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लोकसभा चुनाव 2019: क्या राजस्थान में अपने गढ़ झुंझुनू को फिर से जीत पाएगी कांग्रेस

झुंझुनूं लोकसभा सीट पर कद्दावर जाट नेता शीशराम ओला का वर्चस्व था। ओला लगातार पांच बार झुंझुनूं से लोकसभा चुनाव जीते। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व शीशराम ओला का निधन हो जाने पर कांग्रेस ने उनकी पुत्रवधू एवं झुंझुनूं की पूर्व जिला प्रमुख राजबाला ओला को चुनाव लड़ाया, मगर वह मोदी लहर के चलते भाजपा की सूरजगढ़ विधायक संतोष अहलावत से चुनाव हार गई। अहलावत को 488182 वोट मत मिले जबकि राजबाला ओला को 254347 मतो से संतोष करना पड़ा। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बागी के तौर पर निर्दलीय के रूप में चुनाव लडऩे वाले नवलगढ़ विधायक डॉ.राजकुमार शर्मा ने लोकसभा चुनाव में 206280 मत प्राप्त  किए थे जो कांग्रेस की हार का एक प्रमुख कारण था। वर्तमान में शर्मा नवलगढ़ से कांग्रेस विधायक है। गत लोकसभा चुनाव में इनके अलावा आम आदमी पार्टी के मेजर जनरल राज कादयान ने 10386 मत प्राप्त किए जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रत्याशी रईसा बानो को 10423 मत मिले।  

इस सीट पर बीजेपी सिर्फ एक बार जीत हासिल कर सकी है। वहीं, 12 बार कांग्रेस, दो बार जनता दल और एक बार भारतीय लोक दल ने विजय पाई है। 

विधानसभा सीटों में स्थिति
झुंझुनूं संसदीय निवार्चन क्षेत्र में 8 विधानसभा सीट आती हैं- झुंझुनूं, उदयपुरवाटी, खेतड़ी, सूरजगढ़, पिलानी, मंडावा, नवलगढ एवं सीकर जिले का फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र आता है। हाल में हुए विधानसभा चुनाव में इन 8 सीटों में से कांग्रेस ने 5 सीट पर जीत दर्ज की जबकि बीजेपी 3 सीट जीतने में कामयाब रही।

संसदीय सीट का इतिहास
1952: राधेश्याम रामकुमार मोरोर्का, कांग्रेस
1957: राधेश्याम रामकुमार मोरारका, कांग्रेस
1962: राधेश्याम रामकुमार मोरारका, कांग्रेस
1967: आर के बिड़ला, कांग्रेस
1971: एस एन सिंह, कांग्रेस
1977: के एल महला, भारतीय लोकदल 
1980: भीम सिंह, जनता पार्टी
1984: मो. अयूब खान, कांग्रेस
1989: जगदीप धनखड़, जनता दल
1991: मो. अयूब खान, कांग्रेस
1996: सीस राम ओला, ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी)
1998: सीस राम ओला, अखिल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (सेकुलर)
1999: सीस राम ओला, कांग्रेस
2004: सीस राम ओला, कांग्रेस
2009: सीस राम ओला, कांग्रेस
2014: संतोष अहलावत, भारतीय जनता पार्टी

लोकसभा चुनाव 2014: 
- मौजूदा सांसद- संतोष अहलावत (बीजेपी)
बीजेपी को 48.5 और कांग्रेस को 25.3 फीसदी वोट मिले थें, वही तीसरे स्थान पर निर्दलीय उम्मीदवार को 20.5 फीसदी वोट मिले। बीजेपी से संतोष अहलावत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सीसराम ओला की पुत्रवधु राजबाला ओला को 2,33,835 मतों के भारी अंतर से पराजित किया। इस चुनाव में संतोष अहलावत को 4,88,182, कांग्रेस की राजबाला ओला को 2,54,347 जबकि तीसरे स्थान पर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राजकुमार शर्मा को 2,06,288 वोट मिले।

- 2014 में कितना प्रतिशत हुआ मतदान- 59.3 
- कुल मतदाता- 16,96,788 
- 2014 के मुताबिक पुरुष मतदाताओं की संख्या -  8,93,354     
- 2014 के मुताबिक महिला मतदाताओं की संख्या -  8,03,434 

जातिगण समीकरण
साल 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की जनसंख्या 24,42,683 है जिसका 74.84 फीसदी हिस्सा ग्रामीण और 25.16 फीसदी हिस्सा शहरी है। जबकि कुछ आबादी का 16.7 फीसदी अनुसूचित जाति और 1.76 फीसदी अनुसूचित जनजाति हैं। जाट बहुल झुंझुनू सीट पर मुस्लिमों की आबादी दूसरे नंबर पर है। वहीं माली मतदाताओं की आबादी भी खासी अच्छी है।

