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आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट: यहां का मुकाबला होगा मजेदार, जानें इतिहास

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पिछले पांच लोकसभा चुनावों में पंजाब के आनंदपुर साहिब के मतदाताओं ने वैकल्पिक रूप से शिरोमणि अकाली दल (SAD) और कांग्रेस (Congress) को ही चुना है। कोई भी पार्टी यहां दो बार लगातार चुनाव नहीं जीती है। पिछले चुनावों- 2014 में शिरोमणि अकाली दल के प्रेमसिंह चंदूमाजरा चुनाव जीते थे। उन्होंने कांग्रेस की अंबिका सोनी को लगभग 23 मतों से हराया था। आश्चर्यजनक रूप से पहली बार चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी (AAP) के हिम्मत सिंह शेरगिल को तीन लाख से अधिक मत मिले थे। चौथे नंबर पर बहुजन समाज पार्टी के केएस मखान को लगभग 60 हजार मत मिले थे। 

बता दें कि आनंदपुर साहिब भी परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद 2008 में अस्तित्व में आया। यहां पर पहली बार 2009 में लोकसभा के लिए लोगों ने मतदान किया था। इस इलाके से पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सीमा का बंटवारा होता हैं। कहा जाता है कि आनंदपुर साहिब की स्थापना सिखों के नौंवे गुरू गुरु तेग बहादुर सिंह ने 1665 में की थी। यहां 747,512 महिला मतदाता और 817,186 पुरुष मतदाता हैं। कुल मतदाता यहां 1,564,721 हैं। वहीं, आनंदपुर साहिब सीट के नौ विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के पाले में 5, आप के 3 और अकाली दल के पाले में एक सीट है।

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अगर वर्तमान समीकरण देखे जाए तो प्रदेश में मुख्य विपक्षी पार्टी का रुतबा कमजोर हुआ है और कांग्रेस की प्रदेश में सरकार होने के कारण वह लाभ की स्थिति में है, लेकिन यहां से मुकाबला बहुपक्षीय होगा। शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) ने पूर्व सभापति देवेंद्र सिंह को यहां से उम्मीदवार घोषित किया है। देवेंद्र सिंह कांग्रेस और अकाली शिप्स से कूद कर बाहर आ चुके हैं। यहीं से सिखों के बरगारी इंसाफ मोर्चा ने भी बिक्रम सिंह सोढी को मैदान में उतारा है। टिकट की उम्मीद में ही बहुत से कांग्रसी पार्टी छोड़ कर जा रहे हैं। 

कांग्रेस वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी को ही यहां से उतारने का मन बना चुकी है। हालांकि, वह चुनाव लड़ने के पक्ष में दिखाई नहीं दे रही हैं। अगर वह अंतिम इंकार करती हैं तो उनके बिजनेसमैन पुत्र अनूप को यहां से खड़ा किया जा सकता है। अंबिका सोनी को सोनिया गांधी का करीबी माना जाता है। एसएडी के वर्तमान सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा को यहां से टिकट मिलने की पूरी संभावना है। पिछले पांच माह से वह लगातार यहां दौरे कर रहे हैं। 

उधर, आप ने नरेंद्र सिंह शेरगिल का नाम यहां से तय कर दिया है। शेरगिल एक प्रगतिशील किसान हैं। वह कहते हैं, मैं इस क्षेत्र के लिए पिछले दस सालों से काम कर रहा हूं। मैं हर मतदाता के पास निजी रूप से जा रहा हूं। जाहिर है आनंदपुर साहिब में भी इस बार मुकाबला रोचक होगा। 

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बता दें कि 2009 में इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बेअंत सिंह के पौत्र रवनीत सिंह बिट्टू ने अकाली दल के डॉ. दलजीत सिंह चीमा को हराया था। इसके बाद 2014 में शिरोमणि अकाली दल के प्रेमसिंह चंदूमाजरा यहां से जीते थे। उन्होंने 3,47,394 वोटों से चुनाव जीता था।

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