Laxmi Shankar Bajpai kavi hini bhasha interview - अंग्रेजी भाषा की मानसिक गुलामी हमारे लिए सबसे बड़ा संकट - लक्ष्मी शंकर बाजपेयी DA Image

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अंग्रेजी भाषा की मानसिक गुलामी हमारे लिए सबसे बड़ा संकट - लक्ष्मी शंकर बाजपेयी

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देश के मशहूर कवि लक्ष्मी शंकर बाजपेयी ने हिंदी भाषा को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान को दिए खास साक्षात्कार में कहा कि हिंदी विश्व भर में अपनी रफ्तार से बढ़ रही है। इसे दूसरे देश भी पढ़ाई का हिस्सा बना रहे हैं, लेकिन फिलहाल इसके विकास पर और काम करने की जरूरत है। उन्होंने इस दौर के अभिभावकों को भी हिंदी भाषा से जुड़ी विशेष सलाह दी। 

बाजपेयी ने हिंदी दिवस मनाने की बात पर कहा, हम होली-दिवाली मनाते हैं उसी तरह हिंदी दिवस भी मनाना अच्छा है। हिंदी पूरी दुनिया में बढ़ रही है, क्यों कि इसका बाजार बहुत बढ़ गया है। अमेरिका के कुछ विद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। लेकिन अभी तक हमारा देश इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दे सका है। 

उन्होंने कहा, हमें अपनी कमियों को पहचनाने की जरूरत है। सिर्फ कविता या कहानी से हिंदी का विकास नहीं होगा। हिंदी विचार और विमर्श की भाषा बननी चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होगा तब तक तेज रफ्तार से  इसका विकास नहीं हो सकेगा। 

 

आज कल अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाना चाहते हैं। इस पर उन्होंने कहा, यह ठीक नहीं है। अगर बच्चे की पढ़ाई उसकी मातृभाषा में नहीं होती है तो उसका बौद्धिक विकास उतना नहीं हो पाता जितना कि होना चाहिए। आज भी कई अंग्रेजी स्कूलों में बच्चों को हिंदी नहीं बोलने दी जाती है। यदि वो ऐसा करते हैं तो उन्हें सजा दी जाती है। हमारे देश में यह सबसे बड़ा संकट है।

लक्ष्मी शंकर बाजेपयी ने हिंदी के लोगों का जिक्र करते हुए कहा, हिंदी की अपनी ताकत बहुत ज्यादा है। अब हिंदी बोलने और जानने वाले लोगों को हिंदी को अपनाने की जरूरत है। हमें हिंदी पर गर्व करने की जरूरत है। लोगों को अंग्रेजी की मानसिक गुलामी से निकलना चाहिए है। 

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