कौन है दावेदार, कौन लगा रहा है जोर
आठ विधानसभा क्षेत्रों से बना झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र में आगामी लोकसभा चुनाव के लिये भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दल जिताऊ प्रत्याशी तलाश रहे है। 
झुंझुनूं जाट बहुल मतदाताओं वाला लोकसभा क्षेत्र होने से कांग्रेस में जाट जाति से प्रत्याशियों के बीच टिकट लेने की होड़ मची हुई है। कांग्रेस टिकट के प्रबल दावेदरों में पिछली बार मोदी लहर में हार चुकी राजबाला ओला एक बार फिर चुनाव लडऩे की तैयारी कर रही है। राजबाला ओला के पति बृजेन्द्र ओला झुंझुनूं विधानसभा सीट से तीसरी बार विधायक है। ओला परिवार चाहता है कि उनके पिता शीशराम ओला झुंझुनूं से पांच बार सांसद एवं नौ बार विधायक तथा केन्द्र एवं राज्य सरकारो में वर्षों मंत्री रहे। ओला परिवार की क्षेत्र के मतदाताओं पर पकड़ मानी जा रही है और इसी आधार पर ओला इस बार कांग्रेस से टिकट मिलने के लिए आशान्वित है। 

प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष डा.चन्द्रभान भी लोकसभा टिकट के लिये प्रयास कर रहे है। डॉ. चंद्रभान को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माना जाता है जिसका उन्हें फायदा मिल सकता है। डा. चन्द्रभान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुये 2013 में मण्डावा से कांग्रेस टिकट पर विधानसभा चुनाव लडक़र अपनी जमानत जब्त करवा चुके हैं। डा. चन्द्रभान अब तक नौ बार विधानसभा का एवं एक बार लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं मगर सिर्फ दो बार ही विधानसभा चुनाव जीत पाये हैं। चुनावों में पांच बार उनकी जमानत जब्त हो चुकी है जो उनका सबसे कमजोर पक्ष माना जा रहा है।  

सूरजगढ़ से कांग्रेस के पूर्व विधायक श्रवण कुमार भी अपनी दावेदारी जता रहे हैं। लेकिन हाल में पिछले विधानसभा चुनाव में वह चुनाव हार गये थे। झुंझुनूं में मुस्लिम मतदाता भी काफी तादाद में हैं जिनको लेकर रियाज फारूकी भी अपनी दावेदारी जता रहे हैं। गत 40 वर्षों से कांग्रेस में काम कर रहे फारूकी की साफ छवि मानी जाती है। झुंझुनूं राजस्थान में ऐसा लोकसभा क्षेत्र है जहां से 1984 एवं 1991 में दो बार कैप्टन अयूब खान दो बार लोकसभा चुनाव जीत कर राजस्थान के पहले मुस्लिम सांसद बने थे।

भाजपा में भी टिकट के दावेदारो की लम्बी कतार है। सांसद संतोष अहलावत का संगठन में विरोध हो रहा है। गत विधानसभा चुनाव लड़ चुके अधिकांश नेता भी उनका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने अपने जेठ के बेटे सुदेश अहलावत को झुंझुनूं नगरपरिषद का सभापति बनवाया जो उनके लिये सबसे बड़ा घाटे को सौदा माना जा रहा है। नगर परिषद की कार्यप्रणाली से शहर का आम आदमी परेशान रहा है। 

राजस्थान सैनिक कल्याण सलाहकार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर, मण्डावा विधायक नरेन्द्र कुमार, उपजिला प्रमुख बनवारीलाल सैनी भी भाजपा उम्मीदवार के रुप में अपनी दावेदारी जता रहें हैं। मण्डावा विधायक नरेन्द्र कुमार ने मलसीसर में बनने वाले सरकारी कालेज के भवन पर खर्च होने वाली छह करोड़ की राशि खुद वहन कर रहे हैं। उप जिला प्रमुख बनवारीलाल सैनी पूर्व में भाजपा से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं तथा पिछले विधानसभा में उनको नवलगढ़ से भाजपा ने टिकट दिया था। मगर स्थानीय लोगो के विरोध के चलते उन्होने टिकट लौटा दी थी। वह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदनलाल सैनी के भी करीबी माने जाते हैं। श्री बाजौर सीकर जिले के नीमकाथाना से दो बार विधायक रहे है तथा पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। मगर उन्होने गत पांच साल से झुंझुनूं जिले के हर गांव में शहीद गौरव यात्रा को लेकर भ्रमण किया है। 

(इनपुट न्यूज एजेंसी वार्ता से भी)
 

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  • Web Title:Lok Sabha election 2019: Who will win Rajasthan Jhunjhunu lok sabha seat