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Lok Sabha Elections: किसान तय करेंगे सियासी दलों का भविष्य

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लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) में पार्टियों की किस्मत बहुत हद तक ग्रामीण मतदाताओं के रुझान पर निर्भर करेगी। दरअसल, देश की कुल 542 संसदीय सीटों में से सिर्फ 57 शहरी क्षेत्रों में आती हैं। ग्रामीण इलाकों में मौजूद लोकसभा सीटों की संख्या 342 है। शायद यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दल किसानों को लुभाने की कोशिशों में जुटे हैं।
 

2014 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो भाजपा ने 342 ग्रामीण सीटों में से 178 पर कब्जा जमाया था। वहीं, 2009 के चुनाव में उसके खाते में 66 ग्रामीण सीटें गई थीं। आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल गठबंधन की कवायदों में जुटे हैं। सात चरणों में होने वाले चुनावों में कृषि संकट सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभर सकता है। वैसे, कृषि पर आश्रित 120 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश और बिहार के जरिए दिल्ली की सत्ता तक पहुंचने की भाजपा की कोशिशें आसान नहीं होंगी, क्योंकि इन दोनों राज्यों पर कृषि संकट की मार सबसे ज्यादा पड़ी है।

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किसानों की चिंता
2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद लगातार दो साल तक बारिश कम होने से देश को सूखे के संकट का सामना करना पड़ा। फिर 2016 से 2018 के बीच अच्छी बारिश होने के कारण खाद्यान्नों का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। इस कारण खाद्यान्न की कीमतों में भारी गिरावट आ गई और किसानों को भारी नुकसान हुआ। केंद्र सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत तो की, लेकिन खाद्यान्नों की गिरती कीमतों की वजह से यह संभव होता नहीं दिखता। दिसंबर 2018 तक औसत ग्रामीण मजदूरी सिर्फ 3.8 फीसदी की दर से बढ़ी। इससे पता चलता है कि कृषि रहित ग्रामीण भत्ते में भी बढ़ोतरी नहीं हुई है।

 

कम हो रही कमाई
स्वराज इंडिया पार्टी के अध्यक्ष योगेंद्र यादव के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में किसानों की कमाई कम होना चिंता का सबसे बड़ा कारण है। इसके साथ ही कर्ज का बढ़ता बोझ और आवारा जानवरों द्वारा खेतों को नुकसान पहुंचाने की समस्या भी बहुत बड़ी है।

 

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पीएम-किसान सम्मान निधि का सहारा
केंद्र सरकार ने किसानों की स्थिति सुधारने के लिए सितंबर 2018 में पीएम-आशा योजना की शुरुआत की थी, जो सफल नहीं हो पाई। इसके बाद फरवरी 2019 में अन्नदाताओं को आकर्षित करने के लिए वह पीएम किसान सम्मान निधि योजना लेकर आई। इसमें छोटे किसानों को हर साल 6000 रुपये की आर्थिक मदद देने का प्रावधान है। चुनावी अभियान में भाजपा इसी योजना के सहारे किसानों के पास वोट मांगने जाएगी।


12 करोड़ किसानों को लाभ देने का दावा
किसानों की कर्ज माफी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा के हाथों से सत्ता छीन ली। लेकिन केंद्र सरकार को पूरी उम्मीद है कि वह पीएम-किसान योजना के सहारे चुनाव में बेड़ा पार लगा लेगी। उसका अनुमान है कि 12 करोड़ किसानों को इस योजना से फायदा होगा। यह आंकड़ा 86 फीसदी कृषि परिवारों के बराबर है। पीएम ने इस योजना को और विस्तार देने का इशारा किया है।

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  • Web Title:Lok Sabha elections 2019 Farmers will decide the future of political parties