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लोकसभा चुनाव नतीजे: यही रुझान रहा तो दिल्ली विधानसभा चुनाव में होगी ऐसी स्थिति

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दिल्ली में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में राजधानीवालों ने लोकसभा की तर्ज पर वोट दिया तो नतीजे चौंकाने वाले होंगे। परिणाम साल 2015 के विधानसभा चुनाव के ठीक उलट होंगे। दिल्ली की सात लोकसभा सीटों पर विधानसभावार मिले मतों को देखे तो भाजपा दिल्ली विधानसभा में पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाती दिख रही है और ‘आप’ को एक भी सीट नहीं मिल रही है। 

लोकसभा की सातों सीटों पर मिले मतों को दिल्ली के विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से देखें तो भाजपा को 65, कांग्रेस को पांच और आम आदमी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिल रही है। जबकि 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 67, भाजपा ने 3 और कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी। दिल्ली की प्रत्येक लोकसभा सीट के अंतर्गत 10 विधानसभा सीट आती हैं। नतीजे बता रहे हैं कि ‘आप’ उम्मीदवार लोकसभा के एक भी विधानसभा सीट पर पहले नंबर पर नहीं रहे हैं। यही हाल अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में रहा तो ‘आप’ के हाथ से सत्ता जा सकती है। 

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सिर्फ दक्षिणी दिल्ली लोकसभा अकेली ऐसी संसदीय सीट है, जहां पर ‘आप’ उम्मीदवार राघव चड्ढा सभी विधानसभाओं में दूसरे नंबर पर रहे हैं। इसके अलावा उत्तर-पश्चिमी सीट पर भी 10 में 6 सीटों पर ‘आप’ उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे हैं। बाकी अन्य पांच सीटों पर ‘आप’ उम्मीदवार एक-दो सीट पर ही बढ़त बनाने में सफल रहे हैं।  

‘आप’ को परंपरागत वोट नहीं मिला 
आम आदमी पार्टी को मुस्लिम बाहुल्य और कच्ची कॉलोनियों के अलावा 12 सुरक्षित सीट, जिसे वह अपना परंपरागत वोट मान रहे थे, वहां पर भी सबसे पीछे रही है। पार्टी एक भी सुरक्षित सीट पर बढ़त बनाने में सफल नहीं रही है। जबकि 2015 में यह सभी सीटें आम आदमी पार्टी ने जीती हैं। खुद अऱविंद केजरीवाल ने चुनाव घोषणा से पहले दो दर्जन से अधिक जनसभाएं उन्हीं कच्ची कॉलोनियों के मतदाताओं को रिझाने के लिए वहां जाकर किया था।

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नाराज आप विधायकों वाली सीट पर भाजपा को बंपर समर्थन
आम आदमी पार्टी से नाराज विधायक जो भाजपा के पाले में चले गए। वहां पर भी आम आदमी पार्टी को खासा नुकसान झेलना पड़ा है। पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर विधानसभा से से अनिल वाजपेयी, उत्तर-पूर्वी संसदीय सीट के करावल नगर विधानसभा से कपिल मिश्रा और दक्षिणी दिल्ली के बिजवासन विधानसभा से कर्नल देवेंद्र सहरावत के जाने का असर यह हुआ की यहां भाजपा ने बंपर वोट हासिल किए। यहां सिर्फ बिजवासन को छोड़कर सभी सीट पर आम आदमी पार्टी तीसरे नंबर पर चली गई। बिजवासन में दूसरे नंबर पर रहने के बाद भी भाजपा और आप के बीच वोट का अंतर 50 हजार से अधिक रहा है।

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‘आप’ का बयान 
दिल्ली आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक गोपाल राय ने बताया कि लोकसभा के नतीजों को विधानसभा चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है। आज भी दिल्ली की जनता मुख्यमंत्री के रूप में अरविंद केजरीवाल को देखना चाहती है। सरकार ने जो काम किया है उसके आधार पर जनता अपना वोट करेगी। 2014 में भी ऐसा हुआ था मगर 2015 में हम सत्ता में आएं थे। दिल्ली के कोने-कोने से लोग दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में अरविंद केजरीवाल को देखना चाहती है। 

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