गर्भवती की मौत मामले में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हो: संजय बिष्ट
श्रीनगर। देहरादून के एक निजी नर्सिंग होम में गर्भवती महिला की मौत के बाद आर्यन छात्र संगठन ने चिकित्सकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने कहा कि केवल एक लाख रुपये का जुर्माना न्यायसंगत नहीं है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

श्रीनगर। देहरादून के एक निजी नर्सिंग होम में गर्भवती महिला की मौत के मामले में आर्यन छात्र संगठन ने संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
कानूनी कार्रवाई की मांग
संगठन का कहना है कि मामले में केवल एक लाख रुपये का जुर्माना लगाना न्यायसंगत नहीं है। चेतावनी दी गई कि यदि दोषी चिकित्सकों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन शुरू करेगा। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संजय बिष्ट ने कहा कि मामले की जांच रिपोर्ट तथ्यों के विपरीत है।
स्वतंत्र जांच की आवश्यकता
पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। कहा कि पीड़ित पक्ष ने महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं को शिकायत भेजकर पूर्व जांच रिपोर्ट निरस्त करने तथा स्वतंत्र उच्च स्तरीय मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच कराने की मांग की है।
संबंधित आरोप
पूर्व छात्रसंघ महासचिव देवकांत देवराड़ी ने आरोप लगाया कि अस्पताल का पंजीकरण एक चिकित्सक के नाम पर होने के बावजूद ऑपरेशन किसी अन्य चिकित्सक ने किया, जो नियमों के विपरीत है। कहा कि मरीज की गंभीर स्थिति के बावजूद समय पर रक्त की व्यवस्था नहीं की गई और न ही उसे समय रहते उच्च केंद्र रेफर किया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
आगे की कार्रवाई
संगठन ने मामले को उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल की एथिक्स कमेटी को भेजने, अस्पताल के दस्तावेजों का फोरेंसिक ऑडिट कराने तथा दोषी चिकित्सकों एवं अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। मौके पर अंकित झिंकवान और पंकज आदि मौजूद रहे।


