीरो; दिग्गजों को दी पटखनी
shatrughan sinha yusuf pathan
Himanshu Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 04 Jun 2024 08:26 PM
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भाजपा और कांग्रेस को तृणमूल के तीन 'बाहरी' उम्मीदवारों से हार का सामना करना पड़ा है। बहरामपुर में अधीर चौधरी, यूसुफ पठान से हार गए। बर्दवान-दुर्गापुर में दिलीप घोष की हार कीर्ति आजाद के हाथों हुई। वहीं शत्रुघ्न सिन्हा को आसनसोल की जनता ने सिरमौर बनाया है। बीजेपी ने टीएमसी पर इन्हें 'बंगाली विरोधी' और 'बाहरी' कहकर हमला बोला था, फिर भी टीएमसी ने पठान, शत्रुघ्न और कीर्ति पर भरोसा किया। इस बार पार्टी ने यह साबित कर दिया कि क्रिकेट के मैदान पर बड़े-बड़े छक्के लगाने वाले खिलाड़ी सियासत के भी खिलाड़ी हैं। जैसे-जैसे मतगणना का दौर आगे बढ़ता गया, बहरामपुर से लेकर बर्दवान-दुर्गापुर से लेकर आसनसोल तक 'खेला होबे' के नारे तेज हो गए। आंनद बाजार पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव परिणाम घोषित होते ही अभिषेक के मोबाइल नंबर से पठान को 'बधाई' संदेश भेजा गया।

यूसुफ पठान की सियासी मैदान में सेंचुरी
शत्रुघ्न और कीर्ति बिहार के मूल निवासी हैं, तो यूसुफ गुजरात के हैं। विश्व कप विजेता क्रिकेट टीम के सदस्य पठान को बहरामपुर जैसी सीट पर उतारकर तृणमूल ने चौंका दिया। टीएमसी के उम्मीदवारों की सूची की घोषणा के समय यूसुफ की अचानक एंट्री हुई। उन्हें सीधे अधीर के गढ़ बहरामपुर के 'खेल' में उतारा गया लेकिन 'पिंच हिटर' ने ये कर दिखाया। गिनती की शुरुआत में कांग्रेस के पांच बार के सांसद अधीर चौधरी आगे चल रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे राउंड आगे बढ़ता गया, तृणमूल के पठान ने खेलना जारी रखा। हालांकि शुरुआत में वह 618 वोटों से आगे चल रहे थे, लेकिन नौवें राउंड की गिनती के बाद पठान अधीर से 33,934 वोटों से आगे हो गए। दिन ख़त्म होने तक पठान की बढ़त पचास हजार की हो गई। 

आखिरकार लगभग 80,000 वोटों से पठान से हारने के बाद अधीर ने कहा, "बांग्ला राजनीति धर्मनिरपेक्ष राजनीति के लिए लगातार ख़तरनाक होती जा रही है। जिनके पास उदारवादी और धर्मनिरपेक्ष ताकतें हैं उनके लिए चुनाव मुश्किल हो रहा है।'' उन्होंने आगे कहा, ''मतदान अच्छा हुआ। हमारे प्रयासों में कोई त्रुटि नहीं हुई।"

वहीं 2022 में शत्रुघ्न आसनसोल में उपचुनाव जीतकर सांसद बने। तृणमूल ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि इस बार भी उन्हें उम्मीदवार बनाया जायेगा। जब भाजपा ने आसनसोल में भोजपुरी स्टार पवन सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित किया, तो तृणमूल ने रैली की और दावा किया कि उनकी ऑन-स्क्रीन भूमिका 'बंगाली विरोधी' थी। पवन पीछे हट गए। उस बारे में याद करते हुए, राज्य में विपक्ष के नेता, भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “जब पवन सिंह को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया था, तो तृणमूल ने उन्हें ‘बाहरी व्यक्ति’ कहा था। उन्होंने खुद ही उम्मीदवारी वापस ले ली। कीर्ति आजाद, शत्रुघ्न सिन्हा, यूसुफ पठान बंगाल के लोग थे, मैं जानना चाहता हूं।” 

शत्रुघ्न सिन्हा ने किया 'खामोश'
मंगलवार को आसनसोल में शत्रुघ्न की जीत में ज्यादा बाधा नहीं आई। हालांकि, अहलूवालिया, जिन्हें भाजपा ने बॉलीवुड के 'बिहारी बाबू' के खिलाफ मैदान में उतारा था, उनका 'वोट' रिकॉर्ड अच्छा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में आसनसोल की सात लोकसभा सीटों में से सिर्फ दो पर बीजेपी का कब्जा था। ऐसे में बीजेपी को अंदाजा था कि इस बार लड़ाई आसान नहीं होगी, इसलिए बीजेपी ने अभियान मजबूत रखा। आखिरकार शत्रुघ्न ने रंगीन स्क्रीन की तरह चुनावी अखाड़े में बीजेपी को 'ख़ामोश' कर दिया। 

बात करें बर्दवान-दुर्गापुर सीट की तो यहां सात विधानसभा क्षेत्रों में से दो दुर्गापुर में और पांच पूर्वी बर्दवान ग्रामीण में आते हैं। पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद को उम्मीदवार बनाने के बाद स्थानीय तृणमूल के एक वर्ग को यह भी डर था कि उनकी भाषा की समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क में बाधा बन सकती है। वे अभियान में 'बाहरी' उम्मीदवारों के साथ हमले से निपटने को लेकर भी सशंकित थे। बीजेपी ने भी दिलीप घोष के नाम की घोषणा कर दी तो लड़ाई और टाइट हो गई। मगर एग्जिट पोल के नतीजों से उलट तस्वीर सामने आई। दिलीप को 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य कीर्ति आजाद से हार का सामना करना पड़ा। तृणमूल उम्मीदवार करीब 1 लाख 37 हजार वोटों से जीते।