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चंद्रयान-3 की तरह ISRO 2024 में भी रचेगा इतिहास, साल के पहले ही दिन देगा खुशखबरी

चंद्रयान-3 और आदित्य-एल 1 की सफलता के बाद नए साल के पहले ही दिन इसरो एक्स-रे पोलरिमीटर उपग्रह (एक्सपोसैट) के प्रक्षेपण से न्यू ईयर का स्वागत करने वाला है।

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चंद्रयान-3 की तरह ISRO 2024 में भी रचेगा इतिहास, साल के पहले ही दिन देगा खुशखबरी
Himanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान , नई दिल्ली
Sun, 31 Dec 2023 10:14 PM

चंद्रयान-3 और आदित्य-एल 1 की सफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) साल 2024 में भी कई अंतरिक्ष मिशनों को अंजाम देने वाला है। नए साल के पहले ही दिन इसरो एक स्पेस सैटेलाइट का परीक्षण करने वाला है। इसरो सोमवार को पहले एक्स-रे पोलरिमीटर उपग्रह (एक्सपोसैट) के लॉन्च से नए साल का स्वागत करने के लिए तैयार है। यह सैटेलाइट ब्लैक होल जैसी खगोलीय रचनाओं के रहस्यों से पर्दा उठाएगा। अक्टूबर में गगनयान परीक्षण यान 'डी1 मिशन' की सफलता के बाद यह प्रक्षेपण किया जा रहा है। इस मिशन का जीवनकाल करीब पांच वर्ष का होगा।

ब्लैक होल के रहस्यों का लगाएगा पता
ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी)-सी58 रॉकेट अपने 60वें अभियान पर प्रमुख पेलोड 'एक्सपोसैट' और 10 अन्य उपग्रह लेकर जाएगा जिन्हें पृथ्वी की निचली कक्षाओं में स्थापित किया जाएगा। चेन्नई से करीब 135 किलोमीटर पूर्व में स्थित अंतरिक्ष केंद्र से नए साल के पहले दिन सुबह नौ बजकर 10 मिनट पर होने वाले प्रक्षेपण के लिए 25 घंटे की उलटी गिनती रविवार को शुरू हुई। इसरो सूत्रों ने कहा, ''पीएसएलवी-सी58 के लिए आज सुबह आठ बजकर 10 मिनट पर उलटी गिनती शुरू हुई।'' एक्स-रे पोलरिमीटर सैटेलाइट' (एक्सपोसैट) एक्स-रे स्रोत के रहस्यों का पता लगाने और 'ब्लैक होल' की रहस्यमयी दुनिया का अध्ययन करने में मदद करेगा।

ब्लैक होल के रहस्यों में नासा भी दिखा चुका दिलचस्पी
इसरो के अनुसार, यह खगोलीय स्रोतों से एक्स-रे उत्सर्जन का अंतरिक्ष आधारित ध्रुवीकरण माप में अध्ययन करने के लिए अंतरिक्ष एजेंसी का पहला समर्पित वैज्ञानिक उपग्रह है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के अलावा अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने दिसंबर 2021 में सुपरनोवा विस्फोट के अवशेषों, ब्लैक होल से निकलने वाली कणों की धाराओं और अन्य खगोलीय घटनाओं का ऐसा ही अध्ययन किया था। इसरो ने कहा कि एक्स-रे ध्रुवीकरण का अंतरिक्ष आधारित अध्ययन अंतरराष्ट्रीय रूप से महत्वपूर्ण हो रहा है और इस संदर्भ में एक्सपोसैक्ट मिशन एक अहम भूमिका निभाएगा।

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