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अमृतसर लोकसभा सीट 2019: हाईप्रोफाइल सीट पर होगी कड़ी टक्कर

 Congress leader navjot singh Sidhu (Photo:HT)

पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में सबसे अहम मानी जाती है- अमृतसर सीट। करीब दो दशक तक अमृतसर लोकसभा सीट बीजेपी का गढ़ रही, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में यह सीट कांग्रेस के खाते में चली गई। 2004 से 2014 तक यह सीट भाजपा के नवजोत सिंह सिद्धू के पास रही है। 2014 के लोकसभा चुनावों में सिद्धू को यहां से टिकट नहीं मिला। भाजपा ने वरिष्ठ नेता अरुण जेटली को इस सीट से चुनाव लड़वाया गया, लेकिन वह कांग्रेस के नेता अमरिंदर सिंह से एक लाख से ज्यादा मतों से पराजित हो गए। 

2016 के अंत में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सतलुज यमुना लिंक नहर के मामले पर पंजाब से नाइंसाफी का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया। फरवरी 2017 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस (Congress) के गुरजीत सिंह औजला चुनाव जीत गए। फिलहाल यह सीट कांग्रेस के पास है। माना जा रहा है कि इस बार नवजोत सिंह सिद्धू भी इस सीट से दावेदार होंगे। 

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उधर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) सिद्धू की अनुपस्थिति में क्रिकेटर हरभजन सिंह पर डोरे डाल रही है। हरभजन सिंह स्थानीय होने के साथ-साथ खासे लोकप्रिय भी हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि वह हरभजन सिंह के संपर्क में हैं। हरभजन भी संपर्क की बात स्वीकार करते हैं, लेकिन वह कहते हैं, 'अभी तक कुछ भी ठोस नहीं है। मेरी किसी भाजाप नेता से मुलाकात नहीं हुई है।' 

युवाओं में लोकप्रिय 38 वर्षीय हरभजन सिंह भाजपा के समीकरणों में पूरी तरह फिट बैठते हैं। 2014 में अकालियों के खिलाफ आक्रोष के चलते भाजपा यह सीट हार गई थी। हरभजन सिंह ये नाराजगी भी दूर कर सकते हैं। उधर, कांग्रेस में इस बात को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अमतृतसर से चुनाव लड़वाया जा सकता है। लेकिन अबतक आई खबरों के मुताबिक मनमोहन सिंह का चुनाव लड़ने का इरादा नहीं हैं। 

आम आदमी पार्टी (AAP) पहले ही अमृतसर से उपकार सिंह संधू का नाम घोषित कर चुकी है। वह हाल ही में कांग्रेस छोड़कर आप में शामिल हुए हैं। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के चलते उन्होंने 2015 में अकाली दल से नाता तोड़ लिया था। इंद्रबीर सिंह बुलारिया के साथ उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा था। बुलारिया बादल सरकार में मुख्य संसदीय सचिव थे, लेकिन संधू अकाली-भाजपा सरकार का हिस्सा होते हुए भई लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे। अब वह आप के प्रत्याशी हैं। 

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अमृतसर का इतिहास गौरवमयी रहा है। यहां स्वर्ण मंदिर आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र है। अमृतसर शहर स्वर्ण मंदिर के चारों तरफ बसा है। कहा जाता है कि अमृतसर शहर का नाम एक तालाब के नाम पर रखा गया है, जिसका निर्माण गुरू रामदास ने कराया था। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा नरसंहार अमृतसर के जलियांवाला बाग में ही हुआ था। इसी इतिहास के चलते यहां की सीट हमेशा से हाई प्रोफाइल रही है। बता दें कि 1952 से अब तक कांग्रेस ने 12 बार यहां से जीत दर्ज की है, अमृतसर लोकसभा के अंदर कुल 9 विधानसभा सीटें हैं। इसमें से 8 पर कांग्रेस का कब्जा है, जबकि एक सीट पर अकाली दल को जीत मिली है। 

2014 के लोकसभा चुनाव के मुताबिक अमृतसर में कुल 14,77,262 मतदाता हैं, जिनमें 7,79,164 पुरुष और 6,98,098 महिला मतदाता हैं। 

अमृतसर लोकसभा चुनावों के पिछले 5 विजेता
2017- गुरजीत सिंह औजला- कांग्रेस
2014- कैप्टन अमरिंदर सिंह- कांग्रेस
2009- नवजोत सिंह सिद्धू- भाजपा
2004- नवजोत सिंह सिद्धू- भाजपा
1999- रघुनंदन लाल भाटिया- कांग्रेस

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