उद्यान महाविद्यालय में स्थानीय जामुन और खजूर से मूल्य संवर्धन पर दिया प्रशिक्षण
खूंटपानी के उद्यान महाविद्यालय में हेल्प-423 मॉड्यूल के अंतर्गत स्थानीय जामुन एवं खजूर के मूल्य संवर्धन हेतु प्रायोगिक गतिविधि आयोजित की गई। इसका उद्देश्य फलों की क्षति को कम करना और किसानों के लिए नए आय के अवसर विकसित करना है। छात्रों ने विभिन्न उत्पाद तैयार किए, जिनमें जामुन का पेय और खजूर की चटनी शामिल हैं।

खरसावां,संवाददाता। खूंटपानी के उद्यान महाविद्यालय में हेल्प-423 मॉड्यूल के तहत स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जामुन एवं खजूर के मूल्य संवर्धन विषय पर प्रायोगिक गतिविधि आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय फलों की कटाई के बाद होने वाली क्षति को कम करना, किसानों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए आय सृजन के नए अवसर विकसित करना था। प्रशिक्षण के दौरान छात्रों ने वैज्ञानिक विधि से जामुन और खजूर का प्रसंस्करण कर कई मूल्य वर्धित उत्पाद तैयार किए। इनमें जामुन रेडी टू सर्व पेय, जामुन फ्रूट और खजूर की चटनी प्रमुख रहे। इन उत्पादों को तैयार करते समय स्वाद, गुणवत्ता, पोषण और शेल्फ लाइफ बढ़ाने पर ध्यान दिया गया।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों के अनुसार यह पेय कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने, मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी होने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। वहीं खजूर की चटनी का घुलनशील ठोस 62° ब्रिक्स, अनुमापनीय अम्लता 2.1 प्रतिशत और पीएच 2.4 पाया गया। यह उत्पाद रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने और हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार करने में उपयोगी माना जाता है।
कार्यक्रम का संचालन
यह प्रायोगिक गतिविधि डॉ. एके सिंह, डॉ. कोयल डे, डॉ. अंकुंद घोष के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। कार्यक्रम में सोनिया, संगीता, श्रुति, पूजा, प्रिया, मधु, आकांक्षा, बादल, संजीत और आदर्श सहित कई छात्रों ने भागीदारी निभाई।


