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क्या पालतू जानवर का नाम रवींद्रनाथ टैगोर रखोगे? शेरनी के 'सीता' नामकरण पर बोला HC

बंगाल में दो शेरों के नाम अकबर और सीता रखे जाने के विवाद में हाई कोर्ट ने अहम फैसला दिया। अदालत ने बंगाल सरकार से कहा है कि इनके नाम बदले जाएं क्योंकि यह आस्था का सवाल है। इसके अलावा कुछ सवाल भी पूछे।

क्या पालतू जानवर का नाम रवींद्रनाथ टैगोर रखोगे? शेरनी के 'सीता' नामकरण पर बोला HC
Surya Prakashलाइव हिन्दुस्तान,कोलकाताThu, 22 Feb 2024 05:21 PM
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पश्चिम बंगाल के सफारी पार्क में रखे गए दो शेरों के नाम अकबर और सीता रखे जाने के मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। शेरनी का नाम सीता रखे जाने पर आपत्ति जताते हुए विश्व हिंदू परिषद ने हाई कोर्ट में केस दायर किया है। इस बीच गुरुवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने बंगाल सरकार को आदेश दिया कि वह दोनों शेरों के नाम बदल दे ताकि विवादों को खत्म किया जा सके। जज ने कहा कि देवी सीता की देश का बहुसंख्यक समाज पूजा करता है। इसके अलावा अकबर एक काबिल, सफल और सेकुलर मुगल शासक थे। 

वहीं बंगाल सरकार ने शेरों के नामकरण का फैसला त्रिपुरा सरकार का बताया। बंगाल सरकार के वकीलों ने कहा कि इन शेरों का नाम त्रिपुरा में रखा गया था। इसके बाद इन्हें सिलीगुड़ी में ट्रांसफर कर दिया गया था। हालांकि अदालत ने कहा कि भले ही नाम त्रिपुरा में रखा गया था, लेकिन अब इन्हें बदला जाए। जज ने बंगाल सरकार के वकील से कहा, 'क्या आप अपने पालतू जानवर का नाम हिंदू देवता या मुस्लिम पैगंबर के नाम पर रखेंगे? मुझे लगता है कि यदि हमारे पास ऐसा अधिकार हो तो हम में से कोई भी अपने पालतू जानवर का नाम अकबर या सीता नहीं रखेगा। क्या कोई अपने जानवर का नाम रबींद्रनाथ टैगोर रख सकता है?'

जज ने कहा, 'देश का बहुसंख्यक समाज देवी सीता की पूजा करता है। मैं शेर का नाम अकबर रखने के भी पक्ष में नहीं हूं। वह एक योग्य शासक थे।' आप उन शेरों का नाम बिजली या ऐसा कुछ भी रख सकते हैं। लेकिन उनका नाम सीता और अकबर ही क्यों रखना है। बता दें कि विश्व हिंदू परिषद ने इस मामले में अर्जी दाखिल करते हुए आरोप लगाया है कि इस तरह के नामकरण से हिंदुओं की भावनाएं आहत होती हैं। इसके अलावा धर्म के अधिकार का भी इस तरह के नामकरण से उल्लंघन होता है। वीएचपी ने अदालत से मांग की है कि शेरनी का नाम सीता की बजाय कुछ और रख दिया जाए।

बंगाल सरकार को आदेश- तत्काल बदला जाए शेरों का नाम

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने बंगाल सरकार को आदेश दिया है कि वह दोनों शेरों के नाम बदलने के लिए तत्काल कदम उठाए। इससे पहले बुधवार को अदालत ने बंगाल सरकार से पूछा था कि आखिर कब इन शेरों का नामकरण हुआ था और किसने किया था। इस पर बंगाल सरकार के वकील ने कहा कि यह नामकरण राज्य में नहीं हुआ बल्कि त्रिपुरा में हुआ था और वहां से इनको यहां लाया गया था।

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