लोकसभा ने हंगामे के बीच केरलम और एनसीडीसी विधेयकों को मंजूरी दी
लोकसभा ने हंगामे के बीच केरलम और एनसीडीसी विधेयकों को मंजूरी दी-------------------------विपक्ष और सरकार में गतिरोध जारी, बिना चर्चा के पारित हो रहे हैं विधेयक---------------------------नईदिल्ली। ...

लोकसभा ने हंगामे के बीच केरलम और एनसीडीसी विधेयकों को मंजूरी दी------------------------ -विपक्ष और सरकार में गतिरोध जारी, बिना चर्चा के पारित हो रहे हैं विधेयक
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नईदिल्ली। विशेष संवाददाता
विपक्ष और सरकार के बीच गतिरोध
संसद के मानसून सत्र में विपक्ष और सरकार में गतिरोध लगातार बना हुआ है। लगातार 17 वे दिन भी प्रश्नकाल व शून्यकाल नहीं हो सका। सरकार भी इसी हंगामे के बीच अपना विधायी कामकाज निपटा रही है। मंगलवार को सदन ने हंगामे और शोरगुल में केरल नाम परिवर्तन विधेयक 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी)(संशोधन) विधेयक 2026 को चर्चा के बिना ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजकर 25 मिनट पर दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
विधेयकों की चर्चा का अभाव
एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे सदन की बैठक शुरू हुई तो गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने केरल का नाम केरलम करने संबंधी केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक 2026 चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किया। इस दौरान भी विपक्षी दलों के सांसद अयोध्या के राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी पर सदन में चर्चा और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई पर गृह मंत्री शाह के जवाब की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। विधेयक को राय के संक्षिप्त बयान के बाद बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
सहकारी विकास निगम का संशोधन
इसके तुरंत बाद सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक 2026 को चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किया। सदन ने इस विधेयक को भी चर्चा के बिना ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस बीच कई बार पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से अपने स्थान पर जाकर बैठने और विधेयकों पर चर्चा में भाग लेने का बार-बार आग्रह किया।
सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि एनसीडीसी का कार्य सहकारी समितियों के माध्यम से कृषि उपज, खाद्य पदार्थों, औद्योगिक उत्पादन और पशुधन संबंधी सेवाओं तक सीमित था, लेकिन अब वह प्रसंस्करण, भंडारण, विपणन, आयात और निर्यात से संबंधित योजना बनाने और उन्हें लागू करने का कार्य भी कर रहा है। विधेयक के तहत एनसीडीसी को सहकारी समितियों या इस क्षेत्र के विकास में लगी किसी भी इकाई को सीधे ऋण और अनुदान देने का अधिकार मिल सकेगा। शोर-शराबा कर रहे कांग्रेस के सदस्यों को आड़े हाथ लेते हुए मोहोल ने कहा कि 1963 में एनसीडीसी की स्थापना के बाद से 2014 तक इन लोगों (कांग्रेस) की सरकार में 50 साल में एनसीडीसी के तहत केवल 45 हजार करोड़ रुपये के वितरण की व्यवस्था की गई। लेकिन पिछले 11 साल में 4 लाख करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है。
विधेयकों के उद्देश्यों और कारण
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक 2026 के उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार जून 2021 में अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन और केंद्र सरकार द्वारा सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों के बाद सहकारी क्षेत्र के विकास में एनसीडीसी की भूमिका काफी बढ़ गई है। विधेयक में एनसीडीसी के कार्यक्षेत्र (अधिकार क्षेत्र) को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। इसके तहत एनसीडीसी का दायरा केवल सहकारी समितियों के माध्यम से कार्यक्रमों की योजना बनाने और उन्हें बढ़ावा देने तक सीमित न रहकर, सहकारी विकास से जुड़े कार्यक्रमों की योजना बनाने और उन्हें बढ़ावा देने तक किया जाएगा। इसके अलावा विधेयक में एनसीडीसी को सहकारी समितियों या सहकारी विकास से जुड़े किसी भी संस्थान को सीधे ऋण और अनुदान देने का अधिकार देने का प्रावधान किया गया है, बशर्ते इन धनराशियों का इस्तेमाल सहकारी उद्देश्यों के लिए किया जाए।
केरल का नाम परिवर्तन
इसके पहले केरल का नाम बदलकर केरलम करने के प्रावधान वाला विधेयक पेश करते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि केरल की 15वीं विधानसभा ने 14 जून 2024 को संकल्प पारित कर केंद्र सरकार से अपील की थी कि संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार राज्य का नाम बदलकर केरलम करने के लिए तत्काल कदम उठाया जाए। केरल सरकार ने कारण दिया कि मलयालम भाषा में राज्य का नाम केरलम है लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में इसे केरल दर्ज किया गया है। राज्य विधानसभा ने अगस्त 2023 में इसी तरह का एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करते हुए इसे केंद्र को भेजा था, लेकिन गृह मंत्रालय ने इसमें कुछ तकनीकी बदलावों का सुझाव दिया था। संविधान के अनुच्छेद 3 में मौजूदा राज्यों के नाम परिवर्तन का प्रावधान है। विधेयक पारित होने के बाद नित्यानंद राय ने कहा कि हंगामे के बीच केरल से कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने शायद विधेयक पेश किये जाने का समर्थन नहीं किया है। पार्टी स्पष्ट करे कि क्या उन्हें केरल का नाम बदलकर केरलम करने में आपत्ति है।
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