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28 मई, 2020|5:32|IST

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लोकसभा चुनाव 2019: पहले चरण के मतदान के बाद EVM पर विपक्ष फिर हमलावर

Election Commission

लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद विपक्ष ने एक बार फिर ईवीएम को लेकर हमलावर हो गया है। रविवार को 21 पार्टियों ने नई दिल्ली में लोतंत्र बचाओ बैनर के तले प्रेस कांफ्रेंस कर ईवीएम को लेकर गंभीर आरोप लगाए और मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की। 

टीडीपी अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू ने कहा कि 21 राजनीतिक दल 50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों का मिलान ईवीएम से कराए जाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शनिवार को वह मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा से मिले थे और ईवीएम में गडबड़ी का मामला उठाया था। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ईवीएम से निकली पर्ची को देखने का समय बहुत कम है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए।

सिंघवी ने कहा कि लोगों से शिकायत मिली है कि उन्होंने जिस पार्टी को वोट दिया, वीवीपैट से निकली पर्ची पर उस दल का नाम नहीं था बल्कि किसी दूसरी पार्टी का नाम था। इससे साफ है कि ईवीएम से छेड़छाड़ हुई है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का कहना है कि अगर वीवीपैट से निकली पर्चियां गिनते हैं, तो इसमें पांच दिन से अधिक वक्त लग सकता है। हमने चुनाव आयोग से कहा है कि वह अपनी टीम बढ़ाएं, क्योंकि इस काम में पांच दिन का वक्त नहीं लगना चाहिए। सिंघवी ने कहा कि हमे लगता है कि ईवीएम में गडबड़ी के मुद्दे के निपटारे के लिए आयोग पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा है।

कांफ्रेंस में मौजूद आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ की गई है। इन मशीनों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वोट सिर्फ भाजपा को जाता है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा क्यों होता कि जिन मशीनों में खराबी की शिकायत आती है, उसमें वोट भाजपा को ही क्यों जाते हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद इंजीनियर हैं। इन मशीनों में कुछ गडबड़ जरूर है। चंद्रबाबू नायडू ने तेलंगाना में 25 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। चुनाव आयोग पर इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि हमें मतदाताओं पर पूरा विश्वास है पर ईवीएम पर नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे। 

विपक्ष के आरोप 

- ईवीएम में छेड़छाड़ की गई जिससे वोट केवल भाजपा को पड़े 
- दूसरी पार्टी को वोट डालने पर भी वीवीपैट की पर्ची भाजपा के पक्ष में 

मांग

- 7 सेकेंड हो वीवीपैट की पर्ची को देखने का समय, अभी यह तीन सकेंड 
- 50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों का मिलान कुल पड़े वोटों के साथ कराया जाए

आयोग का रुख

- मशीन पूरी तरह से सुरक्षित हैं क्योंकि ईवीएम को बाहरी उपकरण से जोड़ा ही नहीं जा सकता 
- हैक्थॉन आयोजित कर पार्टियों को ईवीएम में छेड़छाड़ साबित करने की चुनौती दे चुका है 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला 

- अदालत ने माना कि 50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों का मिलान करना मुश्किल 
- लेकिन प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के पांच बूथों के मतों का पर्चियों मिलान हो 

तीन दशक का सफर 

- 1981 में पहली बार प्रायोगिक रूप से ईवीएम का इस्तेमाल केरल के उत्तरी परवुर में हुआ
- 1989 में निर्वाचन आयोग ने बीईएल और ईका को ईवीएम बनाने के लिए अधिकृत किया
- 1998 में मध्यप्रदेश, राजस्थान और दिल्ली की 16 विधानसभा सीटों पर ईवीएम से मतदान 
- 2004 में पहली बार आम चुनाव पूरी तरह से ईवीएम से कराए गए 
- 2011 में अगली पीढ़ी के ईवीएम का विकास, वीवीपैट जोड़ने की सुविधा

कई पर कानूनी चुनौती 

- 1984 में सुप्रीम कोर्ट ने कानून में तकनीकी खामी के कारण ईवीएम के खिलाफ फैसला दिया
- 1988 में जनप्रतिनिधि कानून 1951 में संशोधन कर इस खामी को दूर की गई 

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  • Web Title:Lok Sabha Elections 2019 Opposition Again Against EVM After First Phase Polling