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22 जून, 2020|8:00|IST

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लॉकडाउन इफेक्ट: दर्जी ने खोली आलू की दुकान, गोलगप्पा वाला बेच रहा सब्जियां, जिन्दगी बचाए रखने के लिए लोगों ने बदला पेशा

onion prices rise again  reached rs 100 per kg in markets

कोरोना और लॉकडाउन का कई तरह से सामाजिक और आर्थिक बदलाव देखने को मिल रहा है। वैसे कई लोग जिनकी दुकानें बंद हो गईं हैं उन्होंने अपना गुजारा करने के लिए पेशा ही बदल दिया। 

साकची बाजार में चाइनीज फूड का ठेला लगाने वाले सुधीर अब आलू-प्याज बेच रहे हैं। गोलगप्पा बेचने वाले समतानगर के श्यामलाल सब्जी बेचने लगे। आजादबस्ती के फरीद टेलर इन दिनों उसी दुकान में सब्जियां बेच रहे हैं। वैसे लोग जो चाट-पकौड़ी, चाइनीज व गोलगप्पा जैसे स्ट्रीट फूड बेचकर प्रतिदिन अपने परिवार का गुजारा करते थे, लॉकडाउन ने उनके लिए रोजी-रोटी का संकट पैदा कर दिया। 

चाइनीज फूड का ठेला लगाने वाले श्याम लाल ने बताया कि लॉकडाउन ने स्ट्रीट फूड का बाजार खत्म कर दिया तो हमारा गुजारा मुश्किल होने लगा। प्रशासन ने चाउमिन नहीं, कुछ और बेचो। हमने सब्जी बेचने की अनुमति ले ली। कम पूंजी में ही यह काम हो रहा।  

फरीद ने बताया कि उनकी टेलरिंग शॉप जाकिरनगर में है। 21 दिन के लॉकडाउन के कारण लोगों ने दुकान आना बंद कर दिया। इसलिए मैंने उसी दुकान में कपड़ा की सिलाई बंदकर आलू-प्याज बेचने लगा।  सुधीर का कहना है कि पहले से ही चायनीज भोजन पर आफत आ गयी थी। उसके बाद तो लॉकडाउन ही हो गया। मेरे तीन बच्चे हैं, माता-पिता के साथ परिवार में कुल आठ सदस्य हैं। सब का गुजर इसी ठेले से होता था। इसलिए अब जिस ठेले में चायनीज फूड बेचते थे अब उसमें घूम-घूमकर आलू-प्याज बेच रहे हैं। 

रोज उम्मीद पाले रहते हैं दिहाड़ी मजदूर
प्रतिदिन मजदूर मंडी में जाकर काम मांगने वाले दिहाड़ी मजदूरों की हालत और भी दयनीय है। सब तरफ काम बंद हो चुका है, इसलिए कभी सुबह-सुबह गुलजार रहनेवाली मजदूरों की मंडी इन दिनों उदास है। पारडीह निवासी विमला और छोटी लोहार ने बताया कि वे प्रतिदिन सुबह छिप-छिपाकर वहां अवश्य जाती हैं, इस उम्मीद से कि शायद उन्हें कोई मिल जाए। यदि ऐसे ही हालात रहे और राशन नहीं मिला तो हमारे सामने भोजन का संकट पैदा हो जाएगा।

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  • Web Title:Lockdown effect: Many people changed their profession to save life