नीट, चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर लोकसभा में हंगामा
नीट पेपर लीक और राम मंदिर चढ़ावे चोरी को लेकर सोमवार को लोकसभा में तीव्र हंगामा हुआ। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने शोर मचाया, जिसके कारण कार्यवाही छह बार स्थगित की गई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठी। कानून मंत्री ने न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का विधेयक पेश किया।

नीट पेपर लीक, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी सहित अन्य मुद्दों को लेकर लोकसभा में सोमवार को जबरदस्त हंगामा हुआ। नारेबाजी और शोर-शराबे के बीच सदन की कार्यवाही छह बार स्थगन के बाद मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सांसद विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए आसन के करीब आ गए और नारेबाजी करने लगे। लोकसभा अध्यक्ष ने सांसदों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए प्रश्नकाल शुरू कराया, लेकिन हंगामा बढ़ता गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच सदन की कार्यवाही दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर कई सांसदों ने दावा किया कि प्रदर्शन के चलते संसद के गेट बंद कर दिए गए हैं। कई संसद सदस्यों को संसद परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया है। आसन ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि लोक Sabha अध्यक्ष ओम बिरला के आदेश के अनुसार किसी भी सदस्य को प्रवेश से नहीं रोका गया है।
कानून मंत्री का बयान
इस बीच, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। इसमें उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश समेत न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने का प्रावधान है। पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने नारेबाजी कर रहे विपक्षी सांसदों से कार्यवाही चलने की अपील भी की। सदन में हंगामा नहीं थमने पर सदन की कार्यवाही दोपहर 12.30 बजे तक स्थगित कर दी गई। इसके बाद भी हंगामा जारी रहा। दो बार के स्थगन के बाद बैठक फिर शुरू हुई तो पीठासीन सभापति सैकिया ने आसन के समीप हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से शून्यकाल चलने देने की अपील की।
स्थिति का अवलोकन
दोपहर एक बजे बैठक शुरू होने पर भी स्थिति जस की तस बनी रही और कार्यवाही कुछ मिनट बाद ही दो बजे तक स्थगित कर दी गई। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने कहा कि सदन का एजेंडा सरकार द्वारा नहीं, बल्कि कार्य मंत्रणा समिति (बीएससी) की बैठक में तय किया जाता है। उन्होंने कुछ विपक्षी सदस्यों को टोकते हुए कहा कि वो तख्तियां नहीं दिखा सकते क्योंकि यह नियमों के खिलाफ है। हंगामा नहीं थमने पर उन्होंने सदन की बैठक ढाई बजे तक स्थगित कर दी। कार्यवाही फिर शुरू हुई लेकिन विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी और तेज हो गई। इसके बाद सदन मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।


