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असम पुलिस के शहीद लोहित सोनोवाल को मरणोपरांत कीर्ति चक्र

कीर्ति चक्र

उल्फा उग्रवादियों से लड़ने में अदम्य साहस और अनुकरणीय नेतृत्व प्रदर्शित करने के लिए असम पुलिस के एक अधिकारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
असम के तिनसुकिया जिले में 19 अप्रैल 2013 को उल्फा उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ में इंस्पेक्टर लोहित सोनोवाल शहीद हो गये थे। मुठभेड़ में दो उग्रवादी भी मारे गये थे। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस अधिकारी ने अदम्य साहस, कर्तव्य के लिए अनुकरणीय समर्पण प्रदर्शित किया और अपने प्राण न्योछावर किये जिसके लिए उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। घटना के दिन, संदिग्ध उल्फा उग्रवादियों के एक समूह के तिनसुकिया जिले के कोरडोईगुरी गांव के आम क्षेत्र में शरण लेने के बारे में सूचना मिलने के बाद पुलिस और सीआरपीएफ ने एक संयुक्त अभियान शुरू किया। तलाश अभियान के दौरान सोनोवाल के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम ने एक घर में कुछ असामान्य गतिविधियां देखीं और उन्होंने नजदीकी इलाके की घेराबंदी की और सबेरा होने का इंतजार किया।
कीर्ति चक्र वीरता, साहसपूर्ण कार्रवाई और प्राण न्योछावर करने के लिए देश का सैन्य पुरस्कार है। अशोक चक्र के बाद शांतिकाल के वीरता पुरस्कारों में यह दूसरा सबसे बड़ा पुरस्कार  है।
 

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  • Web Title:Lohit Sonowal posthumously kirti chakra